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Sat. Aug 30th, 2025

साफगोई की मिसाल माने जाने वाले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने मंच से ही ऐसा बयान दे डाला, जिसने न सिर्फ सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया, बल्कि फ्री में सब पाने की मानसिकता पर भी करारा तंज कस दिया। गडकरी ने सरकारी तंत्र को “बहुत निकम्मा” कहकर अपने दिल की भड़ास सबके सामने निकाल दी।

क्या बोले गडकरी?

नागपुर में एक स्थानीय कार्यक्रम के दौरान गडकरी का पारा उस वक्त चढ़ गया जब उन्होंने स्टेडियम बनवाने की अपनी निजी इच्छा जाहिर की और सरकारी कॉर्पोरेशन की लेटलतीफी से तंग आकर मंच से ही कह डाला:\

“सरकार बहुत निकम्मी चीज है… निगम के भरोसे कोई काम नहीं होता, वो सिर्फ गाड़ियां पंक्चर कर सकता है। और सबसे बड़ी बात – सबको फोकट का चाहिए, मुफ्त में कुछ नहीं मिलेगा।”

यहीं नहीं रुके, उन्होंने फ्रिज मांगने की एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा —
“मैंने साफ बोल दिया, मैं फ्री में कुछ नहीं दूंगा।”

क्या थी गडकरी कीे गुस्से की असली वजह ?

असल में, गडकरी नागपुर में एक स्टेडियम बनवाना चाहते थे, और इसके लिए उन्होंने स्थानीय निकायों से सहयोग मांगा। लेकिन जब सरकारी अधिकारियों की ढीली चाल और टालमटोल रवैया सामने आया, तो गडकरी का सब्र टूट गया। उन्होंने कहा कि सरकारी महकमा कोई भी काम समय पर नहीं करता — और जब करता है, तो उसमें भी पेंच डाल देता है।

फ्रीबी कल्चर पर वार

गडकरी का ये बयान सिर्फ एक स्टेडियम की नाराजगी नहीं थी — उन्होंने भारत में पनपते “फ्रीबी कल्चर” यानी मुफ्तखोरी की प्रवृत्ति पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “आज हर किसी को सब कुछ मुफ्त में चाहिए — चाहे बिजली हो, पानी हो या सुविधा। लेकिन कोई ये नहीं सोचता कि इसकी कीमत कौन चुका रहा है?”

विपक्ष को मिला मुद्दा

इस बयान के बाद विपक्ष ने तुरंत मोर्चा खोल दिया।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कटाक्ष करते हुए कहा —

“जब खुद मंत्री कह रहे हैं कि सरकार निकम्मी है, तो जनता किससे उम्मीद करे?”

AAP ने इसे भाजपा के अंदर का मतभेद बताया और कहा कि गडकरी खुद सरकार की असलियत उजागर कर रहे हैं।

बीजेपी का बचाव

हालांकि बीजेपी ने बयान पर डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि गडकरी का इशारा किसी खास विभाग या अफसर की तरफ था, पूरी सरकार की तरफ नहीं। उन्होंने ये भी जोड़ा कि गडकरी हमेशा “काम के बदले काम” और पारदर्शिता की बात करते हैं।

सोशल मीडिया पर गरमाया मुद्दा

ट्विटर और फेसबुक पर इस बयान को लेकर बहस छिड़ गई।
एक यूज़र ने लिखा —
“गडकरी ने वो कह दिया जो हर आम आदमी सोचता है, लेकिन कह नहीं पाता!”
तो दूसरे ने तंज कसा —
“अगर सरकार निकम्मी है, तो गडकरी किसके मंत्री हैं?”

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