भारत में UPI से पेमेंट करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। अब छोटी दुकानों से लेकर बड़े शोरूम तक लोग डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं। दुकानदारों को पेमेंट मिलने की जानकारी देने वाले साउंडबॉक्स भी काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। लेकिन अब इन साउंडबॉक्स को लेकर एक बड़ा बदलाव हो सकता है। दिवाली के बाद कुछ चुनिंदा UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट फीस यानी MDR लागू करने की तैयारी है। इसके बाद पेमेंट कंपनियां दुकानदारों से साउंडबॉक्स का हर महीने किराया लेने के बजाय हर ट्रांजैक्शन पर फीस वसूल सकती हैं।
अभी कितना देना पड़ता है साउंडबॉक्स का किराया?
साउंडबॉक्स एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होता है। जब कोई ग्राहक UPI से पेमेंट करता है, तो यह डिवाइस आवाज के जरिए दुकानदार को बताता है कि उसके खाते में पैसे आ गए हैं।
फिलहाल कई पेमेंट कंपनियां दुकानदारों से साउंडबॉक्स के लिए हर महीने करीब 125 से 130 रुपये किराया लेती हैं। लेकिन UPI पर MDR शुल्क लागू होने के बाद यह व्यवस्था बदल सकती है। कंपनियां मासिक किराये की जगह ट्रांजैक्शन के हिसाब से पैसे ले सकती हैं।
पेमेंट कंपनियों के सामने क्या है परेशानी?
भारतपे, Google Pay, MobiKwik, Paytm, PhonePe और Pine Labs जैसी कंपनियां दुकानदारों को साउंडबॉक्स की सुविधा देती हैं।
इन कंपनियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुकानदारों से पैसे किस तरीके से लिए जाएं। इसके लिए दो विकल्प हो सकते हैं।
- मासिक किराया: दुकानदार साउंडबॉक्स इस्तेमाल करने के लिए हर महीने एक तय रकम देता है।
- ट्रांजैक्शन फीस: दुकानदार को मिलने वाले UPI पेमेंट पर एक तय दर से शुल्क लिया जाता है।
हालांकि, कंपनियों के लिए चुनौती यह है कि ज्यादातर दुकानदार एक साथ मासिक किराया और ट्रांजैक्शन फीस देना पसंद नहीं करेंगे।
पेमेंट कंपनियों के अधिकारियों ने क्या कहा?
Pine Labs के CEO अमरीश राऊ के मुताबिक, कंपनी साउंडबॉक्स के 125 से 130 रुपये मासिक किराये के बजाय ट्रांजैक्शन आधारित शुल्क लेने के विकल्प पर काम कर सकती है।
वहीं, MobiKwik के बिपिन प्रीत सिंह ने बताया कि बड़े दुकानदारों से आमतौर पर साउंडबॉक्स का किराया नहीं लिया जाता, क्योंकि उनके यहां ज्यादा ट्रांजैक्शन होते हैं। छोटे दुकानदारों से किराया लिया जाता है, खासकर उन दुकानदारों से जिनका पेमेंट वॉल्यूम 2,000 रुपये से कम है या जो लोन नहीं लेते।
दुकानदारों की जेब पर क्या पड़ेगा असर?
अगर UPI पेमेंट पर मर्चेंट फीस लागू होती है, तो दुकानदारों को अपने खर्च का नया हिसाब लगाना पड़ सकता है। संभव है कि साउंडबॉक्स का मासिक किराया खत्म हो जाए या कम कर दिया जाए।
हालांकि, दुकानदारों को इससे फायदा होगा या नुकसान, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ट्रांजैक्शन पर कितना शुल्क लगाया जाता है और उनकी दुकान पर रोजाना कितने UPI पेमेंट होते हैं।
इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर छोटे दुकानदारों पर पड़ सकता है, क्योंकि उनके लिए हर महीने का खर्च और हर ट्रांजैक्शन पर लगने वाला शुल्क दोनों ही मायने रखते हैं।



