दिल्ली NCR में 27 वर्षीय काजल चौधरी नामक महिला कमांडो की हत्या का मामला 2026 में देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। काजल दिल्ली पुलिस की Special Weapons and Tactics (SWAT) टीम में कमांडो के पद पर तैनात थीं और घटना के समय लगभग चार महीने गर्भवती थीं।
30 जनवरी 2026 तक मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं, जिनमें सबसे दर्दनाक है कि काजल के भाई निखिल ने फोन पर अंतिम बार अपनी बहन की चीखें सुनीं — जिस दौरान काजल पर उसके ही पति ने हमला किया था। यह घटना न केवल क्रूरता की चरम सीमा दिखाती है बल्कि घरेलू हिंसा और दहेज‑संबंधी उत्पीड़न की गंभीर समस्या पर भी सवाल उठाती है।
काजल की हत्या की कहानी का मुख्य ढाँचा
काजल चौधरी की शादी 23 नवंबर 2023 को हुई थी। विवाह प्रेम‑सम्मति से हुआ था, परंतु शादी के बाद ससुराल पक्ष की तरफ़ से दहेज की निरंतर मांगें जारी रहीं। काजल के भाई निखिल ने बताया कि शादी के समय उनके परिवार ने कैश, सोना‑चाँदी और बुलेट बाइक जैसी चीज़ें प्रधान किये थे, फिर भी उत्पीड़न रुका नहीं।
पीड़ित और उसके पति अंकुर चौधरी (जो कि रक्षा मंत्रालय में क्लर्क के पद पर पोस्टेड हैं) के बीच कई बार विवाद और झगड़े हुए। आरोप है कि ससुराल पक्ष ने न सिर्फ दहेज की मांगें बढ़ाईं, बल्कि भावनात्मक और शारीरिक स्तर पर दबाव डाला।
22 जनवरी की रात लगभग 10 बजे स्थिति अचानक बिगड़ गई। काजल ने अपने भाई को फोन किया और अपनी परेशानियाँ बताईं। लेकिन उसी समय पति अंकुर ने फोन छीन लिया और निखिल को फोन पर कहा:
“इसे रिकॉर्ड पर रख, यह पुलिस साक्ष्य में काम आएगा। मैं तेरी बहन को मार रहा हूं… पुलिस कुछ नहीं कर पायेगी।”
उसके बाद निखिल ने अपनी बहन की चीखें सुनीं, और तुरंत ही कॉल कट गया। लगभग पाँच मिनट के बाद अंकुर ने फिर से फोन किया और कहा:
“वो मर गई है, अस्पताल आ जाओ।”
हत्या का तरीका और अस्पताल में मौत
पुलिस और परिवार की मानें तो अंकुर ने काजल पर पहले दरवाज़े के फ्रेम पर सिर पटकने के बाद डम्बल से हमला किया, जिससे काजल को गंभीर चोटें आईं।
काजल को गंभीर हालत में मोहन गार्डन के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उसे फिर गाजियाबाद के एक निजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया। लगातार पांच दिनों की कठिन लड़ाई के बाद 27 जनवरी 2026 को उसकी मौत हो गई।
उसकी मौत ने मामले को केवल एक निजी त्रासदी से आगे बढ़ाकर सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया। एक प्रशिक्षित पुलिस अधिकारी तक को घरेलू हिंसा से नहीं बचाया जा सका, यह बात समाज में भारी चिंतन का कारण बनी है
परिवार का दर्द और घरेलू उत्पीड़न – काजल हत्याकांड
काजल के भाई निखिल ने बताया कि दहेज की मांगें सिर्फ शादी के समय नहीं रहीं; बल्कि लगातार उत्पीड़न, अपमान और तनाव उनके परिवार पर डाल दिया गया था।
काजल की माँ ने भी बयान दिया कि शादी के समय उन्होंने लगभग 20 लाख रुपये तक की लागत उठाई थी और कई चीज़ें दी थीं — लेकिन उत्पीड़न नहीं रुका। इस मामले ने दहेज जैसी सामाजिक बुराई पर फिर से गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
काजल और अंकुर की एक डेढ़ साल की संतान भी है, जो अब अपने दादा‑दादी के पास रह रही है। यह बात इस घटना की दर्दनाकता को और बढ़ाती है कि एक माँ को घरेलू हिंसा की वजह से अपना जीवन खोना पड़ा और उसका बच्चा अनाथ हो गया
पुलिस कार्रवाई और कानूनी पक्ष
हत्या के बाद, अंकुर चौधरी के खिलाफ मोहान गार्डन पुलिस स्टेशन में Murder की FIR दर्ज कर ली गई है। पहले उस पर Attempt to Murder दर्ज किया गया था, लेकिन काजल की मौत के बाद यह Murder में परिवर्तित कर दिया गया।
पुलिस ने बताया कि उनका प्राथमिक मामला घरेलू हिंसा, हत्या तथा दहेज‑संबंधित उत्पीड़न का है। मामले की फ़ोरेंसिक जांच जारी है और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
समाज और मीडिया में प्रतिक्रिया – काजल हत्याकांड
इस मामले ने मीडिया और सामाजिक मंचों पर जबरदस्त प्रतिक्रियाएँ पैदा की हैं। कई लोगों ने कहा है कि:
- घरेलू हिंसा कानून के बावजूद समाज में दहेज‑उत्पीड़न यथावत जारी है।
- एक महिला जो पुलिस में भी कमांडो है, उसके साथ घातक हिंसा होना चिंताजनक है और सुरक्षा ढांचे पर सवाल खड़ा करता है।
- परिवारों को सामाजिक दबाव और मानसिक उत्पीड़न से बचाने के लिए शिक्षा और जागरूकता की आवश्यकता है।
समाज में यह सवाल उठ रहा है कि कानून और जागरूकता के बावजूद क्यों दहेज‑आलोच्य स्थिति आज भी कई घरों में बनी रहती है।
यह भी पढ़ें – निज़ाम के गहनों की सुरक्षा: राज्यसभा संसद में संस्कृति मंत्री का बयान
