बिहार में मतदाता सूची संशोधन को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बार जेडीयू सांसद गिरधारी यादव ने सीधे तौर पर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं और SIR (Special Summary Revision) प्रक्रिया को लेकर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को न तो बिहार के इतिहास का ज्ञान है और न ही भूगोल की जानकारी। ऐसे में आयोग द्वारा शुरू की गई मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया यानी SIR को उन्होंने अव्यवहारिक करार दिया।
क्या है गिरधारी यादव का मामला?
बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर तैयारियां ज़ोरों पर हैं। इसी सिलसिले में चुनाव आयोग ने राज्य भर में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (Special Summary Revision) की प्रक्रिया शुरू की है। लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर कई जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई है। सबसे मुखर विरोध जेडीयू के वरिष्ठ नेता और सांसद गिरधारी यादव की तरफ से देखने को मिला है।
गिरधारी यादव की तीखी प्रतिक्रिया
गिरधारी यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “SIR जैसी प्रक्रिया बिहार जैसे राज्य में चलाना बेहद कठिन कार्य है। आयोग को जमीनी सच्चाई की कोई जानकारी नहीं है। जब आयोग खुद सच्चाई नहीं जानता, तो फिर हम सांसद क्यों बने हैं? अगर हम ही सच्चाई नहीं बता सकते तो हमें संसद भेजने का कोई मतलब नहीं।”
उन्होंने कहा कि बिहार में इस समय बारिश का मौसम चल रहा है, गांव-देहातों में सड़कें टूटी हुई हैं, और सामान्य लोगों तक पहुंचना आसान नहीं है। ऐसी स्थिति में SIR प्रक्रिया को लागू करना न सिर्फ अव्यवहारिक है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ अन्याय भी है।
छह महीने का समय मांग
गिरधारी यादव ने यह भी मांग की कि मतदाता सूची संशोधन के लिए आयोग को कम से कम छह महीने का समय देना चाहिए। उनका कहना है कि इतने बड़े राज्य में, जहां अभी भी कई क्षेत्र दुर्गम हैं, वहां इतनी जल्दी प्रक्रिया पूरी करना न तो अधिकारियों के लिए संभव है और न ही जनता के लिए उचित।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि मतदाता सूची का सटीक और पारदर्शी होना बेहद ज़रूरी है, लेकिन उसे जल्दबाज़ी में करने से कई वास्तविक मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं, जिससे भविष्य में राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़े हो सकते हैं।
विपक्ष को मिला मुद्दा
गिरधारी यादव की यह टिप्पणी केवल एक सांसद की नाराज़गी नहीं मानी जा रही, बल्कि यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्षी दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि जब सरकार के अपने सांसद ही आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, तो इसका मतलब है कि कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है।
राजद और कांग्रेस जैसे दलों ने इसे लेकर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है और मांग की है कि SIR प्रक्रिया को या तो रोका जाए या उसमें व्यापक बदलाव किए जाएं।
चुनाव आयोग की चुप्पी
अब तक चुनाव आयोग की ओर से गिरधारी यादव के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, आयोग पहले ही कह चुका है कि SIR प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता से चलाई जा रही है और इसका उद्देश्य सही मतदाताओं को सूची में दर्ज करना है। लेकिन सांसद के आरोपों के बाद अब आयोग की चुप्पी भी सवालों के घेरे में आ गई है।
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