अमेरिका और भारत के बीच व्यापार नीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसका असर दोनों देशों के व्यापारिक हितों पर पड़ेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने देश की वैश्विक टैरिफ (आयात शुल्क) नीति में हाल ही में बड़ा ऐलान किया है। 24 फरवरी, 2026 से लागू होने वाली नई पॉलिसी के तहत पारस्परिक (रेसिप्रोकल) टैरिफ को 15% पर सीमित करने का फैसला हुआ है, जिससे भारतीय निर्यातकों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
टैरिफ क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
टैरिफ वह कर है जो एक देश विदेश से आयात किए गए माल पर लगाता है। जब कोई भारतीय उत्पाद अमेरिका में जाता है तो अमेरिकी सरकार उस पर आयात शुल्क वसूलती है। इसी तरह भारत भी अमेरिका से आने वाले सामान पर शुल्क लागू करता है। अगर टैरिफ अधिक होगा तो विदेश में भारतीय माल महंगा हो जाता है, जिससे निर्यात कम हो सकता है। टैरिफ नीति का फर्क सीधे व्यापार संतुलन, प्रतिस्पर्धा और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
क्या बदला है अमेरिका की टैरिफ नीति?
पहले भारत से अमेरिका निर्यात किए जाने वाले सामान पर लगभग 25% अतिरिक्त रेसिप्रोकल टैरिफ लग रहा था। पर अब सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद और दोनों देशों की बातचीत के परिणामस्वरूप यह दर घटकर 15% तक आ गई है। यह दर 24 फरवरी 2026 से लागू होगी और 150 दिनों तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद क्या नीति लागू होगी, यह स्पष्ट नहीं है।
टैरिफ में यह कटौती एक तरह से भारत-अमेरिका व्यापार में संतुलन लाने की दिशा में लिया गया कदम माना जा रहा है। पहले जहां कुल शुल्क (MFN + रेसिप्रोकल) 30% तक पहुंच जाता था, अब कुल शुल्क लगभग 20% ही रहेगा। इससे भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता की स्थिति
भारत और अमेरिका अगले महीने एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इसके लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल 23 फरवरी से वाशिंगटन में बैठक कर रहा है, जहां दोनों देशों के बीच पहले चरण के समझौते का कानूनी मसौदा तैयार किया जाएगा। यह समझौता दोनों देशों के व्यापारिक हितों को आगे बढ़ाने का प्रयास होगा।
भारत को किस प्रकार लाभ हो सकता है?
- निर्यात में वृद्धि: 15% टैरिफ के लागू होने से भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में कुछ सस्ते दामों पर उपलब्ध होगा, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है।
- प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत: पहले जहां भारी शुल्क के कारण भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे साबित होते थे, अब शुल्क कम होने से भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा की स्थिति बेहतर हो जाएगी।
- श्रेणीगत लाभ: दवाइयां, जैविक उत्पाद, कीमती पत्थर, रेडीमेड कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामान और औद्योगिक वस्तुएँ जैसी श्रेणियों वाले उत्पादों को विशेष लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
किस सामान पर शुल्क नहीं लगेगा?
नई नीति में कुछ जरूरी वस्तुओं को 15% शुल्क से छूट दी गई है।
इनमें ऐसे उत्पाद शामिल हैं जो अमेरिकी घरेलू जरूरतों से जुड़े हैं जैसे कि:
- उर्वरक और प्राकृतिक संसाधन
- कुछ कृषि उत्पाद (जैसे टमाटर, संतरा)
- कुछ इलेक्ट्रॉनिक आइटम
- यात्रियों के वाहन तथा कुछ ऑटो पार्ट्स
- दवाएं और दवा संबंधी सामग्री
- कुछ एयरोस्पेस उत्पाद
इन छूटों का उद्देश्य अमेरिकी बाजार में घरेलू उद्योगों के लिए आवश्यक वस्तुओं को राहत देना भी बताया जा रहा है।
कुछ उद्योगों पर अभी भी उच्च शुल्क लागू हैं
कुछ सामानों पर टैरिफ अभी भी पहले की तरह उच्च श्रेणी में है:
- स्टील और अल्युमिनियम/तांबा पर 50% का सेक्टोरल टैरिफ लागू है।
- कुछ ऑटो कंपोनेंट्स पर 25% शुल्क जारी रहेगा।
इन क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों को अब भी सामना करना पड़ सकता है। इससे इन उद्योगों को नई पॉलिसी के बावजूद चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार आंकड़ा
हाल के आंकड़ों के अनुसार भारत से अमेरिका निर्यात किए जाने वाले प्रमुख सामानों में शामिल हैं:
- दवाइयाँ और जैविक सामग्री – $8.1 अरब
- टेलीकॉम उपकरण – $6.5 अरब
- कीमती पत्थर – $5.3 अरब
- पेट्रोलियम उत्पाद – $4.1 अरब
- वाहन और ऑटो पार्ट – $2.8 अरब
- आभूषण – $3.2 अरब
- रेडीमेड कपड़े – $2.8 अरब
- लोहा और इस्पात – $2.7 अरब
वहीं, अमेरिका से भारत को आयात में प्रमुख हैं कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, कोयला, इलेक्ट्रिक मशीनरी, विमान और सोना।
क्या यह स्थायी बदलाव है?
इस बदलाव को फिलहाल 150 दिनों के लिए लागू किया गया है। जुलाई 2026 के बाद अमेरिका क्या नई नीति लागू करेगा, यह स्पष्ट नहीं है। वैश्विक व्यापार जगत इस पर नजर रखे हुए है।
टैरिफ से व्यापक प्रभाव
टैरिफ में कटौती से भारतीय निर्यातकों को लाभ के अवसर मिल सकते हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने की संभावनाएँ उजागर होती हैं। यह कदम व्यापार में संतुलन लाने, प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और वैश्विक व्यापार संबंधों को पुनः सुदृढ़ करने की दिशा में लिया गया प्रतीत होता है।
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