दिल्ली की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। इस बार मुद्दा है राजधानी में 10 साल पुरानी गाड़ियों पर लगाए गए बैन का। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस मसले पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सीधे निशाने पर लिया है। AAP नेता आतिशी ने साफ कहा है कि यदि भाजपा 10 साल पुरानी गाड़ियों को लेकर कानून लाने की पहल करती है तो AAP उसका समर्थन करने को तैयार है। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि फिलहाल भाजपा की नीयत पर संदेह है।
क्या है दिल्ली में पूरा मामला?
दिल्ली में प्रदूषण पर काबू पाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई नियम लागू किए गए हैं। इन नियमों के तहत 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों और 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को दिल्ली की सड़कों से हटाया जा रहा है। यह आदेश नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप है। लेकिन आम आदमी पार्टी का कहना है कि दिल्ली सरकार की ओर से लागू किए गए इन नियमों का सबसे ज्यादा असर मिडल क्लास और लोअर मिडल क्लास पर पड़ा है।
आतिशी का बयान
AAP नेता आतिशी ने कहा कि यह प्रतिबंध उन परिवारों के लिए भारी पड़ रहा है, जो अपनी मेहनत की कमाई से गाड़ियां खरीदते हैं और उन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल करना चाहते हैं। उन्होंने भाजपा से सवाल पूछा कि अगर वे सच में आम जनता के साथ हैं, तो 10 साल वाली गाड़ियों को लेकर एक समुचित कानून संसद में क्यों नहीं लाते? आतिशी ने चुनौती भरे लहजे में कहा कि यदि भाजपा कानून लाने की पहल करती है, तो आम आदमी पार्टी उसका समर्थन करेगी।
दिल्ली सरकार और जनता के बीच असमंजस
दिल्ली में लाखों वाहन मालिक हैं जिनकी गाड़ियां 10 साल से पुरानी हो चुकी हैं। इनमें से अधिकतर वाहन रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इस्तेमाल होते हैं, और उन्हें हटाने का सीधा असर मध्यम वर्ग पर पड़ता है। हाल ही में कई वाहन मालिकों को चालान, जब्ती और स्क्रैपिंग के नोटिस मिले हैं, जिससे नाराजगी और भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
राजनीतिक मतभेद या जनहित का मुद्दा?
इस पूरे मुद्दे को लेकर भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा का कहना है कि दिल्ली सरकार खुद NGT के निर्देशों के तहत यह निर्णय ले चुकी है, लेकिन अब जब चुनाव नजदीक हैं, तो AAP इस मुद्दे को भावनात्मक रंग देकर जनता को गुमराह कर रही है। वहीं AAP का दावा है कि उनकी चिंता केवल दिल्ली के नागरिकों के हितों को लेकर है।
मध्यवर्ग पर असर
10 साल पुरानी गाड़ियों पर बैन का सबसे ज्यादा असर टैक्सी चालकों, ऑटो मालिकों, डिलीवरी बॉयज, और छोटे कारोबारियों पर पड़ा है। वे न तो नई गाड़ी खरीद सकते हैं, और न ही पुरानी गाड़ी को स्क्रैप कराने के लिए तैयार हैं। इससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।
समाधान की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी गाड़ियों पर रोक जरूरी है, लेकिन इसे लागू करने के लिए एक व्यवस्थित और समावेशी योजना की जरूरत है। सरकार को स्क्रैपिंग पॉलिसी के साथ-साथ सब्सिडी, एक्सचेंज ऑफर और पर्यावरण के अनुकूल गाड़ियों को बढ़ावा देने की योजना पर काम करना चाहिए।
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