हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा बड़ा होकर नौकरी करे, आत्मनिर्भर बने और अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाए। लेकिन अगर बेटा बालिग होने के बाद भी बेरोजगार है, तो क्या वह अपने माता-पिता से गुजारा भत्ता मांग सकता है? उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की फैमिली कोर्ट में सामने आए एक मामले ने इस सवाल को चर्चा में ला दिया है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बालिग संतान भी माता-पिता से भरण-पोषण पाने के लिए याचिका दाखिल कर सकती है। हालांकि, इसके लिए उसे कानून में तय शर्तों को पूरा करना होगा। कोर्ट ने फिलहाल याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किया है, लेकिन गुजारा भत्ता देने का अंतिम आदेश नहीं दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर का है। जानकारी के मुताबिक, अमन के माता-पिता के बीच साल 2006 में विवाद हुआ था, जिसके बाद दोनों का तलाक हो गया। तलाक के बाद दोनों ने अलग-अलग शादी कर ली।
अमन के पिता जैनुल हक ने अदालत में कहा कि पहले हुए समझौते में बेटे के भरण-पोषण को लेकर शर्तें तय की गई थीं। उन्होंने यह भी बताया कि वह पहले बेटे के खर्च का भुगतान करते रहे हैं।
पिता का तर्क था कि उनका बेटा अब बालिग और पढ़ा-लिखा है। वह एक दुकान पर ऑनलाइन फॉर्म भरने का काम भी करता है। ऐसे में वह अपना खर्च खुद उठा सकता है और उसे गुजारा भत्ता देने की जरूरत नहीं है।
इसी मामले में अमन ने अदालत में याचिका दाखिल की थी।
कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैमिली कोर्ट ने पिता की आपत्ति खारिज कर दी और अमन की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।
हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि याचिका स्वीकार करने का मतलब यह नहीं है कि अमन को गुजारा भत्ता देने का आदेश दे दिया गया है। आगे की सुनवाई में उसे यह साबित करना होगा कि वह अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है और कानून के तहत सहायता पाने का पात्र है।
क्या कहता है कानून?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 144 में भरण-पोषण से जुड़े प्रावधान दिए गए हैं। बालिग संतान के मामले में गुजारा भत्ता पाने की पात्रता कानून में तय शर्तों पर निर्भर करती है।
इसलिए केवल बेरोजगार होना या माता-पिता से आर्थिक सहायता मांगना अपने आप में गुजारा भत्ता पाने का अधिकार नहीं देता। अदालत मामले के तथ्यों और संबंधित कानूनी शर्तों के आधार पर फैसला करती है।
फिलहाल, सुल्तानपुर फैमिली कोर्ट ने अमन की याचिका पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। अभी यह तय होना बाकी है कि वह गुजारा भत्ता पाने का पात्र है या नहीं।



