भारत के संसदीय इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। केंद्रीय बजट 2026 को पहली बार रविवार, 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश किया जाएगा। यह निर्णय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा औपचारिक रूप से घोषित किया गया है, जिससे यह दिन न केवल राजनीतिक रूप से बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बन गया है।
बजट 2026 –
आम बजट, जिसे Union Budget या केंद्रीय बजट के नाम से भी जाना जाता है, भारत सरकार की वार्षिक वित्तीय योजना है। इसमें सरकार वर्ष भर के खर्च और आय के लक्ष्य तय करती है और वित्तीय नीतियों का निर्देश देती है। हर साल वित्त मंत्री संसद के दोनों सदनों के समक्ष इसे पेश करती हैं।
परम्परा रही है कि आम संसद में वर्ष के पहले महीने के अंत यानी 1 फरवरी को पेश किया जाता है ताकि अप्रैल 1 से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष के लिए वित्तीय दिशा समय पर तय हो सके। इस वर्ष 1 फरवरी रविवार को पड़ने के कारण चर्चा थी कि क्या सरकार इसे सोमवार 2 फरवरी को आगे करेगी, लेकिन संसद ने 1 फरवरी को रविवार की तारीख को ही बजट दिवस के रूप में अंतिम रूप दिया है।
निर्मला सीतारमण का नौवां बजट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस को पेश करेंगी और यह उनके लिए लगातार नौवां केंद्रीय बजट होगा। इससे वे पूर्व प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच जाएँगी, जिन्होंने 20वीं सदी में सबसे अधिक बजट पेश किए थे।
इस उपलब्धि का महत्त्व न केवल व्यक्तिगत है, बल्कि यह एक महिला नेता के रूप में एक महत्वपूर्ण शक्ति-प्रदर्शन भी है — एक ऐसी भूमिका जिसमें अर्थव्यवस्था की दिशा और रणनीति तय करने की जिम्मेदारी शामिल है। पेश करना केवल आंकड़ों का विवरण नहीं है; यह देश की आर्थिक प्राथमिकताएँ, राजकोषीय नीतियाँ, निवेश योजनाएँ, और वित्त वर्ष के विकास लक्ष्य तय करने का सबसे बड़ा मंच है।
संसदीय बजट सत्र: शेड्यूल और महत्व
सत्र की शुरुआत 28 जनवरी 2026 से होगी और यह लगभग 2 अप्रैल 2026 तक चलेगा। सत्र को दो चरणों में विभाजित किया गया है:
- पहला चरण: 28 जनवरी से 13 फरवरी तक।
- मध्यावधि ब्रेक: 13 फरवरी से 9 मार्च तक।
- दूसरा चरण: 9 मार्च से 2 अप्रैल तक।
यह विभाजन इसलिए किया गया है ताकि संसदीय समितियाँ विभिन्न बजट प्रस्तावों और मंत्रालयों की मांगों का विस्तृत परीक्षण कर सकें। इससे बजट का विश्लेषण, संशोधन सुझाव, और आलोचनात्मक समीक्षा भी संभव होती है। सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से होगी, जिसके बाद आर्थिक सर्वेक्षण और दस्तावेज संसद में पेश किए जाएंगे।
सत्र का प्रमुख उद्देश्य है कि संसद के दोनों सदनों — लोकसभा और राज्यसभा — में सरकार की आर्थिक नीतियों का व्यापक रूप से चर्चा हो और देश के सभी निर्णय-निर्माताओं द्वारा उसका विश्लेषण किया जा सके। इससे संतुलित नीति-निर्धारण सुनिश्चित होता है और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ती है।
रविवार को बजट प्रस्तुति का ऐतिहासिक पहलू
बजट का रविवार को प्रस्तुति होना हाल की संसद प्रणाली में इतना आम नहीं रहा है। हालांकि इससे पहले कुछ वर्षों में सप्ताहांत पर बजट पेश होने के उदाहरण आए हैं — जैसे कि बजट 2025 को शनिवार, 1 फरवरी 2025 को पेश किया गया था — लेकिन रविवार को पेश होने वाला बजट अब तक पहली बार हो रहा है।
इस बदलाव का बड़ा कारण यह है कि 1 फरवरी को ही वित्त वर्ष से पहले बजट के निर्णय को पारित करना आवश्यक हो जाता है, जिससे रास्ते में किसी प्रकार की देरी नहीं आए। वहीं, बाज़ार और निवेश समुदाय को भी बजट के प्रस्तावों का विश्लेषण करने के लिए अतिरिक्त समय मिलता है क्योंकि बाजार रविवार को बंद रहता है। इससे संपूर्ण रणनीति और तैयारी अधिक प्रभावी ढंग से हो पाती है।
आर्थिक सर्वेक्षण और बजट के दस्तावेज़
सत्र के दौरान सबसे पहला महत्वपूर्ण कदम होता है आर्थिक सर्वेक्षण का पेश होना। यह वित्त मंत्री के नेतृत्व में तैयार की गई एक विस्तृत रिपोर्ट होती है, जिसमें भारत की वर्तमान आर्थिक स्थिति, विकास दरें, विभिन्न सेक्टरों की ताक़त और कमजोरियाँ, और आगामी वित्तीय नीतियों की संभावनाएँ शामिल रहती हैं। यह सर्वेक्षण बजट के आधारशिला भी माना जाता है।
इसके पश्चात बजट का औपचारिक दस्तावेज पेश किया जाता है, जिसमें विस्तृत तौर पर राजकोषीय घाटा, राजस्व अनुमान, निवेश योजनाएँ, कर प्रस्ताव, सरकारी व्यय और सब्सिडी आदि का ब्यौरा शामिल होता है। संसद में बजट दस्तावेज पेश होने के बाद सदस्य उस पर विस्तृत चर्चा करते हैं और आवश्यक संशोधनों के लिए परामर्श जारी रखते हैं।
आगे की प्रक्रिया और संभावित प्रभाव
बजट पेश होने के बाद संसद बजट प्रस्तावों पर चर्चा करेगी, जिसमें वित्तीय विधेयक, अनुदान प्रस्तावों, और वित्त वर्ष 2026-27 के कार्यक्रमों पर निर्णय लिया जाता है। यह प्रक्रिया संसद के द्वारा योजनाओं की मंज़ूरी सुनिश्चित करती है और अगले वित्तीय वर्ष के लिए आर्थिक गियर तय करती है।
एक ऐतिहासिक सप्ताहांत के रूप में 1 फरवरी 2026 न केवल वित्तीय विशेषज्ञों के लिए बल्कि आम नागरिकों, व्यापार जगत, निवेशकों, और नीति-निर्माताओं के लिए भी बेहद मायने रखता है। इससे आर्थिक प्रक्षेपण, निवेश की दिशा, तथा उपभोक्ता विश्वास को नई दिशा मिल सकती है।
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