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Sat. Aug 30th, 2025

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति का एक अहम हिस्सा रहा है भारत के पड़ोसी देशों के साथ मजबूत रिश्ते बनाना। इसी कड़ी में उनकी हालिया मालदीव यात्रा ने भारत-मालदीव संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का कार्य किया है। 25 जुलाई 2025 को प्रधानमंत्री मोदी जब माले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे, तो मालदीव सरकार और भारतीय समुदाय की ओर से उनका भव्य स्वागत किया गया। यह यात्रा न केवल कूटनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए भी एक भावनात्मक क्षण बन गई।

मालदीव में भव्य स्वागत और सांस्कृतिक सम्मान

पीएम मोदी के स्वागत के लिए मालदीव सरकार ने परंपरागत तरीकों का इस्तेमाल किया। ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक मालदीवियन नृत्य और गाने से वातावरण जीवंत हो उठा। माले की सड़कों पर भारत और मालदीव के झंडे लहराते नजर आए, जिससे दोनों देशों की मित्रता का प्रतीक स्पष्ट दिखा। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुईज़ु ने खुद एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया, जो इस यात्रा की महत्ता को रेखांकित करता है।

भारतीय समुदाय से मालदीव में आत्मीय संवाद

मालदीव में रह रहे भारतीय समुदाय से प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष मुलाकात की। इस संवाद में उन्होंने प्रवासी भारतीयों की उपलब्धियों की सराहना की और भरोसा दिलाया कि भारत सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि विदेश में रह रहे भारतीय न केवल भारत के सांस्कृतिक प्रतिनिधि हैं, बल्कि दो देशों के बीच सेतु की भूमिका भी निभाते हैं।

सामरिक और आर्थिक सहयोग पर चर्चा

प्रधानमंत्री की यह यात्रा केवल सांस्कृतिक और सामाजिक सीमाओं तक सीमित नहीं रही। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी रणनीतियाँ, ब्लू इकॉनमी, पर्यटन और व्यापार पर विस्तृत बातचीत हुई। भारत ने मालदीव को एक नया तटरक्षक पोत और गश्ती नाव देने की घोषणा की, जिससे समुद्री सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकेगा।

इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने मिलकर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, डिजिटल पेमेंट्स और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए नए समझौते पर हस्ताक्षर किए। भारत ने मालदीव को 150 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता देने का भी ऐलान किया है।

चीन के प्रभाव की काट?

पीएम मोदी की यह यात्रा रणनीतिक दृष्टिकोण से भी देखी जा रही है। हाल के वर्षों में चीन के प्रभाव में वृद्धि हुई है, जिसके चलते भारत की चिंताएं बढ़ी थीं। ऐसे में पीएम मोदी की यह यात्रा मालदीव को यह संदेश देने में सफल रही कि भारत उसके लिए एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक साझेदार है। भारत का ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘सागर’ (Security and Growth for All in the Region) विजन इसी नीति की पुष्टि करता है।

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