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Fri. Jan 23rd, 2026

I-PAC-ED Raids Case: क्या है पूरा विवाद?

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने **राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े राजनीतिक सलाहकार समूह I-PAC (Indian Political Action Committee) के कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के घर पर 8 जनवरी 2026 को छापेमारी की। ED ने बताया कि यह कार्रवाई अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत की जा रही थी, जिसमें कथित कोल स्कैम और अवैध लेन-देन की जांच शामिल थी।
कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई 35 करोड़ रुपये से अधिक के कोल घोटाले से जुड़ी है, जिसमें कथित तौर पर अवैध कोल खनन और आर्थिक अपराध शामिल हैं।

I-PAC-ED

यह मामला जल्द ही हाई-वोल्टेज विवाद में बदल गया जब पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद I-PAC के दफ्तर पर पहुंच गईं, पुलिस सहयोग के साथ, और वहां से कुछ दस्तावेज़ एवं इलेक्ट्रॉनिक डेटा साथ ले जाने का दावा किया गया। ED ने आरोप लगाया कि इससे जांच में बाधा आई और यह एक वैधानिक कार्रवाई में बाधा उत्पन्न करने जैसा था

तृणमूल कांग्रेस ने इस छापेमारी को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और कहा कि ED ने पार्टी के संवेदनशील चुनावी डेटा और रणनीति को हटाने का प्रयास किया। TMC ने कोर्ट में याचिका दायर की कि कोई भी डेटा जब्त नहीं किया जाए और उसे लौटाया जाए, क्योंकि यह पार्टी की निजता और राजनीतिक रणनीति से जुड़ा है।

कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई और TMC की याचिका का खारिज

14 जनवरी 2026 को कलकत्ता हाईकोर्ट में I-PAC छापेमारी विवाद से जुड़ी TMC और ED की याचिकाओं की सुनवाई हुई। मुख्य सुनवाई का केंद्र बिंदु था:

TMC की याचिका:

  • ED द्वारा कथित रूप से जब्त किए गए राजनीतिक डेटा और दस्तावेजों का संरक्षण।
  • इन दस्तावेज़ों को ज़िला-योजना और चुनावी रणनीति के लिए संवेदनशील बताया गया।
  • TMC का कहना था कि इनका राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के हाथों जा जाना लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है।

ED की दलील:

  • ED ने कोर्ट में बताया कि **8 जनवरी को I-PAC के ऑफिस और प्रतीक जैन के घर से ‘कुछ भी जब्त नहीं किया गया’
  • अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कोई दस्तावेज़ ED के पास नहीं है। कोर्ट को बताया गया कि यदि कोई रिकॉर्ड हटाया गया है तो वह ममता बनर्जी और उनके सहयोगियों के द्वारा हटाया गया।

इस दलील के आधार पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC की याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि ‘कुछ भी जब्त नहीं किया गया है’ — इसलिए TMC की ज़रूरत के अनुरूप कोर्ट से कोई निर्देश नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि अब ED और TMC की याचिकाओं में आगे की सुनवाई के लिए मामला आगे बढ़ेगा, खासकर ED द्वारा दायर सीबीआई जांच की याचिका के संदर्भ में।

क्यों है मामला हाई-प्रोफाइल?

यह मामला सिर्फ एक प्रशासनिक विवाद नहीं रह गया है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गया है। इसकी प्रमुख वजहें हैं:

1. सत्ता संघर्ष और राजनीतिक विवाद

ED की कार्रवाई को कुछ विश्लेषकों ने राजनीतिक इंटरफेरेंस का हिस्सा माना है, खास कर 2026 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए। यह विवाद सत्तारूढ़ पार्टी और केंद्र के बीच संघीय अधिकारिता और शक्ति संतुलन पर सवाल खड़े करता है।

2. चुनावी डेटा की संवेदनशीलता

I-PAC के पास डेटा-संचालित राजनीतिक रणनीति, वोटर डेटाबेस, भविष्य की चुनावी योजनाएँ और सर्वेक्षण डेटा हो सकता है। इससे यह मामला सिर्फ जांच से आगे बढ़कर भविष्य की चुनावी ताकत पर प्रभाव डालने वाली एक राष्ट्रीय घटना बन गया है।

3. आपराधिक और विधिक दिशा

ED की याचिका में यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने जांच अधिकारियों के कर्तव्यों में बाधा डाली, जो कि भारतीय कानून के तहत गंभीर आरोप हैं। ED ने कहा कि यह PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लाउंडरिंग एक्ट) के तहत जांच को प्रभावित करने जैसा है।

अगले कदम और संभावित परिणाम

सीबीआई जाँच

ED ने सीबीआई जांच मांगने का भी निर्णय लिया है, जिसमें यह आरोप है कि ममता बनर्जी ने कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित किया। हाईकोर्ट ने इस याचिका को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है, लेकिन मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच चुका है।

राजनीतिक प्रतिबिंब

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह मामला सिर्फ एक एजेंसी बनाम पार्टी की लड़ाई नहीं, बल्कि देश में कानून के शासन, शक्ति संतुलन और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की भी परीक्षा है।

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