मेरठ के चर्चित ब्लू ड्रम मर्डर केस में 14 अक्टूबर को अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई। फैसला सुनाते समय जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने महाभारत का जिक्र किया और कहा कि अपराध की गंभीरता के हिसाब से सजा देना न्यायपालिका का कर्तव्य है।
फैसला सुनाने के बाद जज ने जिस बॉलपॉइंट पेन का इस्तेमाल किया था, उसे डस्टबिन में डाल दिया। इस घटना ने अदालत में मौजूद वकीलों और अन्य लोगों का ध्यान खींचा।
महाभारत और बाघ का उदाहरण देकर समझाया न्याय का महत्व
सजा सुनाने से पहले जज अरविंद कुमार मिश्रा ने महाभारत का हवाला देते हुए न्याय और कानून की जिम्मेदारी पर बात की। उन्होंने कहा कि अपराध की गंभीरता के अनुसार सजा देना जरूरी है, ताकि समाज में कानून के प्रति विश्वास बना रहे।
उन्होंने बाघ और जंगल का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर जंगल सुरक्षित है, तो बाघ भी सुरक्षित रहता है। इसी तरह कानून समाज के लोगों की सुरक्षा करता है और उनके व्यवहार को नियंत्रित करता है।
जज ने कहा कि इस मामले में समाज तक यह संदेश पहुंचाना जरूरी था कि गंभीर अपराधों के लिए कानून के तहत सजा दी जाती है।
फैसला सुनाने के बाद पेन डस्टबिन में फेंका
मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाने के बाद जज ने फैसला लिखने और सुनाने के लिए इस्तेमाल किए गए बॉलपॉइंट पेन को डस्टबिन में डाल दिया।
इस कदम ने अदालत में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। जज अरविंद मिश्रा ने मेरठ में जिला एवं सत्र न्यायाधीश का पद संभालने के करीब पांच महीने बाद यह फैसला सुनाया।
कौन हैं जज अरविंद कुमार मिश्रा?
जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा का जन्म 2 जुलाई 1971 को उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1990 में बीए, 1994 में एलएलबी और 1996 में एलएलएम की पढ़ाई पूरी की।
उन्होंने 31 मई 2003 को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के रूप में उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में अपना करियर शुरू किया। उन्हें न्यायिक सेवा में दो दशक से ज्यादा का अनुभव है।
कई जिलों में कर चुके हैं काम
अपने न्यायिक करियर के दौरान अरविंद मिश्रा ने गाजीपुर, सुल्तानपुर, अलीगढ़ और गोरखपुर समेत कई जिलों में अलग-अलग पदों पर काम किया। इनमें सिविल जज, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जैसे पद शामिल हैं।
अप्रैल 2014 में उन्हें कानपुर नगर में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया। उन्होंने कानपुर में फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश के रूप में भी काम किया।
इसके अलावा, वह उत्तर प्रदेश सरकार में विशेष सचिव और अतिरिक्त विधिक सलाहकार के पद पर प्रतिनियुक्ति पर रहे। बाद में उन्होंने लखनऊ में स्टेट ट्रांसपोर्ट अपीलेट ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली।
नवंबर 2024 में बने मिर्जापुर के जिला जज
नवंबर 2024 में अरविंद कुमार मिश्रा को मिर्जापुर का जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के तबादला आदेश के बाद उन्होंने 21 मई 2026 को मेरठ में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाला।
मेरठ के ब्लू ड्रम मर्डर केस में सुनाया गया उनका फैसला और पेन को डस्टबिन में डालने की घटना अब चर्चा का विषय बनी हुई है।



