काठमांडो, 20 फ़रवरी 2026 – नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने देश के 76वें लोकतंत्र दिवस समारोह के दौरान एक गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर देश के युवाओं के असंतोष और उनकी उम्मीदों को समय पर नहीं समझा और हल नहीं किया गया, तो नेपाल में एक और बड़ा विद्रोह (revolt) उभर सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश राजनीतिक बदलाव, आम चुनाव और सामाजिक तनाव के बीच खड़ा है
लोकतंत्र दिवस पर दी चेतावनी – सुशीला
कार्की ने लोकतंत्र दिवस समारोह में कहा कि लोकतंत्र सिर्फ वोट देने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना, जवाबदेही सुनिश्चित करना और उन्हें न्याय दिलाना भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था तभी टिक सकती है जब उसका व्यवहार जनता के रोज़मर्रा के जीवन में सकारात्मक रूप से दिखाई दे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नेपाल ने 1951 की क्रांति के बाद लोकतंत्र को अपनाया, लेकिन आज भी यह समझना ज़रूरी है कि लोकतंत्र का अर्थ सिर्फ संविधान में लिखी हुई बातें नहीं है, बल्कि कार्यान्वयन और सामाजिक न्याय भी है। अगर लोकतांत्रिक संस्थाओं में जवाबदेही नहीं होगी तो लोग फिर सड़कों पर उतरेंगे
युवा असंतोष और पिछले विद्रोह का संदर्भ – सुशीला
कार्की ने खासतौर पर नेपाल की युवाओं और युवाओं के बीच बढ़ती नाराज़गी की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि युवा लोगों में न्याय, समता, बेहतर अवसर और भ्रष्टाचार-भ्रष्टाचार विरोधी माहौल की मांग मजबूत है, और इसे अनदेखा करना भारी परिणाम ला सकता है।
पिछले साल सितंबर 2025 में देश में बड़े पैमाने पर Gen Z-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों और विद्रोहों ने व्यापक राजनीतिक परिवर्तन लाया था। एक सोशल मीडिया प्रतिबंध और युवा बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर हुए इन प्रदर्शनों ने तत्कालीन सरकार को गिरा दिया था और राजनीति में उथल-पुथल बढ़ा दी थी।
कार्की ने भी अपने संबोधन में इन पहलुओं को याद करते हुए कहा कि जनता की नाराज़गी, खासकर युवाओं की आशाओं का टकराव, आज के लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौती है। अगर नीति-निर्माता और राजनीतिक नेतृत्व समय रहते जवाब नहीं देगा, तो इतिहास दोबारा कुछ बड़ी सामाजिक उथल-पुथल का साक्षी बन सकता है।
डेमोक्रेसी की “वास्तविक” परिभाषा
प्रधानमंत्री कार्की ने लोकतंत्र को केवल चुनाव और मतदान तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कहा:
- लोकतंत्र का अर्थ नागरिक अधिकारों की रक्षा करना है।
- सरकार को जनता के प्रति ज़िम्मेदार और जवाबदेह होना चाहिए।
- भ्रष्टाचार, भेदभाव, संसाधनों और सत्ता में गैप लोकतंत्र की नींव को कमजोर करने वाले हैं।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि लोकतंत्र वह तभी बन सकता है जब लोगों का विश्वास संस्थाओं में बना रहे। अगर सत्ता और संसाधनों का नियंत्रण कुछ समूहों तक सीमित रह जाता है, तो आम नागरिकों में हतोत्साह और अधीरता फैलती है, जो अंततः विद्रोह का रूप ले सकती है।
आगामी चुनावों की भूमिका – सुशीला
निर्वाचन को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष कराने का कार्यालय कार्की सरकार का प्रमुख लक्ष्य बताया गया है। उन्होंने कहा कि चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता की भागीदारी लोकतंत्र की मजबूती में मदद करेगी, लेकिन यह तभी संभव है जब मतदाता और युवा समुदाय उन मुद्दों का संतोषजनक समाधान देख पाएँ।
नेपाल में अगले संसद के चुनाव 5 मार्च 2026 को तय हैं, जो पिछले साल होने वाली अशांति के बाद होने वाले पहले आम चुनाव होंगे। इन चुनावों से देश की राजनीतिक दिशा और स्थिरता में महत्वपूर्ण बदलाव आने की उम्मीद है।
सेवा, जवाबदेही और सामाजिक न्याय की ज़रूरत
कार्की ने कहा कि राजनीति केवल सत्ता जीतने का खेल नहीं है, बल्कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों के प्रति समान अवसर और न्याय का भरोसा दिलाने का ज़रिया भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब देश को नेताओं से जवाबदेही, भ्रष्टाचार-रहित शासन और युवाओं की उम्मीदों को समझने वाली नीतियों की आवश्यकता है।
उनका मानना है कि अगर राजनीतिक नेतृत्व नैतिक जिम्मेदारी से काम करे और युवाओं की अपेक्षाओं को महत्व दे, तो नेपाल एक स्थिर और मज़बूत लोकतांत्रिक राष्ट्र बन सकता है।
पूर्व राजा की प्रतिक्रिया
नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह और अन्य राजशाही समर्थक समूहों ने चुनाव को स्थगित करने और वर्तमान राजनीतिक माहौल को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि असंतोष बढ़ा हुआ है और चुनाव की प्रक्रिया को रोकना आवश्यक हो सकता है, अन्यथा परिस्थिति और बिगड़ सकती है।
यह बयान दर्शाता है कि नेपाल की राजनीति में केवल सरकार ही नहीं, बल्कि राजशाही समर्थक विचारधाराएँ भी सक्रिय हैं, जो देश की सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं।
सारांश: क्या है खतरा?
पीछे के अनुभवों और वर्तमान चेतावनी के आधार पर इस प्रकार के मुख्य बिंदु सामने आते हैं:
- युवा असंतोष का बढ़ता प्रभाव: युवा वर्ग, विशेषकर Gen Z पीढ़ी, रोज़गार, सामाजिक न्याय और भ्रष्टाचार-रोधी नीतियों की मांग में सख्त है।
- लोकतंत्र का व्यवहारिक परीक्षण: लोकतंत्र केवल संवैधानिक शब्द नहीं, बल्कि जनता के जीवन में वास्तविक बदलाव भी होना चाहिए।
- चुनावी प्रक्रिया की चुनौती: 5 मार्च के चुनाव से पहले सामाजिक तनाव और असंतोष को शांत करना जरूरी है, ताकि प्रक्रिया सुचारू हो।
- राजनीतिक नेतृत्व की जवाबदेही: कार्की ने नेताओं से अनुरोध किया है कि वे जवाबदेही, समता और अच्छा शासन सुनिश्चित करें।
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