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ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले के राजकनिका थाना क्षेत्र में एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक घटना सामने आई है, जिसने देश भर में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षण संस्थानों की जवाबदेही को फिर से चर्चा में ला दिया है। एक निजी अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल में 13 वर्षीय छात्रा के साथ कथित तौर पर लंबे समय तक शारीरिक और यौन उत्पीड़न की घटना सामने आई है, जिसके आरोप में पांच स्कूल स्टाफ (शिक्षक और एक चपरासी) को गिरफ्तार किया गया है।

मामले का खुलासा कैसे हुआ? – ओडिशा

घटना तब प्रकाश में आई जब छात्रा ने अपने माता-पिता को बताया कि स्कूल के ही कुछ शिक्षकों और स्टाफ सदस्यों ने उसके साथ “अनुचित व्यवहार” और यौन उत्पीड़न किया है। ओडिशा इसके बाद उसके परिजन जिला बाल कल्याण समिति (CWC) के पास गए और समिति के सामने अपनी बेटी की पूरी कहानी बयान की। समिति ने मामला गंभीरता से लिया और 18 फरवरी को शिकायत दर्ज कराई। करीब 48 घंटे की प्रारंभिक जांच के बाद यह मामला पुलिस को सौंपा गया और पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी।

आरोपियों की गिरफ्तारी और पहचान

ओडिशा – राजकनिका पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि प्राथमिक जांच, मेडिकल परीक्षण और पीड़िता के बयान लेने के बाद पाँच लोगों के खिलाफ बीएनएस (Bharatiya Nyaya Sanhita) तथा POCSO Act (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) के तहत मामला दर्ज किया गया और सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार आरोपी इस प्रकार हैं:

  • चार शिक्षक (तीन पुरुष + एक महिला)
  • एक चपरासी (पियून)

पुलिस ने बताया कि आरोपी शिक्षक और स्टाफ सदस्यों ने दोषी व्यवहार को लंबे समय तक जारी रखा, कथित तौर पर स्कूल के भीतर कई मौकों पर छात्रा के साथ ओडिशा शारीरिक/यौन उत्पीड़न किया और उसे धमकाया ताकि वह किसी से इस बारे में बात न करे।

शिकायत से गिरफ्तारी तक का क्रम

पीड़िता के माता-पिता ने जब अपनी बेटी से बार-बार पूछा कि उसने अचानक स्कूल में जाना क्यों बंद कर दिया, तो उसने उन्हें अपने साथ हो रहे उत्पीड़न के बारे में बताया। इसके बाद पिता ने बाल कल्याण समिति में शिकायत दर्ज कराई। समिति के सदस्यों ने स्कूल का निरीक्षण किया और पुलिस को मामला सौंपा। इसके बाद पुलिस ने किशोरी का बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किया और आरोपी शिक्षकों तथा स्टाफ सदस्यों को गिरफ्तार किया। मेडिकल जाँच भी की गई है और सबूत संकलित किए जा रहे हैं।

विद्यालय प्रशासन का रुख

विद्यालय प्रशासन का बयान आया है कि ओडिशा में उन्हें इस गंभीर आरोप के बारे में तब पता चला जब परिवार ने शिकायत दर्ज कराई। वे इस मामले का सम्मानपूर्वक निपटारा चाहते हैं और जांच में सहयोग दे रहे हैं। हालांकि परिजन आरोप लगाते हैं कि पहले भी उन्होंने स्कूल प्रबंधन को छात्रों के साथ “अनुचित व्यवहार” की बात बताई थी, लेकिन किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं हुई। इस वजह से यह मामला अब शिक्षा संस्थानों और उनकी जवाबदेही पर एक बड़ा सवाल बन गया है।

कानूनी प्रक्रिया और पोक्सो एक्ट का प्रावधान

इस मामले में पुलिस ने POCSO Act के तहत मामला दर्ज किया है, जो बच्चों के खिलाफ किसी भी प्रकार के यौन अपराध को कड़ी सज़ा देने वाला कानून है। इसके अलावा Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की धाराओं के तहत भी आरोपियों के खिलाफ प्रावधान लागू किया गया है। पुलिस उच्च स्तर की संवेदनशीलता के साथ मामले की जांच कर रही है और इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि पीड़िता को न्याय और सुरक्षित वातावरण मिले।

सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

घटना के बाद स्थानीय राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है। बीजू जनता दल (BJD) के नेताओं ने पुलिस अधीक्षकों को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई और न्याय dilाने की मांग की गई है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार और शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि स्कूलों में निगरानी, शिकायत तंत्र और सुरक्षा प्रोटोकॉल को ज़ोरदार बनाया जाए ताकि इस तरह के अपराधों को पहले ही रोका जा सके।

स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता

ओडिशा – यह घटना यह स्पष्ट करती है कि स्कूल सिर्फ पढ़ाई का केंद्र नहीं हैं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और विकास का वातावरण भी होना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में सीसीटीवी कैमरा, सख़्त पृष्ठभूमि जांच (background check) और निगरानी गार्ड्स की ज़रूरत है। साथ ही छात्रों को “सुरक्षित स्पर्श” और “अनुचित स्पर्श” के बीच अंतर समझाने के लिए नियमित सेफ़्टी वर्कशॉप और जागरूकता कार्यक्रम भी लागू किए जाने चाहिए। ऐसे उपाय बच्चों को सुरक्षित रखने, मनोवैज्ञानिक रूप से समर्थ बनाने और शिक्षण संस्थानों में विश्वास कायम रखने में सहायक होंगे।

माता-पिता की चिंता और पीड़िता का भावनात्मक असर

ऐसे मामलों में सबसे बड़ा प्रभाव पीड़ित छात्रा और उसके परिवार पर पड़ता है। छात्रा का मनोबल टूट सकता है और उसका शैक्षणिक जीवन प्रभावित हो सकता है। माता-पिता को बच्चों की सुरक्षा के प्रति अधिक सचेत और स्कूल प्रशासन से संपर्क में रहने की ज़रूरत अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। अधिकारियों को बच्चों से संवाद स्थापित करने के तरीके अपनाने चाहिए जिससे वे किसी भी उत्पीड़न को जल्दी से जल्दी उजागर कर सकें।

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