लखनऊ से आज 16 फरवरी 2026 को Uttar Pradesh Vidhan Sabha में बजट सत्र का मुख्य दिन रखा गया है, जहाँ वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य बजट प्रस्ताव पर बहस और चर्चा शुरू हो गई है। इस सत्र में सदन के सभी सदस्य बजट के प्रावधानों, विभागों के खर्च, योजनाओं और सार्वजनिक मांगों पर अपनी बात रख रहे हैं।
चर्चा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनहित में योजनाओं और विकास कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों, और साथ ही सरकार अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से सदन के सामने पेश करे। यह बहस लगभग 5 दिनों तक चलेगी और शुक्रवार को इसे अंतिम रूप दिया जाएगा, जब बजट को पारित कराने की प्रक्रिया पूरी होगी
बजट सत्र में मुख्य मुद्दे और सदन की हलचल
बजट पर प्रमुख बहसें
✔️ रोज़गार और बेरोजगारी का मुद्दा: सदन में बेरोज़गारी पर चर्चा हुई, जहाँ विपक्ष और सरकार के बीच बहस देखी गई। सरकार ने कहा कि उन्होंने अब तक 8.5 लाख सरकारी नौकरियां दी हैं और आगे भी प्रयास लगातार जारी रहेगा। विपक्ष ने कहा कि आंकड़ों के पीछे वास्तविक स्थिति अलग दिख रही है।
✔️ विश्वविद्यालय स्थापना का प्रस्ताव: उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस बार प्रस्तावित बजट में अधिक विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएंगे, जिससे हर जिले में उच्च शिक्षा का विस्तार होगा।
पानी, जलाशय और विभागीय कार्य: जलशक्ति मंत्री के अनुसार, सीतापुर में जलाशय का कार्य पूरा हो चुका है और मिशन के तहत कई कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है।
✔️ स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं पर चर्चा: स्वास्थ्य मंत्री ने सदन में कहा कि चित्रकूट में 200-बेड अस्पताल खुल चुका है और मेडिकल कॉलेज सहित अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी काम चल रहा है।
विपक्ष और सरकार के तर्क — हंगामे के साथ बहस – बजट
बजट सत्र में विपक्ष के नेता और सपा विधायकों ने सरकार को कई मुद्दों पर आड़े हाथों लिया। विपक्षी नेताओं ने सरकार को विविध विषयों पर जवाबदेह ठहराने की कोशिश की, जिसमें पानी की गुणवत्ता, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और अन्य सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े सवाल शामिल हैं।
सीएम Yogi Adityanath ने सदन में कहा कि पहले उत्तर प्रदेश को “अपराध और अराजकता का गढ़” कहा जाता था, लेकिन अब सरकार की नीतियों से स्थिति बेहतर हुई है। उन्होंने विपक्षी हंगामे की भी आलोचना की और बदलाव के अपने एजेंडे पर जोर दिया।
बजट सत्र में सदन के वातावरण में राजनीतिक विवाद और संवाद दोनों देखने को मिले — जहाँ सरकार अपने विकास एजेंडे को रेखांकित कर रही है, वहीं विपक्ष असंतोष और आलोचना के मुद्दों को उठाकर सरकार को घेरने का प्रयास कर रहा है।
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