ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने रूस के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास किया है और अमेरिका का एक विमानवाहक पोत मध्य-पूर्व के करीब पहुँच गया है। दोनों देशों ने संकेत दिए हैं कि अगर परमाणु वार्ता सफल नहीं होती है तो वे युद्ध की संभावना के लिए तैयार हैं।
बैकग्राउंड: तनाव ईरान में कैसे बढ़ा?
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पिछले कई महीनों से बढ़ रहा है। परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल विकास और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर दोनों देशों में गहरा मतभेद है। सामरिक बातचीत के कई दौर हुए, लेकिन महत्वपूर्ण समझौता नहीं हो सका है।
इस तनाव का ऐतिहासिक संदर्भ यह है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधों और अमेरिका-इजरायल की कड़ी नीतियों के कारण तेहरान ने अपना प्रोग्राम जारी रखा है।
ईरान -रूस संयुक्त सैन्य अभ्यास
ईरान ने गुरुवार को रूस के साथ वार्षिक सैन्य युद्ध अभ्यास किया — खास तौर पर हॉर्मुज की खाड़ी और ओमान सागर के पास। अध्ययन से पता चलता है कि इरानी क्रांतिकारी गार्ड कोर (IRGC) की नौसेना और रूसी नौसेना ने मिलकर अभ्यास का संचालन किया।
आतंकित अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर अभ्यास
ये अभ्यास एक रणनीतिक स्थान पर हुए — जहां दुनिया का लगभग 20% तेल विश्व व्यापार के लिए जाता है। इससे इस मार्ग की सुरक्षा और नियंत्रण को लेकर तनाव और बढ़ा है।
ईरान ने मिसाइल और नौसेना अभ्यास के दौरान इस बात का संकेत भी दिया कि वह किसी भी बाहरी सैन्य गतिविधि का मुकाबला करने की क्षमता रखता है।
अमेरिका का विमानवाहक समूह करीब पहुंचा
एक साथ दो विमानवाहक पोत की तैनाती को मध्य-पूर्व में सैन्य दबाव की सबसे बड़ी तैनाती कहा जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- USS Abraham Lincoln
- USS Gerald R. Ford
ये पोत भूमध्य सागर और हॉर्मुज क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं। अमेरिकी रक्षा सूत्रों के अनुसार, यह कदम “क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने” और “संभावित सैन्य ऑपरेशन के लिए तत्परता दिखाने” का संकेत है।
लड़ाकू विमानों का बड़ा जमावड़ा
अमेरिका ने मध्य-पूर्व में 50 से अधिक लड़ाकू विमान (F-35, F-22, F-16) और कई अन्य सहयोगी जहाज तैनात किए हैं। इसे 2003 के बाद का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा माना जा रहा है।
वार्ता और तनाव: कूटनीति का हाल
जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता का एक दौर हाल ही में हुआ, लेकिन वह बेनतीजा रहा। दोनों पक्ष एक व्यापक समझौते पर सहमत नहीं हो पाए हैं।
अमेरिका मांग कर रहा है कि ईरान:
- अपने मिसाइल कार्यक्रम को सीमित करे
- Hezbollah जैसे सशस्त्र समूहों से संबंध घटाए
- परमाणु प्रतिबंधों का पालन करे
ईरान ने उभरा जवाब यह है कि वह सिर्फ परमाणु मुद्दों पर ही वार्ता करेगा और अतिरिक्त मांगों को स्वीकार नहीं करेगा।📍 संकेत युद्ध-पक्ष की तैयारी के?
दोनों ही देश संकेत दे रहे हैं कि वार्ता विफल होने पर वे युद्ध के लिए तैयार हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी युद्ध से पूरे क्षेत्र में गंभीर संघर्ष होगा। अमेरिका ने भी युद्ध के लिए अपनी ताकत बढ़ा दी है, लेकिन अभी तक किसी ने अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
वैश्विक असर – ईरान
तेल की कीमतों में उछाल
ईरान और अमेरिका के बीच जंग की आशंका से कच्चा तेल की कीमतों में तेजी आई है। भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
शेयर बाजार पर दबाव
वैश्विक शेयर बाजारों में भी अस्थिरता देखी जा रही है क्योंकि निवेशक मध्य-पूर्व के तनाव को बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर जोखिम मान रहे हैं।
मध्य-पूर्व सहयोगियों की भूमिका – ईरान
इजरायल, सऊदी अरब, कतर और अन्य देशों ने सैन्य तैयारियाँ तेज कर दी हैं। कुछ देशों ने अपने नागरिकों को चेतावनी दी है कि वे वहां की यात्रा या निवास के बारे में सावधान रहें।
विश्लेषण: आगे क्या हो सकता है?
- युद्ध शुरू हो सकता है
- अगर वार्ता पूर्णत: विफल होती है और दोनों देश सैन्य कदम और तेज करते हैं।
- सरकारें कूटनीतिक विकल्प तलाश सकती हैं
- अगर वार्ता में अचानक प्रगति होती है तो स्थिति शांत हो सकती है।
- तेल और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित
- तेल की वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर असर रहेगा।
- क्षेत्रीय राजनीति में बदलाव
- अरब देशों और यूरोप-अमेरिका के बीच रणनीति बदल सकती है।
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