रात के आसमान में चमकने वाला चांद अगर अचानक अपनी जगह से हटकर धरती की ओर आने लगे, तो क्या होगा? यह सवाल सुनने में किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए यह एक दिलचस्प काल्पनिक स्थिति है। अगर ऐसा कभी होता है, तो पृथ्वी पर इसके बेहद गंभीर परिणाम हो सकते हैं। चांद के धरती के करीब आने से गुरुत्वाकर्षण का असर बढ़ेगा और समुद्र से लेकर जमीन तक कई तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
समुद्र में उठ सकती हैं विशाल लहरें
चांद का पृथ्वी के समुद्रों पर पहले से ही गुरुत्वाकर्षण का असर पड़ता है। इसी वजह से समुद्र में ज्वार-भाटा आता है। लेकिन अगर चांद पृथ्वी के बहुत करीब पहुंचने लगे, तो यह प्रभाव कई गुना बढ़ सकता है।
ऐसी स्थिति में समुद्र का पानी असामान्य तरीके से ऊपर उठ सकता है। इससे तटीय इलाकों में बड़े पैमाने पर बाढ़ और विनाशकारी समुद्री लहरों का खतरा पैदा हो सकता है। दुनिया के कई समुद्र किनारे बसे शहर इसकी चपेट में आ सकते हैं।
धरती पर बढ़ सकता है भूकंप और ज्वालामुखी का खतरा
चांद के करीब आने से पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण का खिंचाव बढ़ेगा। इसका असर धरती की सतह और उसके अंदरूनी हिस्सों पर भी पड़ सकता है।
इससे जमीन में हलचल बढ़ सकती है और कुछ क्षेत्रों में भूकंप आने का खतरा पैदा हो सकता है। ज्वालामुखियों पर भी इसका कुछ प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि चांद के करीब आते ही पूरी दुनिया में एक साथ भूकंप आएंगे या सभी ज्वालामुखी फटने लगेंगे।
रोश सीमा पर पहुंचते ही टूट जाएगा चांद
इस काल्पनिक घटना का सबसे हैरान करने वाला हिस्सा तब होगा, जब चांद पृथ्वी के बेहद करीब पहुंच जाएगा। खगोल विज्ञान में इस सीमा को ‘रोश सीमा’ (Roche Limit) कहा जाता है।
इस सीमा के अंदर पहुंचने पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण चांद को तोड़ सकता है। ऐसी स्थिति में चांद एक साथ टकराने के बजाय छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखर सकता है।
इसके बाद चांद के ये टुकड़े पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाने लग सकते हैं। इससे धरती के चारों ओर शनि ग्रह जैसी एक विशाल रिंग बन सकती है। हालांकि, यह नजारा जितना खूबसूरत दिखाई देगा, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है।
फिलहाल यह सिर्फ एक काल्पनिक वैज्ञानिक स्थिति है। चांद अपनी कक्षा में स्थिर है और धीरे-धीरे पृथ्वी से दूर जा रहा है। इसलिए उसके अचानक धरती की ओर गिरने का कोई वास्तविक खतरा नहीं है।



