अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए जापान में स्थित अपने महत्वपूर्ण काडेना एयर बेस पर चीन की इलेक्ट्रिक कार कंपनी BYD की गाड़ियों की एंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला 26 अक्टूबर से लागू किया गया है। अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि इन कारों में लगे कैमरे, सेंसर और GPS सिस्टम के जरिए सैन्य ठिकानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक हो सकती है।
कारों के कैमरे और सेंसर से डेटा लीक होने का डर
आधुनिक इलेक्ट्रिक कारों में कई हाईटेक कैमरे और सेंसर लगे होते हैं। ये सिस्टम आसपास की तस्वीरें और दूसरी जानकारियां इकट्ठा कर सकते हैं। अमेरिकी अधिकारियों को डर है कि इस डेटा का इस्तेमाल सैन्य ठिकानों की मैपिंग करने या उनकी गोपनीय जानकारी जुटाने के लिए किया जा सकता है।
अमेरिकी सेना ने यह प्रतिबंध केवल अपने कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि सैन्य अड्डे पर आने वाले ठेकेदारों, कमर्शियल वाहनों और स्थानीय टैक्सियों पर भी लागू किया है।
पेंटागन की सूची में BYD का नाम
अमेरिका और चीन के बीच तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है। खबर के मुताबिक, पेंटागन ने BYD समेत कई चीनी कंपनियों को चीनी सैन्य क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों की सूची में शामिल किया है।
इससे पहले भी अमेरिका ने सुरक्षा चिंताओं के कारण Huawei और ZTE जैसी चीनी कंपनियों की तकनीक पर कई तरह की पाबंदियां लगाई हैं।
रिमोट हैकिंग का भी खतरा
अमेरिका की चिंता केवल डेटा लीक होने तक सीमित नहीं है। आधुनिक कनेक्टेड कारों में ऐसे सॉफ्टवेयर और सिस्टम होते हैं, जिन्हें इंटरनेट के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि अगर इन सिस्टम को हैक कर लिया गया, तो गाड़ियों के कामकाज और नेविगेशन में बाधा पहुंचाई जा सकती है। इससे सैन्य अड्डों के भीतर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है।
हालांकि, इस तरह की हैकिंग की आशंका को BYD की गाड़ियों के जरिए जासूसी किए जाने का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
क्या दूसरे अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी लगेगा प्रतिबंध?
जापान के ओकिनावा में स्थित काडेना एयर बेस प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां से अमेरिका अपने कई अहम सैन्य अभियानों को संचालित करता है।
इस फैसले के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका जापान और दक्षिण कोरिया में मौजूद अपने दूसरे सैन्य ठिकानों पर भी इसी तरह के प्रतिबंध लगा सकता है। फिलहाल, ऐसे किसी विस्तार की पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका का यह कदम दिखाता है कि वह सैन्य सुरक्षा के मामले में विदेशी तकनीक से जुड़े जोखिमों को गंभीरता से ले रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से आगे बढ़ रही चीनी इलेक्ट्रिक कार कंपनियों के सामने भी नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।



