Tue. Jul 16th, 2024

सार

देश भर में 22 जनवरी को लेकर हरसो उलास का माहौल देखने को मिल रहा सभी राममंदिर में हो रहे प्राण प्रतिष्ठा को लेकर का खुश दिखाई दे रहे. लोगों का लम्बे समय का इंतजार अब खत्म होने वाला है। राम मंदिर में लम्बे समय के बाद रामलला विराजने जा रहे

पूर्व में अयोध्या, भारतीय सभ्यता का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, और इस नगर का रूप-रंग विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक घटकों से है। अयोध्या का सम्बंध राम मंदिर से है, जो भारतीय इतिहास में एक अहम स्थान रखता है। इस लेख में, हम राम मंदिर के ऐतिहासिक तथ्यों को जानेंगे।

राम मंदिर का निर्माण:

राम मंदिर, जिसे ‘राम जन्मभूमि’ भी कहा जाता है, अयोध्या में स्थित है। इस स्थान पर रामचंद्र जी का जन्म हुआ था, जो ‘रामायण’ के मुख्य पात्र थे। मान्यता है कि राम मंदिर का निर्माण भगवान राम के भक्त राजा विक्रमादित्य ने कराया था।

बाबर की सुलतानत और राम मंदिर:

बाबर, मुघल सम्राट, ने 1528 में अयोध्या पर आक्रमण किया और राम मंदिर को तोड़ दिया। इसके बाद, बाबर ने उसी स्थान पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया। यह घटना भारतीय इतिहास में एक विवाद का कारण बनी, जिसने अयोध्या को एक धार्मिक स्थल से राजनीतिक विवाद का केंद्र बना दिया।

अयोध्या विवाद:

बाबरी मस्जिद के बाद, अयोध्या में हिन्दू-मुस्लिम सम्बंधों में तनाव बना रहा। इसके बाद, 1992 में राम मंदिर की बाबरी मस्जिद पर हुए एक विवादकारी आंदोलन के दौरान मस्जिद तोड़ी गई। इसके बाद, अयोध्या में स्थानीय न्यायिक और सामाजिक समूहों के समर्थन में राम मंदिर का निर्माण की मांग उभरी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय:

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए समर्थन का विरोध भी हुआ, और इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं चलीं। 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय दिया कि राम मंदिर के लिए एक विशेष क्षेत्र आवंटित किया जाएगा, और अलग स्थान पर मुस्लिम समुदाय के लिए मस्जिद बनाई जाएगी।

आधुनिक युग में राम मंदिर:

आज, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण पूर्ण हो चुका है, और यह भगवान राम के प्रति भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है। नए मंदिर की शिलान्यास समारोह में देशभर से लाखों लोग शामिल हुए और इस महत्वपूर्ण पल में एकता और धार्मिक सहमति की भावना को अभिव्यक्त किया।

Read more: राम मंदिर: ऐतिहासिक तथ्यों के साथ एक दर्शन

राम मंदिर ने अपनी अद्वितीय स्थानीयता और समृद्धि के साथ अपनी अद्भुतता को साबित किया है। यह न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक भी है, जो भारतीय समाज को एक साथ लाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *