नई दिल्ली। दुनिया के राजनीतिक परिदृश्यों में 3 जनवरी 2026 का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब अमेरिका ने वेनेज़ुएला पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की, और इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया। ट्रंप ने न सिर्फ इस कार्रवाई की पुष्टि की, बल्कि कहा कि उन्होंने इसे “रियल-टाइम” यानी वास्तविक समय में देखा और मॉनिटर किया, और दावा किया कि वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी को एक अमेरिकी युद्धपोत (US Warship) में कैद कर लिया गया है।
यह घटना अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई उभरी हुई “क्राइसिस” के रूप में देखी जा रही है। इसके व्यापक प्रभाव, विवाद, वैश्विक प्रतिक्रियाएँ और भविष्य के संभावित परिणाम अब पूरी दुनिया की निगाहों का केंद्र बन चुके हैं।
क्या हुआ — सैन्य कार्रवाई का पूरा घटनाक्रम
3 जनवरी की रात स्थानीय समयानुसार अमेरिका ने वेनेज़ुएला के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई और सैन्य हमले किए। अमेरिका के लड़ाकू विमानों और विशेष बलों ने वेनेज़ुएला की राजधानी काराकास सहित कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे शहर में बड़े धमाके और तबाही देखने को मिली।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने यह ऑपरेशन मार-ए-लागो (फ्लोरिडा) से वास्तविक समय में देखा। उन्होंने FOX न्यूज़ को बताया कि ऑपरेशन में अमेरिका की सेना ने बेहतरीन प्रोफेशनल कौशल और उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया। ट्रंप ने कहा,
“मैंने इसे रियल-टाइम में देखा, हर पहलू को सुना और यह सब शानदार ढंग से काम करता दिखा।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि ऑपरेशन के दौरान अमेरिका के सैनिकों को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, केवल कुछ मामूली चोटें ही हुईं।
मादुरो और उनकी पत्नी को कैद करने का दावा
ट्रंप ने घोषणा की कि वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया एडेला फ्लोरेस को अमेरिका ने सफलतापूर्वक पकड़ लिया है और अब वे एक अमेरिकी युद्धपोत (US warship) पर हैं।
उनके अनुसार दोनों को न्यूयॉर्क (अमेरिका) भेजा जाएगा, जहाँ उन पर नशीले पदार्थों के तस्करी, आतंकवाद और अन्य गंभीर अपराधों के आरोप के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।
यह कदम 2020 में अमेरिका द्वारा मादुरो पर लगाए गए ड्रग-ट्रैफिकिंग और नार्को-टेररिज़्म के आरोपों के बाद आया है, जिनके लिए अमेरिकी न्याय विभाग पहले ही अभियोग लगा चुका है।
वैश्विक प्रतिक्रिया और विवाद – सैन्य
इस सैन्य कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी हलचल मचा दी है:
- वेनेज़ुएला की सरकार ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने और संप्रभुता का हनन करने का आरोप लगाया है।
- कुछ देश अमेरिका के इस कदम की आलोचना कर रहे हैं कि यह आक्रामक और एकतरफा सैन्य कार्रवाई है, जबकि अन्य ने अमेरिका की नारको-टेररिज़्म से लड़ने की नीति का समर्थन किया है।
- संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने स्थिति पर गहरा औऱ संतुलित निरीक्षण रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
वेनेज़ुएला में स्थिति का हाल
काराकास सहित वेनेज़ुएला के कई हिस्सों में हवाई हमले के बाद घबराहट और तनाव का माहौल व्याप्त है। विस्फोटों, हंगामों और सैन्य आवाज़ों से नागरिकों में दहशत फैल गई है। वेनेज़ुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा कि मादुरो और उनकी पत्नी लापता हैं और उन्होंने “प्रमाण माँगने” की बात कही है।
ट्रंप का संदेश और उद्देश्य
डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई को शांतिदूत कार्रवाई बताया और कहा कि इस कदम का लक्ष्य नशीले पदार्थों की तस्करी, भ्रष्टाचार और आपराधिक नेटवर्क को समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब “हंसी का पात्र नहीं रहा” और वे अपने सैनिकों की क्षमता तथा तकनीकी श्रेष्ठता का उदाहरण पेश करना चाहते हैं।
ट्रंप ने इस ऑपरेशन की तुलना पिछले अमेरिकी प्रशासन के दौरान अफ़ग़ानिस्तान में सेना की वापसी के तरीके से की, और जोर देकर कहा कि अब अमेरिका “अधिक शक्तिशाली और निर्णायक” कार्रवाई कर सकता है।
भविष्य की संभावनाएँ – सैन्य
यह सैन्य कदम दुनिया के कई देशों के लिए चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का कहना है कि:
- वेनेज़ुएला की राजनीतिक भविष्य विध्वंस-ग्रस्त हो सकती है।
- अमेरिका-लैटिन अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ सकता है।
- तेल और ऊर्जा बाजारों पर भी असर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने भी कहा है कि देश की संप्रभुता का उल्लंघन होने के कारण इसके व्यापक असर पड़ सकते हैं, और सम्भव है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में इस पर चर्चा हो।
