अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान एक बार फिर अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को मजबूत करने में जुटा है। हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में ईरान के कुछ संवेदनशील ठिकानों पर निर्माण और सुरक्षा बढ़ाने से जुड़ी गतिविधियां दिखाई देने का दावा किया गया है। इन तस्वीरों के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की चिंता बढ़ गई है।
अमेरिका के रिटायर्ड चार सितारा जनरल जैक कीन ने चेतावनी दी है कि ईरान ने अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को पूरी तरह नहीं छोड़ा है। उनके मुताबिक, तनाव कम करने की कोशिशों के बावजूद ईरान अपनी परमाणु क्षमताओं को फिर से मजबूत करने में लगा हुआ है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की नजर
फॉक्स न्यूज से बातचीत में जैक कीन ने कहा कि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने का फैसला नहीं किया है। उन्होंने ईरान के शासन को खतरनाक बताते हुए कहा कि परमाणु क्षमता हासिल करने की उसकी कोशिशें चिंता का विषय हैं।
हालांकि, ईरान के परमाणु कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति और हालिया गतिविधियों के वास्तविक उद्देश्य को लेकर स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
भूमिगत परमाणु ठिकानों पर निर्माण की खबरें
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों में ईरान के कई संवेदनशील ठिकानों पर गतिविधियां दिखाई दी हैं। इनमें नतांज परमाणु केंद्र के पास स्थित पिकैक्स माउंटेन कॉम्प्लेक्स भी शामिल है।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस परिसर में भूमिगत सुविधाएं मौजूद हैं, जो जमीन की सतह से सैकड़ों फीट नीचे हो सकती हैं। इसकी वजह से यह स्थान ईरान के परमाणु ढांचे को लेकर चल रही चर्चाओं में खास महत्व रखता है।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान कुछ परमाणु सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़े ठिकानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत कर रहा है।
बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को भी मजबूत करने की तैयारी?
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा मजबूत करने के साथ बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास में भी तेजी लाने की कोशिश कर रहा है।
अगर इन गतिविधियों की पुष्टि होती है, तो इससे पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव और बढ़ सकता है। अमेरिका और इजरायल ईरान की परमाणु क्षमताओं को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानते रहे हैं।
फिलहाल, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई देने वाली गतिविधियों से यह अपने आप साबित नहीं होता कि ईरान ने परमाणु हथियार बनाने का काम दोबारा शुरू कर दिया है। इसके लिए ठोस और स्वतंत्र प्रमाण जरूरी हैं।



