27 जनवरी 2026 को भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA ) पर सहमति व्यक्त की, जिसे दोनों पक्षों ने “मदर ऑफ ऑल डील्स” यानी सभी व्यापार समझौतों में सबसे बड़ा बताया है। यह समझौता उन दो अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ता है, जो वैश्विक GDP का लगभग 25 % और लगभग 2 बिलियन उपभोक्ताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।
यह समझौता क्यों ऐतिहासिक है?
यह समझौता लगभग 20 वर्षों की बातचीत के बाद अंतिम चरण में पहुंचा है। इसके तहत दोनों पक्षों ने बड़ी संख्या में वस्तुओं और सेवाओं पर टैरिफ घटाने या समाप्त करने पर सहमति दी है, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं को एक दूसरे के बाजार तक व्यापक पहुंच देगा।
समझौते के तहत:
- EU के लगभग 96.6 % वस्तुओं पर टैरिफ कटौती या समाप्ति होगी।
- भारत के 99 % निर्यात को प्राथमिकता-आधारित बाजार पहुँच मिलेगी।
- कई क्षेत्रों में सेवाओं, डिजिटल व्यापार, निवेश, बौद्धिक संपदा और कस्टम प्रक्रियाओं में सहयोग बढ़ेगा।
भारत के लिए FTA के मुख्य लाभ
1. 📦 निर्यात में बड़ा विस्तार
भारत के कपड़ा, चमड़ा, रत्न-गहने, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएँ और रसायन जैसे निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों को EU में बिना टैरिफ या घटे हुए टैरिफ के साथ प्रवेश मिलेगा। इससे भारत की निर्यात क्षमता तेजी से बढ़ सकती है।
विशेष रूप से कपड़ा और चमड़ा जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्र हैं, जहाँ EU में टैरिफ अब शून्य के स्तर तक पहुंचेंगे – पहले यहां 12–26 % तक टैरिफ लगता था। इससे निर्यात प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी और रोजगार की संभावनाएँ बढ़ेंगी।
2. 💼 रोजगार सृजन और MSME को बढ़ावा
इस समझौते से छोटे और मध्यम व्यवसायों (MSMEs), जैसे खेल सामान, खिलौने और रसायन कंपनियों को यूरोपीय Union में बाजार खोलने का अवसर मिलेगा। यूरोपीय बाजार में प्रवेश से इन कंपनियों को नई मांग, उत्पादन क्षमता और रोजगार के अवसर मिलेंगे।
3. 📉 उपभोक्ता और उद्योग को सस्ते इनपुट
EU से मशीनरी, औजार, चिकित्सा उपकरण और उच्च-तकनीकी सामानों की आयात लागत घटेगी, जिससे उत्पादक कंपनियों के उत्पादन खर्च में कमी आएगी। इसे घरेलू उद्योग की **प्रतिस्पर्धात्मकता और “मेक इन इंडिया” पहल को बल मिलेगा।
4. 📊 सेवाओं में सहयोग और डेटा व्यापार
FTA केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं है — यह वित्तीय सेवाओं, डिजिटल व्यापार, व्यावसायिक सेवाओं और डेटा प्रवाह के लिए नियम-अनुकूल व्यापार को भी सम्मिलित करता है। इससे भारतीय आईटी और व्यावसायिक सेवा कंपनियों को EU में बेहतर अवसर मिलेंगे।
US टैरिफ vs India-EU FTA — क्या फर्क है?
पिछले कुछ वर्षों में, अमेरिका की टैरिफ नीतियाँ (जैसे 2025 में 50 % तक टैरिफ) ने भारतीय निर्यातकों को कठिनाई में डाल दिया था। खासकर कपड़ा और चमड़ा निर्यात में भारी गिरावट देखी गई थी।
भारत के कई निर्यातक अब EU FTA के जरिए अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम करते हुए अपने उत्पादों को यूरोप, UAE, जापान और अफ्रीका जैसे बाजारों में बढ़ा रहे हैं। EU में निर्यात बढ़ने का अनुमान हर साल 20–25 % तक है।
फिर भी, ध्यान देना जरूरी है कि EU FTA पूरी तरह से US टैरिफ को ऑफसेट नहीं करेगा, जैसा कि कुछ विश्लेषण बताते हैं। ट्रेड समझौता निर्यात के लिए अवसर तो खोलेगा, पर अमेरिकी बाजार के नुकसान को पूरी तरह से प्रभावित नहीं करेगा।
वैश्विक जीडीपी और रणनीतिक अर्थ
इस समझौते के कारण वैश्विक व्यापार ढांचे में स्थिरता और विविधता आएगी। भारत और EU का संयुक्त बाजार लगभग 2 बिलियन लोगों और विश्व GDP के 25 % को कवर करता है, जिससे दोनों पक्षों को वैश्विक आर्थिक संप्रेरणा में बड़ा रोल मिल रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता व्यापार विभाजन को कम करेगा और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति-श्रृंखला में भारत की भागीदारी को और मजबूत करेगा।
भारत की रक्षा और आर्थिक रणनीति पर प्रभाव
FTA केवल व्यापार तक सीमित नहीं; यह रणनीतिक साझेदारी और रक्षा-औद्योगिक सहयोग को भी प्रभावित करेगा। EU जैसे तकनीकी रूप से उन्नत बाजार से रक्षा उपकरण और तकनीकी निवेश की संभावनाएँ बढ़ेंगी, जिससे भारत एक उच्च-गुणवत्ता वाली रक्षा-उद्योगीकृत अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर होगा।
FTA की प्रगति और लागू होने की समय-सीमा
हालाँकि समझौते पर सहमति हो चुकी है, इसे प्रभावी होने के लिए EU सदन, यूरोपीय संसद और भारत के विधायी प्रक्रियाओं से मंज़ूरी लेनी होगी। अनुमान है कि यह FTA 2027 तक पूरी तरह लागू हो सकता है।
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