गुजरात के नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा थाने में एक अहम प्राथमिकी दर्ज की गई है, जो राज्य की राजनीति और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर चर्चाओं में आ गई है। यह मामला डेडियापाड़ा क्षेत्र के विधायक चैतर वसावा से जुड़ा है, जो भारतीय आदिवासी पार्टी (BTP) के एक प्रमुख नेता हैं।
मामला ‘आपणो तालुको वाइब्रेंट तालुको’ (एटीवीटी) समिति की एक औपचारिक बैठक के दौरान सामने आया, जिसमें कई पंचायत प्रतिनिधि और अधिकारी शामिल थे। प्राथमिकी के अनुसार, विधायक वसावा ने इस बैठक में उस वक्त आपत्ति जताई जब समिति में उनके नामित व्यक्ति को शामिल नहीं किया गया। इसी बात को लेकर वे नाराज़ हो गए और मीटिंग के माहौल में अचानक तनाव आ गया।
गुजरात क्या है एटीवीटी समिति?
‘आपणो तालुको वाइब्रेंट तालुको’ (ATVT) सरकार द्वारा गठित एक ऐसी समिति है जो स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक विकास और पंचायत प्रतिनिधियों की सहभागिता को सुनिश्चित करती है। इस समिति में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी का विशेष महत्व होता है।
विधायक वसावा की आपत्ति
चैतर वसावा ने समिति के सदस्यों की सूची में उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि के न होने पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने इसे न केवल प्रशासनिक चूक बताया बल्कि इसे उनके जनप्रतिनिधित्व की उपेक्षा भी करार दिया। इसी दौरान मीटिंग का माहौल गर्म हो गया और तनातनी बढ़ने लगी।
महिला पंचायत अध्यक्ष को लेकर विवादित टिप्पणी
प्राथमिकी में उल्लेख किया गया है कि बहस के दौरान विधायक वसावा ने सागबारा तालुका पंचायत की अध्यक्ष को लेकर कथित रूप से अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। यह टिप्पणी महिला अध्यक्ष के सम्मान और गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली बताई जा रही है।
घटना के तुरंत बाद बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों और अधिकारियों में असंतोष फैल गया। महिला प्रतिनिधियों ने विधायक की टिप्पणी को अस्वीकार्य और निंदनीय बताते हुए इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
कानूनी कार्रवाई शुरू
डेडियापाड़ा पुलिस थाने में इस घटना को लेकर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह प्राथमिकी एक महिला जनप्रतिनिधि की शिकायत के आधार पर की गई है और इसमें विधायक पर शिष्टाचारहीन व्यवहार, सार्वजनिक रूप से अपमान, और महिला गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसे आरोप दर्ज किए गए हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
गुजरात घटना के बाद राज्य की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस मामले को महिला सम्मान और राजनीतिक आचरण से जोड़ते हुए विधायक की आलोचना की है। वहीं, विधायक वसावा के समर्थकों का कहना है कि यह विवाद जानबूझकर खड़ा किया गया है और विधायक की भावनाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।
विधायक वसावा ने मीडिया से बातचीत में कहा,
“मैंने किसी का अपमान नहीं किया। अगर मेरी बातों से किसी को ठेस पहुंची है तो मैं खेद प्रकट करता हूं, लेकिन समिति में मेरे नामित सदस्य को शामिल न करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी है।”
महिला प्रतिनिधियों की मांग
महिला पंचायत सदस्यों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि यदि विधायक दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि सार्वजनिक मंचों पर महिलाओं के प्रति सम्मान बना रहे।गुजरात
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