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Sat. Jan 10th, 2026

कर्नाटक सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा जारी Viksit Bharat-Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) यानी VB-G RAM G Act, 2025 को स्वीकार न करने का सख्त निर्णय लिया है और अब इस नए रोजगार कानून को सुप्रीम कोर्ट सहित उच्च न्यायालयों में चुनौती देने का ऐलान किया है। यह निर्णय राज्य कैबिनेट ने 8 जनवरी, गुरूवार को सर्वसम्मति से लिया।

यह उन बदलावों का विरोध है, जिनके तहत पुरानी और मशहूर ग्रामीण रोजगार योजना — महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को समाप्त कर दिया गया है और उसकी जगह यह नया VB-G RAM G अधिनियम लागू कर दिया गया है।

क्या है VB-G RAM G Act?

VB-G RAM G Act को केंद्र सरकार ने दिसंबर 2025 में पारित किया था। यह अधिनियम MGNREGA की जगह आया है, जिसे 2005 में लागू किया गया था और यह भारत की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के रूप में प्रसिद्ध थी। नए कानून में कई प्रावधान और बदलाव शामिल हैं, जिनके कारण राज्यों, खासकर कर्नाटक सरकार, ने विरोध जताया है। Amar

केंद्रीय सरकार का दावा है कि VB-G RAM G Act में मजदूरों को रोजगार पर एक सप्ताह के भीतर मजदूरी का भुगतान, और अगर भुगतान में देरी होती है तो मजदूरों को ब्याज का भुगतान भी देना होगा, जैसे कई नई सुविधाएँ हैं।

कर्नाटक कैबिनेट का फैसला: क्यों विरोध?

कर्नाटक सरकार का मानना है कि नए कानून के तहत MGNREGA को समाप्त कर देना गरीबों, मजदूरों और ग्रामीणों के हितों के खिलाफ है। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

1. संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन

कर्नाटक कैबिनेट ने कहा है कि VB-G RAM G Act भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत लोगों के काम करने और आजीविका के अधिकार का उल्लंघन करता है। इसका कहना है कि MGNREGA ने दशकों तक लोगों को रोजगार की गारंटी दी, लेकिन नए कानून में यह गारंटी कमजोर हो जाएगी।

2. पंचायती राज संस्थाओं का अधिकार प्रभावित

कैबिनेट प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि यह नया अधिनियम ग्राम पंचायतों को अपनी प्राथमिकताएं तय करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के कामों का चयन करने के अधिकार से वंचित कर देता है। इससे ग्राम स्वराज की भावना प्रभावित होती है।

3. संघ-राज्य सहयोग की अवहेलना

कर्नाटक सरकार का तर्क है कि यह कानून केंद्रीय ढांचे को कमजोर करता है, क्योंकि इसमें राज्यों को कोई उचित परामर्श प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया और 40% खर्च वहन करने की शर्त जुड़ी है, जो राज्यों पर भार डालेगी।

4. न्यूनतम मजदूरी और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप काम की कमी

नए अधिनियम में केंद्र बदले हुए मजदूरी दर तय करेगा, जिससे राज्यों द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी की सुरक्षा नहीं रहेगी। साथ ही स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार काम चुनने का अधिकार भी तय नहीं है।

कानूनी लड़ाई: अदालतों में चुनौतीVB-G RAM G

कर्नाटक की कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि वह VB-G RAM G Act को सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों में चुनौती देगी। इसके तहत:

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी
अधिनियम की संवैधानिक वैधता पर प्रश्न खड़ा किया जाएगा
लोक अदालत या ‘People’s Court’ के माध्यम से सामाजिक विरोध भी बढ़ाया जाएगा
राज्य भर में ग्राम सभाओं के जरिए जनता को जागरूक किया जाएगा

कर्नाटक सरकार ने यह भी कहा है कि वह जनता के बीच यह संदेश फैलाएगी कि यह अधिनियम ग्रामीण गरीबों के हितों के खिलाफ है और इससे उनके रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

मुख्य राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

इस मुद्दे पर राजनीतिक वातावरण भी गरमा गया है:

मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने पहले ही कहा था कि यह अधिनियम ग्रामीणों के जीवन को प्रभावित करेगा और Panchayat अधिकारों को कमजोर करेगा।

कांग्रेस और राज्य सरकार ने जोर देकर कहा है कि MGNREGA जैसे मजबूत रोजगार अधिकार को समाप्त करना गलत है और इसे बहाल किया जाना चाहिए।

वहीं, कर्नाटक BJP अध्यक्ष BY विजयेंद्र का कहना है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर जनता को गलत जानकारी दे रही है और केंद्र ने अधिनियम में सुधार के लिए यह कदम उठाया है।

यह स्थिति एक व्यापक राजनीतिक बहस का रूप ले चुकी है, जिसमें केंद्र-राज्य संबंध, रोजगार के मूल अधिकार और संविधान की संरचना जैसे महत्वपूर्ण सवाल शामिल हैं।

MGNREGA बनाम VB-G RAM G

विशेषताMGNREGA (पुराना)VB-G RAM G (नया)
रोजगार गारंटी100 दिन न्यून125 दिन घोषित
मजदूरी भुगतानदेरी पर ब्याजएक सप्ताह में भुगतान नियम
राज्यों की भूमिकाअधिक निर्णय-अधिकारकम निर्णय-अधिकार
वित्तीय भागीदारीउच्च संघीय योगदान60:40 केंद्र-राज्य लागत
पंचायतों का अधिकारमजबूतसीमित, केंद्र-नियंत्रित

(यह सार सारांश है और पूरी नीति का विवरण नहीं है।)

सरकार के अगले कदम

सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत याचिका दायर
राज्य सरकार द्वारा Gram Sabha और जन जागरूकता अभियान
केंद्र सरकार से पुनर्विचार की मांग
रोजगार योजनाओं के प्रभाव पर व्यापक अध्ययन

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