दिल्ली के फर्श बाजार इलाके में हुई दिनदहाड़े लूट की वारदात ने पुलिस और आम जनता को चौंका दिया है। इस हाई-प्रोफाइल केस का जब पर्दाफाश हुआ, तो सामने आई एक ऐसी सच्चाई जिसने सभी को हैरत में डाल दिया। जिस वारदात को अंजाम देने के पीछे किसी गैंग या प्रोफेशनल अपराधी की उम्मीद की जा रही थी, उसका मास्टरमाइंड निकला सीमा सुरक्षा बल (BSF) में तैनात एक जवान। और यह जवान कोई आम अपराधी नहीं था, बल्कि उसने अपराध की स्क्रिप्ट एक क्राइम शो से सीखी थी।
क्या है क्राइम का पूरा मामला?
दिल्ली के फर्श बाजार क्षेत्र की एक ज्वेलरी शॉप में दिन के उजाले में लूट की घटना हुई। दुकान में घुसकर हथियार की धमकी देकर लाखों की ज्वेलरी और नकदी लूट ली गई। वारदात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ-साथ चश्मदीदों से पूछताछ की।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस के सामने जो नाम आया वह चौंकाने वाला था – एक बीएसएफ जवान, जो देश की सीमाओं की सुरक्षा करने वाला जिम्मेदार व्यक्ति है, वही इस लूट का मुख्य साजिशकर्ता निकला।
क्राइम शो से मिली प्रेरणा
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी जवान लंबे समय से अपराध आधारित क्राइम शो देखा करता था। उसे इन शोज़ से चोरी और लूट की बारीकियों की जानकारी मिली। उसने देखा कि कैसे अपराधी अपने पहचान छुपाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं और साक्ष्य मिटा देते हैं।
इससे प्रेरित होकर उसने एक योजना बनाई जिसमें खिलौनों और अन्य सामान्य चीजों के ज़रिए शक से बचते हुए लूट को अंजाम दिया जा सके। उसने यह भी सोचा कि एक जवान होने के नाते उस पर कोई शक नहीं करेगा, जो उसकी सबसे बड़ी सुरक्षा बन सकती है।
लूट की योजना
आरोपी जवान ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम देने की तैयारी की। उसने एक-दो साथियों को शामिल किया और दुकान की रेकी कई दिन तक की। खिलौनों की दुकान के बहाने आसपास की दुकानों में घूमता रहा ताकि किसी को शक न हो।
वारदात वाले दिन उसने नकाब पहनकर दुकान में प्रवेश किया, हथियार से धमका कर लूट की, और कुछ ही मिनटों में फरार हो गया। इस पूरे ऑपरेशन को इतनी सफाई से अंजाम दिया गया कि शुरुआती तौर पर पुलिस के पास कोई सुराग नहीं था।
पुलिस की जांच और गिरफ्तारी
पुलिस ने जब घटनास्थल के आसपास की CCTV फुटेज खंगाली, तो एक संदिग्ध की गतिविधि पर ध्यान गया। उस व्यक्ति की शारीरिक बनावट और चलने के तरीके से शक की सुई बीएसएफ जवान की तरफ गई।
फोन लोकेशन और बैंक लेन-देन की जांच के बाद जब पुलिस ने जवान से पूछताछ की, तो उसने पूरी साजिश कबूल कर ली। उसने बताया कि वह आर्थिक तंगी से गुजर रहा था और उसे लगा कि एक बार लूट कर वह अपनी समस्याओं से निजात पा सकता है।
सवाल खड़े करती घटना
इस घटना ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे पहला सवाल है कि एक प्रशिक्षित जवान, जो देश की सुरक्षा के लिए नियुक्त होता है, वह कैसे अपराध की तरफ मुड़ सकता है? क्या हमारी सैन्य या अर्धसैन्य बलों में मानसिक तनाव, आर्थिक दबाव और व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा?
दूसरा गंभीर पहलू यह भी है कि सोशल मीडिया और टेलीविजन पर दिखाए जा रहे क्राइम शोज़ किस हद तक आम लोगों को प्रभावित कर रहे हैं। मनोरंजन के नाम पर अपराध को ग्लोरिफाई करने वाले शोज़ कई बार युवा या मानसिक रूप से अस्थिर लोगों को गलत दिशा में ले जा सकते हैं।
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