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Tue. Jan 6th, 2026

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी फ़्लोरिडा स्थित निजी आवास मार‑ए‑लागो में इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में मध्य पूर्व के सबसे बड़े और जटिल संकटों—गाज़ा संघर्ष, वेस्ट बैंक विवाद, हमास का निरस्त्रीकरण और ईरान के परमाणु कार्यक्रम—पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में दोनों नेताओं ने कई अहम बिंदुओं पर अपने दृष्टिकोण साझा किए और आने वाले दिनों के लिए रणनीति तय करने की कोशिश की।

बैठक का मकसद और पृष्ठभूमि

दक्षिणी फ़्लोरिडा में ट्रंप‑नेतन्याहू की यह मुलाक़ात गाज़ा संघर्ष के बाद उभर रहे शांति प्रयासों और मध्य पूर्व में सुरक्षा बहाली के लिए रणनीति बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। अरब‑इज़राइली संघर्ष, हामास और फ़लस्तीनी मुद्दों में पिछले सालों में कई मोड़ आए हैं, जिसमें अक्टूबर 2023 से लेकर अब तक हज़ारों लोगों की मौतें और व्यापक तबाही देखी गई है। ऐसे में इस बैठक को क्षेत्र में स्थिरता लाने का एक अहम कदम माना जा रहा है।

मुख्य चर्चा का केंद्र: गाज़ा शांति योजना का अगला चरण

बैठक की सबसे बड़ी चर्चा का विषय गाज़ा शांति योजना का दूसरा चरण रहा। ट्रंप और नेतन्याहू ने मिलकर इस शांति योजना को आगे बढ़ाने और उसे लागू करने के तरीकों पर विचार किया। बताया गया है कि शांति योजना के तहत गाज़ा में स्थायी विराम, नागरिक सुरक्षा, पुनर्निर्माण और प्रशासनिक ढांचे की रूपरेखा तैयार करने पर ज़ोर दिया गया है।

ट्रंप ने बैठक के बाद मीडिया से कहा कि गाज़ा में शांति लाने की प्रक्रिया तभी आगे बढ़ेगी जब हमास का निरस्त्रीकरण सुनिश्चित हो और वह हथियारों को डालने के लिए तैयार हो। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि हमास हथियार नहीं छोड़ेगा, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

इसके अलावा, बैठकों में यह भी चर्चा हुई कि गाज़ा को भविष्य में कैसे पुनर्निर्मित किया जाए और वहाँ स्थायी शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका क्या होगी।

वेस्ट बैंक: सहमति नहीं, लेकिन बातचीत जारी

बैठक के दौरान दूसरा बड़ा मुद्दा वेस्ट बैंक रहा—जो लंबे समय से फ़लस्तीनी और इज़राइली हितों के बीच विवाद का केंद्र रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वेस्ट बैंक के मुद्दे पर वह और नेतन्याहू पूरी तरह सहमत नहीं हैं, लेकिन दोनों इस पर बातचीत जारी रखेंगे और समाधान निकालने की कोशिश करेंगे। Amar Ujala

वेस्ट बैंक में इज़राइल की बस्तियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा हुआ है, क्योंकि फ़लस्तीनियों का मानना है कि ये बस्तियाँ उनके भविष्य के राष्ट्रीय क्षेत्र को प्रभावित करती हैं। ट्रंप ने कहा कि इस संदर्भ में उन्होंने नेतन्याहू के साथ लंबे समय तक चर्चा की, और दोनों पक्ष शांति तथा सुरक्षा के संतुलन की ओर काम करेंगे।

नेतन्याहू ने बैठक को सकारात्मक बताया और कहा कि ट्रंप के साथ संवाद में “अच्छी प्रगति” हुई है।

ईरान को लेकर कड़ी चेतावनी

बैठक का एक अन्य महत्वपूर्ण आयाम ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को फिर से शुरू करता है, तो अमेरिका और उसके सहयोगी “उसे गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार देखेंगे।”

ट्रंप ने मीडिया से कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि ईरान अब से अपने हथियार कार्यक्रम को पुनः सशक्त करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस परिस्थिति में अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय कड़े कदम उठा सकते हैं, अगर ईरान अपने विस्तारवादी प्रयासों को जारी रखता है।

ईरान की ओर से भी प्रतिक्रिया आई, जिसमें कहा गया कि किसी भी हमले का जवाब “कड़ा और अप्रत्याशित” होगा, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।

हमास को दी गई चेतावनी

हमास का निरस्त्रीकरण बैठक का एक केंद्रीय बिंदु था। ट्रंप ने दोहराया कि अगर हमास हथियार नहीं रखता और शांति प्रक्रिया में बाधा डालता है, तो उसके लिए “बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।” ABC

उधर हमास की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पूर्व की स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि संगठन का रवैया शांति प्रयासों में सहयोग पर निर्भर करेगा। यदि हमास सचमुच अपने हथियारों का त्याग करता है, तो यह शांति परियोजना को आगे बढ़ाने का एक बड़ा संकेत माना जाएगा।

एक अंतरराष्ट्रीय संकेत: शांतिपूर्ण मध्य पूर्व की ओर

ट्रंप और नेतन्याहू की यह बैठक केवल द्विपक्षीय समझौता नहीं थी, बल्कि मध्य पूर्व में स्थिरता और शांति का एक महत्वपूर्ण संकेत भी माना जा रहा है। दोनों नेताओं ने यह स्पष्ट किया कि क्षेत्र में हिंसा और संघर्ष से किसी को भी लाभ नहीं होगा, और सभी पक्षों को शांति तथा सुरक्षा की दिशा में काम करना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक से दो मुख्य संदेश मिलते हैं:

  1. अमेरिका और इज़राइल मध्य पूर्व शांति योजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और
  2. क्षेत्रीय समस्याओं जैसे वेस्ट बैंक विवाद, हमास का निरस्त्रीकरण, और ईरान की गतिविधियों पर सामूहिक प्रतिक्रिया देनी आवश्यक है।

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