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Tue. Jan 6th, 2026

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निवास को निशाना बनाए जाने की खबरों पर गहन चिंता व्यक्त की है। मोदी ने कहा है कि शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में हर कदम महत्वपूर्ण है और ऐसे किसी भी कार्य से बचे जाना चाहिए जो शांति वार्ता और भरोसे को कमजोर कर सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह बयान तब दिया जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया एवं रूस की तरफ से यह रिपोर्ट सामने आई कि यूक्रेन के हमलावरों द्वारा रूसी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास पर ड्रोन हमले का प्रयास किया गया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने दावा किया है कि नोवगोरोड क्षेत्र में पुतिन के निवास को करीब 91 ड्रोन UAVs (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) से निशाना बनाने की कोशिश की गई, हालांकि अधिकांश ड्रोन को मार गिराया गया।

मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से ही राजनयिक वार्ता और संवाद के माध्यम से विश्व शांति स्थापित करने के पक्ष में रहा है। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को ऐसे किसी भी कृत्य से बचना चाहिए जो संवाद प्रक्रिया को कमजोर करे या संघर्ष को बढ़ावा दे।

राष्ट्रपति पुतिन के आवास पर कथित ड्रोन हमले की रिपोर्ट: क्या कहा जा रहा है?

रूसी अधिकारियों के अनुसार, 29 दिसंबर की रात को नोवगोरोड क्षेत्र में पुतिन के आधिकारिक आवास के आसपास 90 से अधिक ड्रोन सक्रिय हुए। रूस का दावा है कि यूक्रेन के साथ जुड़े हमलावरों ने इस हमले का प्रयास किया था, लेकिन रूसी सुरक्षा बलों ने ड्रोन को रोक दिया। रूसी सरकार ने कहा कि यह हमला “आतंकवादी और उकसावे वाला प्रयास” था।

हालांकि इस दावे का यूक्रेन ने खंडन किया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने इसे “मनगढ़ंत आरोप” बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य शांति वार्ता को पटरी से उतारना और रूस को अंतरराष्ट्रीय समर्थन देना है। उनके अनुसार यह कथित “निवास पर हमला” एक गलत और भ्रामक कहानी है जो वास्तविकता पर आधारित नहीं है।

पीएम मोदी का रुख: शांतिपूर्ण समाधान की वकालत

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राजनयिक प्रयासों पर ही ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिससे संघर्ष को समाप्त किया जा सके और स्थायी शांति स्थापित की जा सके। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी तरह का हिंसात्मक कृत्य परिस्थितियों को और जटिल बना सकता है और इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

मोदी ने कहा कि यह समय विवादों और आक्रामकता को बढ़ाने का नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण समाधान खोजने का है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से सहानुभूति, संयम और बातचीत को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं: शांति व सुरक्षा पर बल

इस खबर पर विश्वभर से प्रतिक्रियाएं भी आई हैं, जिसमें कई देशों ने राष्ट्रपतिपुतिन के आवास पर कथित हमले की निंदा की है।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने कहा कि वह रूस के राष्ट्रपति, सरकार और जनता के साथ एकजुटता दर्शाता है और ऐसे किसी भी प्रयास की तीव्र निंदा करता है जो शांति और सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

इसी तरह, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भी इसे “भयावह कृत्य” बताया और कहा कि ऐसे किसी भी हमले से शांति एवं स्थिरता की दिशा में प्रयासों को नुकसान हो सकता है।

इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्धविराम और कूटनीति के माध्यम से समाधान पर जोर दे रहा है

पृष्ठभूमि: रूस‑यूक्रेन संघर्ष और भारत की नीति – राष्ट्रपति

भारत ने हमेशा से वैश्विक संघर्षों में तटस्थता और संवाद का रुख अपनाया है, विशेषकर रूस‑यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में भी प्रधानमंत्री मोदी ने बार‑बार कहा है कि भारत किसी दबाव में नहीं आता और शांति प्रक्रियाओं का समर्थन करता है।

इस साल दिसंबर की शुरुआत में मोदी और पुतिन के बीच भारत‑रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन भी आयोजित हुआ था, जिसमें दोनों नेताओं ने रणनीतिक सहयोग, आर्थिक साझेदारी, ऊर्जा और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बातचीत की थी।

क्या वास्तव में हमला हुआ या यह आरोपों का राजनीतिक स्थर पर खेल?

जैसा कि पहले बताया गया है, रूस ने ज़ोर देकर कहा कि यह हमला हुआ है, वहीं यूक्रेन ने इसे “प्रचारात्मक रणनीति” करार दिया है। इस बीच, कई विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी घटना का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा सकता है, खासकर जब शांति वार्ता जैसी संवेदनशील प्रक्रियाएं चल रही हों।

रूस‑यूक्रेन संघर्ष के अंतिम समाधान के लिए वार्ता और समझौते आवश्यक हैं। नरेंद्र मोदी का बयान इसी दिशा में है कि संवाद ही सबसे प्रभावी औज़ार है युद्ध को रोकने का

भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका: संतुलन और शांति

प्रधानमंत्री मोदी का यह रवैया इस बात को दोहराता है कि भारत किसी भी बड़ा शक्ति संघर्ष में सीधे हस्तक्षेप नहीं करता, बल्कि वैश्विक शांति, स्थापित नियम और प्रतिक्रिया को प्राथमिकता देता है।

भारत का यह रुख न केवल रूस‑यूक्रेन जैसे लंबे संघर्ष पर आधारित है, बल्कि व्यापक रूप से अंतरराष्ट्रीय विवादों को शांतिपूर्ण रूप से सुलझाने की नीति को दर्शाता है।

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