भूटान के उत्तरी इलाके में स्थित शिंताफू झील के अचानक फटने से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं. झील से निकले पानी का बहाव इतना तेज था कि लाया इलाके की एक मुख्य सड़क का बड़ा हिस्सा बह गया. इस घटना के कारण लाया क्षेत्र का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से कट गया है. वहीं, इस घटना को देखते हुए पश्चिम बंगाल और असम में भी प्रशासन अलर्ट हो गया है.
पश्चिम बंगाल के वन मंत्री मनोज कुमार ओरांव ने संकोश नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. उन्होंने कहा है कि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा.
कुमारग्राम और चांगमारी में जारी हुआ अलर्ट
वन मंत्री ने कुमारग्राम, चांगमारी और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों से सावधान रहने की अपील की है. उनके मुताबिक, बाढ़ का पानी फिलहाल इन इलाकों से करीब 50 से 60 किलोमीटर दूर है. हालांकि, पानी का बहाव नीचे की ओर बढ़ने पर स्थिति गंभीर हो सकती है. भूटान में भी संवेदनशील इलाकों में तैनात सेना के जवानों और अन्य लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं.
माइक से लोगों को किया जा रहा है सतर्क
भूटान में आई इस बाढ़ को लेकर उत्तर बंगाल विकास मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने बताया कि कूचबिहार प्रशासन ने संकोश नदी के किनारे रहने वाले लोगों को अलर्ट कर दिया है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को राहत सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी. इसके लिए माइक के जरिए आसपास के इलाकों में लगातार लोगों को सावधान किया जा रहा है.
बंगाल और असम में भी बढ़ी चिंता
जानकारी के मुताबिक, झील से निकला पानी मोफू नदी के रास्ते संकोश नदी की तरफ बढ़ रहा है. इसी वजह से भूटान के प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है. वहीं, पश्चिम बंगाल और असम में भी प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अलर्ट जारी किया है.
गुरुवार रात ताकत्सेमाखांग तक पहुंचा बाढ़ का पानी
बताया जा रहा है कि भूटान के ताकत्सेमाखांग के पास स्थित शितांफू तशो झील अचानक फट गई. इसके बाद गुरुवार रात पानी ताकत्सेमाखांग इलाके तक पहुंच गया. रात में अंधेरा होने के कारण पानी की मात्रा और नुकसान का सही अंदाजा नहीं लगाया जा सका. स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी के बहने की तेज आवाज से घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता था. हालांकि, अभी तक नुकसान का पूरा आकलन नहीं हो पाया है.



