बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने 8 जनवरी 2026 से भारत में अपने वीज़ा सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, जिसमें मुख्य रूप से सामान्य वीज़ा सेवाओं (जैसे टूरिस्ट, पारिवारिक, और अन्य वीज़ा श्रेणियाँ) को रोका गया है, जबकि केवल कुछ विशिष्ट श्रेणियों — व्यापार और रोजगार वीज़ा — को जारी रखा जा रहा है। इस निर्णय को अब तक “सुरक्षा कारणों” से जोड़ा जा रहा है, लेकिन इसके राजनीतिक, कूटनीतिक और द्विपक्षीय प्रभाव पर काफी बहस शुरू हो चुकी है।
बांग्लादेश सरकार के विदेश मामलों के सलाहकार Md Touhid Hossain ने ढाका से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह निर्णय उन्होंने “सुरक्षा कारणों” के आधार पर लिया है और उन्होंने भारत में स्थित अपने तीन प्रमुख मिशनों को वीज़ा अनुभाग को अभी के लिए बंद रखने का निर्देश दिया है। इनमें शामिल हैं:
🔹 बांग्लादेश हाई कमिशन, नई दिल्ली
बांग्लादेश के डिप्टी हाई कमिशन, कोलकाता
🔹 बांग्लादेश सहायक हाई कमिशन, आगर्तला
हालाँकि बांग्लादेश के मुंबई और चेन्नई स्थित मिशनों में वीज़ा सेवाएं फिलहाल चालू हैं, लेकिन इन तीन प्रमुख केंद्रों पर सेवाओं का बंद होना भारत में यात्रा योजनाओं, विज़िटर्स और पारिवारिक यात्राओं पर सीधा असर डाल रहा है।
क्या वीज़ा सेवाएँ पूरी तरह बंद हैं?
वास्तव में, बांग्लादेश ने सभी वीज़ा सेवाएँ पूरी तरह से नहीं रोकी हैं।
- उन मिशनों में, जहाँ सेवाएँ निलंबित की गई हैं, केवल बिज़नेस और वर्क वीज़ा जारी किए जा रहे हैं, यानी व्यापार या इम्प्लॉयमेंट से जुड़ी वीज़ा एप्लीकेशंस पर अस्थिरता के बावजूद काम जारी है।
- अन्य वीज़ा जैसे टूरिस्ट वीज़ा, अध्ययन वीज़ा या पारिवारिक दौरे की वीज़ा पर फिलहाल रोक लगी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम दोनों देशों के बीच चल रहे कुछ कूटनीतिक तनाव का परिणाम हो सकता है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि निर्णय सिर्फ “सुरक्षा कारणों” से लिया गया है या इसके पीछे और भी राजनयिक मुद्दे शामिल हैं।
बीते कुछ समय से तनाव की पृष्ठभूमि

भारत-बांग्लादेश संबंध कई मोर्चों पर तनावग्रस्त रहे हैं। वर्ष 2025 के अंत में भी बांग्लादेश उच्चायुक्त को तलब करना और कुछ वीज़ा केंद्रों को बंद करना जैसे कदम सामने आए थे, जिनके कारण दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक विवाद बढ़ा था।
इन घटनाओं ने संकेत दिए कि सीमा सुरक्षा, प्रदर्शन, अवैध आव्रजन और दोनों देशों के पब्लिक पॉलिसी मुद्दों के कारण रिश्तों पर दबाव है। ऐसे में बांग्लादेश का यह नया निर्णय और भी संवेदनशील रूप लेता है।
बांग्लादेश का अमेरिकी वीज़ा “बॉन्ड” संबंधी अनुरोध
बांग्लादेश सरकार ने अकेले भारत के वीज़ा मामलों पर ही प्रतिक्रिया नहीं दी है, बल्कि उसने अमेरिका द्वारा लागू किए गए नए वीज़ा बॉन्ड नियम को भी हटाने का अनुरोध किया है।
अमेरिकी सरकार ने 21 जनवरी 2026 से B1/B2 (बिज़नेस/टूरिस्ट) वीज़ा के लिए एक आर्थिक “वीज़ा बॉन्ड” (visa bond) की आवश्यकता लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत आवेदक को $5,000 से $15,000 तक एक वित्तीय जमा (refundivable bond) देना होगा, जो वीज़ा नियमों का पालन करने के लिए एक गारंटी जैसा है।
बांग्लादेश ने इस बॉन्ड नियम को वापस लेने (reversal) का आग्रह किया है, यह कहते हुए कि इससे उनके नागरिकों पर असंगत आर्थिक बोझ पड़ेगा और यह नए रोजगार या व्यापारिक यात्राओं को प्रभावित कर सकता है।
भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर असर
विश्लेषकों का मानना है कि सेवाओं का निलंबन भारत-बांग्लादेश दोनों देशों के पारस्परिक संबंधों पर असर डाल सकता है क्योंकि:
🔹भारतीय पुरातत्व, शिक्षा, पर्यटन और पारिवारिक यात्राओं पर असर पड़ेगा।
इंडियन सिटीज़न को आवेदन प्रक्रिया में देरी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ेगा।
व्यापारिक यात्राओं पर फिलहाल राहत है, लेकिन यात्रा योजनाएँ प्रभावित हो सकती हैं।
सुरक्षा चिंताओं के नाम पर वीज़ा बंदी से रिश्तों पर राजनीतिक दबाव और जनता के बीच असंतोष भी बढ़ सकता है।
भारत और बांग्लादेश दोनों पड़ोसी देश हैं जिनके बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक रिश्ते रहे हैं। ऐसे में वज़ा सेवाओं पर यह निलंबन एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है, जिस पर आगे दोनों देशों की सरकारों के बीच बातचीत और समाधान की उम्मीद की जा रही है।
क्या अब भी भारत में वीज़ा सेवा पूरी तरह बंद है?
नया निर्णय अस्थायी माना जा रहा है, और बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि यह “तब तक” के लिए लिया गया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह सेवा कब पुनः सामान्य रूप से चालू होगी। यदि सुरक्षा स्थिति में सुधार होता है या राजनयिक बातचीत सकारात्मक रूप लेती है, तो सेवाओं को फिर से बहाल किया जा सकता है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच आगे बातचीत होने की उम्मीद है।
विश्लेषण: क्या इसका दीर्घकालिक प्रभाव होगा?
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के कदम ऐतिहासिक रूप से सीमा विवादों, सुरक्षा चिंताओं और आपसी कूटनीति के मुद्दों से जुड़े रहते हैं। यदि समाधान तालमेल से नहीं निकला, तो यह दोनों देशों के बीच पर्यटन, शिक्षा और पारिवारिक जुड़ाव पर लंबे समय तक प्रभाव डाल सकता है।
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