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Sat. Aug 30th, 2025

संसद का मानसून सत्र अब सिर्फ कानून बनाने का नहीं, बल्कि शब्दों की जंग का अखाड़ा बन चुका है। आज जब लोकसभा में पुलवामा हमले और ऑपरेशन सिंधूर पर चर्चा होनी थी, तो माहौल एकदम गरम हो गया। और इस आग में घी डालने का काम किया विदेश मंत्री के एक बयान ने — जिसमें उन्होंने कहा कि “कई बार भारत को विदेशी खुफिया एजेंसियों के इनपुट पर भरोसा करना पड़ता है।”

बस फिर क्या था… विपक्ष को मौका मिल गया, और संसद में जमकर हंगामा शुरू हो गया। लेकिन बात यहीं नहीं रुकी, क्योंकि इसके बाद मैदान में उतरे गृहमंत्री अमित शाह, और फिर उन्होंने विपक्ष की ऐसी क्लास लगाई कि हर कोई देखता रह गया

संसद में किस बात पर मचा बवाल ?

विदेश मंत्री ने हाल ही में एक बयान दिया कि भारत ने कुछ ऑपरेशनों में दूसरे देशों के इंटेलिजेंस इनपुट का इस्तेमाल किया। विपक्ष को यह बात नागवार गुजरी। उनका आरोप था कि इससे भारत की संप्रभुता और आत्मनिर्भर सुरक्षा नीति पर सवाल उठता है।

आज दोपहर 12 बजे जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, तो पुलवामा हमले पर चर्चा होनी थी। लेकिन विपक्ष ने विदेश मंत्री के बयान को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया। शोर-शराबा, नारेबाज़ी, और आरोपों की बौछार शुरू हो गई।

अमित शाह का जवाब – सीधा, सटीक, और करारा

जैसे ही हंगामा बढ़ा, गृहमंत्री अमित शाह खड़े हुए और अपना जवाब दिया — लेकिन वो जवाब नहीं, विपक्ष के लिए सीधा संदेश था।

उन्होंने कहा:

“ये नया भारत है। आज हमारी खुद की खुफिया एजेंसियां हैं, हमारे सैटेलाइट हैं, हमारे जांबाज़ जवान हैं। हमें किसी और देश के भरोसे बैठने की ज़रूरत नहीं है। आप राजनीति कर सकते हैं, लेकिन देश की सुरक्षा पर मत खेलिए!”

उनकी इस बात पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार तालियां बजाईं, वहीं विपक्षी नेता और भी उग्र हो गए।

लोकसभा संसद में 2 बार कार्यवाही स्थगित

शाह के बयान के बाद विपक्ष और भी आक्रामक हो गया। कई सांसद वेल तक आ गए। हालात ऐसे हो गए कि लोकसभा अध्यक्ष को दो बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

पहली बार 12:45 बजे और फिर 2:15 बजे। इस दौरान नारेबाज़ी इतनी तेज़ थी कि स्पीकर को माइक बंद करना पड़ा।

विपक्ष बोला – “ये मुद्दा छोटा नहीं”

कांग्रेस, टीएमसी और आप समेत कई दलों ने सरकार से यह स्पष्टीकरण मांगा कि आखिर एक सॉवरेन देश होने के बाद भी हमें बाहरी इंटेलिजेंस इनपुट की ज़रूरत क्यों पड़ रही है?

खड़गे साहब ने तो यहां तक कह दिया कि:

“जब आपके पास अपनी एजेंसियां हैं, तो विदेशी मदद लेना आपकी अक्षमता दर्शाता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ है।”

बीजेपी बोली – “जो खुद कमज़ोर थे, अब सवाल उठा रहे”

भाजपा प्रवक्ता और कुछ वरिष्ठ सांसदों ने पलटवार करते हुए कहा कि जो पार्टियां खुद सरकार में रहते हुए विदेशी दबाव में फैसले लेती थीं, अब आज देशभक्ति सिखा रही हैं।

एक सांसद ने तंज कसते हुए कहा:
“आज अगर कोई देश हमारे साथ खड़ा होता है, तो वो हमारी ताकत की वजह से, ना कि हमारी मजबूरी की वजह से!”

जनता की राय भी बंटी

सोशल मीडिया पर इस बहस ने भी दो धड़े बना दिए हैं। एक तरफ लोग अमित शाह के तेवर की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ लोगों को लग रहा है कि विदेश मंत्री का बयान वाकई थोड़ा सोच-समझकर देना चाहिए था।

ट्विटर पर #IndiaSecurity और #ShahVsOpposition जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं।

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