क्या आपने कभी ऐसे जीव के बारे में सुना है, जो बूढ़ा होने के बाद मरने के बजाय फिर से बच्चा बन जाता है? सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन समुद्र में रहने वाला एक छोटा सा जीव ऐसा कर सकता है। इसे अमर जेलीफिश (Immortal Jellyfish) कहा जाता है। वैज्ञानिकों के लिए भी यह जीव किसी पहेली से कम नहीं है।
बूढ़ा होने पर फिर से बच्चा बन जाती है जेलीफिश
अमर जेलीफिश की सबसे खास बात यह है कि खतरे, बीमारी या भोजन की कमी होने पर यह अपने जीवन चक्र को उलट सकती है। यानी जब यह पूरी तरह विकसित होकर बड़ी हो जाती है, तो दोबारा अपने शुरुआती बचपन की अवस्था में पहुंच सकती है।
इस प्रक्रिया में जेलीफिश अपनी वयस्क अवस्था को छोड़कर कोशिकाओं के एक छोटे समूह में बदल जाती है। इसके बाद यह फिर से पॉलिप (Polyp) अवस्था में पहुंच जाती है। यहां से इसका जीवन दोबारा शुरू हो सकता है। इस तरह यह प्रक्रिया कई बार दोहराई जा सकती है।
संयोग से वैज्ञानिकों को पता चला अमरता का राज
इस अनोखे जीव की खासियत का पता 1990 के दशक में चला था। साल 1992 में इतालवी वैज्ञानिकों ने इस जेलीफिश पर रिसर्च के दौरान देखा कि कुछ जेलीफिश अपनी वयस्क अवस्था से वापस पॉलिप अवस्था में पहुंच गई हैं।
वैज्ञानिकों के लिए यह हैरान करने वाली बात थी, क्योंकि आमतौर पर जेलीफिश का जीवन चक्र एक दिशा में आगे बढ़ता है। लेकिन इस जीव ने उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को उलटने की क्षमता दिखाई।
कोशिकाओं को दोबारा बदलने की ताकत
इस जेलीफिश के शरीर में एक खास जैविक प्रक्रिया होती है, जिसे ट्रांसडिफरेंशिएशन (Transdifferentiation) कहा जाता है। इस प्रक्रिया में एक प्रकार की विकसित कोशिका दूसरे प्रकार की कोशिका में बदल सकती है।
इसी क्षमता की मदद से यह जेलीफिश अपने शरीर की कोशिकाओं को दोबारा व्यवस्थित कर सकती है और अपने जीवन की शुरुआती अवस्था में लौट सकती है। यही खूबी इसे दूसरे समुद्री जीवों से अलग बनाती है।
डीएनए की मरम्मत करने में भी है माहिर
साल 2022 में प्रकाशित एक वैज्ञानिक रिसर्च में इस जेलीफिश के जीन और डीएनए की मरम्मत से जुड़ी खासियतों का अध्ययन किया गया। रिसर्च में ऐसे कई जीन की पहचान हुई, जो डीएनए की सुरक्षा और मरम्मत में मदद कर सकते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी कोशिकाओं में होने वाली ये प्रक्रियाएं उम्र बढ़ने और कोशिकाओं के खराब होने से जुड़े रहस्यों को समझने में मदद कर सकती हैं।
क्या इंसान भी कभी दोबारा जवान हो सकेंगे?
इस जेलीफिश की सबसे बड़ी खासियत ने मेडिकल साइंस के सामने नई संभावनाएं खोल दी हैं। वैज्ञानिक जानना चाहते हैं कि इसकी कोशिकाओं को दोबारा विकसित करने की क्षमता से इंसानों में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को समझने में कितनी मदद मिल सकती है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इंसान भी इस जेलीफिश की तरह बूढ़े होकर बच्चे बन जाएंगे। फिलहाल यह संभव नहीं है। लेकिन इसकी जैविक प्रक्रिया को समझकर भविष्य में कोशिकाओं और शरीर के ऊतकों की मरम्मत से जुड़ी नई तकनीक विकसित की जा सकती है।
हार्ट अटैक से अल्जाइमर तक, इलाज की नई उम्मीद
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस जेलीफिश पर होने वाली रिसर्च से भविष्य में कई गंभीर बीमारियों के इलाज के नए रास्ते खुल सकते हैं। इनमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक, अल्जाइमर और उम्र बढ़ने के कारण आंखों की रोशनी कम होना जैसी समस्याएं शामिल हैं।
हालांकि, अभी इन बीमारियों का इलाज इस जेलीफिश की मदद से संभव नहीं हुआ है। इस दिशा में रिसर्च जारी है।
अमर होने के बावजूद समुद्र में खतरे से घिरी रहती है
अमर जेलीफिश को भले ही वैज्ञानिक रूप से खास माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे कभी मौत नहीं आती। समुद्र में बड़ी मछलियां इसे खा सकती हैं। इसके अलावा भोजन की कमी, संक्रमण और पर्यावरण में बदलाव के कारण भी इसकी मौत हो सकती है।
दरअसल, इसकी अमरता का मतलब सिर्फ इतना है कि यह अपनी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को उलटकर दोबारा शुरुआती अवस्था में पहुंच सकती है। लेकिन प्रकृति के दूसरे खतरों से यह खुद को पूरी तरह नहीं बचा सकती। यही वजह है कि यह छोटा सा समुद्री जीव आज भी वैज्ञानिकों के लिए शोध का एक बेहद दिलचस्प विषय बना हुआ है।



