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Sat. Feb 21st, 2026

नई दिल्ली — ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा भारत के राजकीय दौरे पर हैं और आज उन्हें नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में जोरदार औपचारिक स्वागत प्राप्त हुआ। इस स्वागत समारोह में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे, जिन्होंने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया।

लूला दा सिल्वा 18 से 22 फरवरी 2026 तक दिल्ली में रहेंगे। उनका दौरा भारत-ब्राज़ील के बीच रिश्तों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का संकेत माना जा रहा है। इस दौरे को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग, व्यापार, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक मंच पर समन्वय को मजबूत करने के रूप में देखा जा रहा है।

1. राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत

आज सुबह देश की राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति लूला का स्वागत बेहद भव्य रहा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में ब्राजीली राष्ट्रपति का सम्मानपूर्वक स्वागत किया। स्वागत समारोह में दोनों देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के सदस्य भी शामिल रहे।

स्वागत समारोह के दौरान लूला ने भारत-ब्राज़ील के मजबूत सांस्कृतिक और राजनैतिक संबंधों पर जोर दिया और कहा कि दोनों देश वैश्विक दक्षिण के साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे। यह दौरा भारत और ब्राज़ील के बीच रणनीतिक ताने-बाने को और मज़बूत करेगा।

2. राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि – ब्राज़ील

राजधानी आगमन के बाद ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस भावपूर्ण अवसर पर उन्होंने गांधीजी के मूल्यों को याद किया और कहा कि अहिंसा तथा सत्य के सिद्धांत आज भी दुनिया के लिए मार्गदर्शक हैं। इस श्रद्धांजलि ने भारत-ब्राज़ील के बीच आत्मीयता और सांस्कृतिक सम्मान की भावना को दर्शाया।

3. हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी से द्विपक्षीय बैठक

स्वागत समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा के बीच हैदराबाद हाउस, नई दिल्ली में विस्तृत द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई। दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, रणनीतिक खनिज और तकनीकी सहयोग सहित कई अहम क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक का मुख्य लक्ष्य था भारत-ब्राज़ील के रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करना। विशेष रूप से दुर्लभ खनिज (rare earths), ग्रीन ऊर्जा, और आपूर्ति-शृंखला (supply chain) से जुड़े साझेदारी के प्रस्तावों पर बात हुई। इन संसाधनों का वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्व लगातार बढ़ रहा है, जो भारत और ब्राज़ील दोनों के लिए नई संभावनाएं खोल रहा है।

4. व्यापार और निवेश के लक्ष्य

दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। 2025 में भारत-ब्राज़ील के बीच व्यापार करीब 15.21 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसमें भारत का निर्यात लगभग 8.35 अरब और ब्राज़ील से आयात 6.85 अरब रहा है। इस वृद्धि में पिछले वर्षों की तुलना में 25 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

इसके अलावा ब्राज़ील की प्रमुख कंपनियाँ और 260 से अधिक व्यवसायी प्रतिनिधिमंडल के साथ यात्रा पर आए हैं, जो भारत में निवेश, तकनीकी साझेदारी और उत्पादन सुविधाओं का विस्तार चाहते हैं। ऐसे समझौते आर्थिक सहयोग को और समृद्ध करेंगे और दोनों देशों के व्यापारिक नेटवर्क को विस्तृत करेंगे।

5. व्यापार प्रोत्साहन और APEX कार्यालय – ब्राज़ील

राष्ट्रपति लूला ने दिल्ली में ब्राज़ील Trade and Investment Promotion Agency (APEX) का पहला कार्यालय भी उद्घाटित किया। यह लक्षित है कि ब्राज़ीलीय उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा मिले और विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सके। इस पहल से भारत-ब्राज़ील के बीच निवेश और व्यापार के अवसरों को व्यापक रूप से बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

6. राजनयिक एवं तकनीकी सहयोग

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ब्राज़ील के राष्ट्रपति से भेंट की और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी विस्तार पर चर्चा की। जयशंकर ने भरोसा जताया कि उनकी तथा पीएम मोदी की बैठकें भारत-ब्राज़ील संबंधों को नई गति देंगी।

लूला के दौरे की रणनीति में वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों पक्षों के विचार मिलते दिख रहे हैं, जैसे कि साझा सुरक्षा, व्यापार नीति, और विकासशील देशों की वैश्विक भूमिका। इससे संकेत मिलता है कि भारत-ब्राज़ील सहयोग सिर्फ द्विपक्षीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण रहा है।

7. वैश्विक मंच पर सहयोग की दिशा – ब्राज़ील

ब्राज़ील और भारत दोनों ही ग्लोबल साउथ के अग्रणी देशों के रूप में उभर रहे हैं। लूला ने कहा कि वे भारत के साथ मिलकर नई वैश्विक सहयोग प्रणालियाँ स्थापित करना चाहते हैं, जो विकसित देशों के प्रभाव से स्वतंत्र रणनीति पर आधारित हों। यह बयान वैश्विक राजनीति में भारत-ब्राज़ील के सहयोग की दिशा को स्पष्ट करता है।

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