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Sat. Aug 30th, 2025

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला किया है। शिवराज ने तंज कसते हुए कहा, “राहुल गांधी के भाग्य में ही माफ़ी मांगना लिखा है।” उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।

शिवराज सिंह का यह बयान उस वक्त आया जब वह विपक्ष की भूमिका, कांग्रेस पार्टी की नीतियों और ओबीसी समुदाय को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी हमेशा हर विषय को समझने में देर करते हैं और जब समझते हैं, तब तक हालात बदल चुके होते हैं।

ओबीसी मुद्दे पर शिवराज के कांग्रेस से सवाल

शिवराज सिंह ने ओबीसी आरक्षण और अधिकारों को लेकर कांग्रेस पार्टी की नीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को यह बताना चाहिए कि जब उनकी सरकार थी, तब ओबीसी समुदाय के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल वोटबैंक की राजनीति के लिए जातीय जनगणना और सामाजिक न्याय की बात करती है, लेकिन कभी भी ईमानदारी से इन वर्गों के लिए काम नहीं करती।

मंडल आयोग की रिपोर्ट पर शिवराज की टिप्पणी

शिवराज सिंह ने राहुल गांधी से यह सवाल भी पूछा कि क्या वह बता सकते हैं कि मंडल आयोग की रिपोर्ट को कांग्रेस सरकार के दौरान ठंडे बस्ते में क्यों डाला गया? उन्होंने कहा कि जो पार्टी खुद मंडल आयोग की सिफारिशों को लंबे समय तक दबाकर बैठी रही, आज वही पार्टी सामाजिक न्याय की सबसे बड़ी हितैषी बनने का दिखावा कर रही है।

माफ़ी मांगने की परंपरा पर तंज

शिवराज सिंह चौहान ने अपने बयान में कहा, “राहुल गांधी को बार-बार माफ़ी मांगनी पड़ती है क्योंकि वे या तो तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं या बिना जानकारी के बयान देते हैं।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से लेकर संसद तक कई बार अपने बयानों के लिए माफ़ी मांगनी पड़ी है। इस क्रम में उन्होंने हाल ही में राहुल गांधी द्वारा की गई एक विवादास्पद टिप्पणी का ज़िक्र किया, जिसके बाद उन्हें राजनीतिक और कानूनी रूप से घिरना पड़ा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

शिवराज सिंह चौहान के इस बयान पर कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आना तय है। कांग्रेस पार्टी बार-बार भाजपा पर आरोप लगाती रही है कि वह व्यक्तिगत हमले करती है और मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश करती है। इस बयान को भी कांग्रेस भाजपा की रणनीति का हिस्सा मान रही है, खासकर तब, जब आगामी चुनावों के लिए ज़मीन तैयार की जा रही है।

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