तेलुगु सिनेमा की बहुप्रतीक्षित पैन इंडिया फिल्म “द राजा साहब” आखिरकार दर्शकों के सामने आ चुकी है। निर्देशक मारुति द्वारा लिखित और निर्देशित यह फिल्म हॉरर, कॉमेडी, रोमांस और पारिवारिक भावनाओं का ऐसा अनोखा मिश्रण पेश करती है, जो इसे एक परफेक्ट फैमिली एंटरटेनर बनाता है। पीपल मीडिया फैक्ट्री के बैनर तले बनी यह फिल्म तेलुगु के साथ-साथ हिंदी सहित अन्य भाषाओं में भी रिलीज़ की गई है, जिससे इसका दायरा पूरे देश में फैल जाता है।
कहानी: रहस्य और रिश्तों की दिलचस्प यात्रा
“द राजा साहब” की कहानी एक ऐसे युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे उसकी दादी ने बेहद प्यार और संस्कारों के साथ पाला है। उसका बचपन भावनाओं, सुरक्षा और पारिवारिक मूल्यों में बीतता है। लेकिन कहानी तब दिलचस्प मोड़ लेती है, जब उसे यह पता चलता है कि उसके दादा, जिन्हें वह वर्षों से मृत मानता आया है, असल में ज़िंदा हैं। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद वह अपने दादा की तलाश में निकल पड़ता है।
यही तलाश उसे एक रहस्यमयी दुनिया में ले जाती है, जहाँ डर, भ्रम, हास्य और कई अनसुलझे सवाल उसका इंतज़ार कर रहे होते हैं। फिल्म की स्क्रिप्ट धीरे-धीरे परतें खोलती है और दर्शकों को अंत तक बाँधे रखती है। दादा को लेकर फैली अफवाहें, डरावने किस्से और अधूरी सच्चाइयाँ कहानी को और रोचक बना देती हैं।
प्रभास का नया अवतार – द राजा साहब
इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत है प्रभास का बिल्कुल नया अंदाज़। एक्शन और गंभीर भूमिकाओं के लिए पहचाने जाने वाले प्रभास पहली बार हॉरर-कॉमेडी जॉनर में नज़र आते हैं। वह अपने किरदार में सहज, मासूम और भावनात्मक दिखाई देते हैं। कॉमिक टाइमिंग हो या दादी के साथ भावुक दृश्य, प्रभास हर जगह संतुलन बनाए रखते हैं।
उनकी यह नई छवि न सिर्फ उनके फैंस को बल्कि फैमिली ऑडियंस को भी आकर्षित करती है। फिल्म में उनका किरदार ऐसा है, जिससे दर्शक आसानी से जुड़ पाते हैं।
संजय दत्त का प्रभावशाली किरदार
संजय दत्त फिल्म में दादा के किरदार में नजर आते हैं और अपने दमदार व्यक्तित्व से कहानी को गहराई देते हैं। उनका किरदार रहस्यमयी है, डर पैदा करता है और साथ ही भावनात्मक जुड़ाव भी बनाता है। उनकी संवाद अदायगी और स्क्रीन प्रेज़ेंस फिल्म को एक अलग स्तर पर ले जाती है।
जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, दादा से जुड़े राज़ खुलते जाते हैं और संजय दत्त का अभिनय इन दृश्यों को और प्रभावशाली बना देता है।
सहायक कलाकारों का योगदान – द राजा साहब
निधि अग्रवाल और मालविका मोहनन दोनों ही फिल्म में अहम भूमिकाओं में हैं। उनका किरदार सिर्फ ग्लैमर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कहानी को आगे बढ़ाने में भी योगदान देता है। दोनों अभिनेत्रियाँ अपने-अपने हिस्से में प्रभाव छोड़ती हैं।
बोमन ईरानी का रोल भले ही सीमित हो, लेकिन उनकी मौजूदगी हर सीन में असर छोड़ती है। उनका अनुभव और अभिनय फिल्म को मजबूती देता है।
हॉरर और कॉमेडी का संतुलन
“द राजा साहब” की सबसे बड़ी जीत यह है कि यह हॉरर और कॉमेडी के बीच एक संतुलन बनाए रखती है। डरावने दृश्य मौजूद हैं, लेकिन वे इतने ज़्यादा डरावने नहीं कि परिवार या बच्चों के लिए असहज हो जाएँ। वहीं कॉमेडी सीन फिल्म को हल्का-फुल्का बनाए रखते हैं।
डायरेक्टर मारुति ने यह सुनिश्चित किया है कि फिल्म डराने के साथ-साथ हँसाए भी, और यही वजह है कि यह फिल्म फैमिली ऑडियंस के लिए उपयुक्त बनती है।
VFX और तकनीकी पक्ष – द राजा साहब
फिल्म का VFX इसका एक बड़ा प्लस पॉइंट है। हॉरर से जुड़े कई दृश्य विज़ुअली प्रभावशाली हैं और खासतौर पर युवा दर्शकों को रोमांचित करते हैं। बैकग्राउंड स्कोर भी सस्पेंस और डर के माहौल को मजबूत करता है।
सिनेमैटोग्राफी फिल्म की रहस्यमयी दुनिया को अच्छे से पेश करती है और प्रोडक्शन वैल्यू इसे एक भव्य पैन इंडिया अनुभव देती है।
संगीत और भावनात्मक पहलू
फिल्म का संगीत कहानी के मूड के अनुसार चलता है। रोमांटिक और भावनात्मक सीन में गाने कहानी को आगे बढ़ाते हैं, जबकि हॉरर सीन में बैकग्राउंड म्यूज़िक डर का अहसास बढ़ाता है। दादी-पोते का रिश्ता और परिवार की भावना फिल्म का दिल है, जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ती है।
अंतिम निष्कर्ष
कुल मिलाकर “द राजा साहब” एक ऐसा सिनेमाई अनुभव है जिसमें हँसी, डर, रहस्य और भावनाएँ—सब कुछ मौजूद है। यह फिल्म उन दर्शकों के लिए खास है जो परिवार और बच्चों के साथ सिनेमाघर जाकर साफ-सुथरा, हल्का-फुल्का और मनोरंजक कंटेंट देखना चाहते हैं।
प्रभास का नया अवतार, संजय दत्त का प्रभावशाली अभिनय, संतुलित हॉरर-कॉमेडी और मजबूत पारिवारिक भावना इस फिल्म को एक बार ज़रूर देखने लायक बनाती है। अगर आप गंभीर हॉरर नहीं बल्कि एंटरटेनमेंट के साथ डर और हँसी का मज़ा लेना चाहते हैं, तो “द राजा साहब” आपके लिए सही चुनाव साबित हो सकती है।
रेटिंग: 3.5/5 ⭐⭐⭐☆
