दुनियाभर की नजरें उस समय चौंक गईं जब अमेरिका और पाकिस्तान के बीच एक अहम ऑयल डील की खबर सामने आई। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस डील को लेकर एक चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा — “क्या पता एक दिन पाकिस्तान भारत को भी तेल बेचे!” इस बयान के बाद कूटनीतिक और आर्थिक गलियारों में हलचल मच गई है।
इस डील के तहत अमेरिका न सिर्फ पाकिस्तान को तेल बेचने की अनुमति देगा, बल्कि खुदाई (oil exploration) और रिफाइनिंग में भी तकनीकी सहायता देगा। माना जा रहा है कि यह डील पाकिस्तान की जर्जर अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
क्या है यह ऑयल डील?
यह डील अमेरिका की एक निजी तेल कंपनी और पाकिस्तान सरकार के बीच हुई है, जिसमें अमेरिका पाकिस्तान को तेल क्षेत्र में निवेश, तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण देने पर सहमत हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक, इस डील के दो प्रमुख बिंदु हैं:
- पाकिस्तान में तेल और गैस की संभावित खुदाई के लिए अमेरिकी कंपनियों को मौके मिलेंगे।
- अमेरिका की ओर से पाकिस्तान को कच्चा तेल आपूर्ति किया जाएगा, जिससे पाकिस्तान की घरेलू जरूरतें पूरी की जा सकें।
ट्रंप ने इस डील को अमेरिका की “ऊर्जा कूटनीति” की जीत बताया है।
ट्रंप का बयान: दोस्ती या भविष्य की चाल?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस डील की जानकारी साझा करते हुए लिखा —
“पाकिस्तान के साथ तेल पर डील बहुत पॉजिटिव है। हो सकता है एक दिन वह भारत को भी तेल बेचने लगे। दुनिया बदल रही है!”
ट्रंप का यह बयान महज मजाकिया अंदाज में दिया गया हो सकता है, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ भी हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच इस तरह की टिप्पणी को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
भारत को चिंता क्यों हो सकती है?
भारत आज अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। वहीं पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस स्थिति में नहीं है कि वह भारत जैसे देश को तेल निर्यात कर सके। फिर भी, अमेरिका जैसे वैश्विक ताकतवर देश का पाकिस्तान को ऊर्जा क्षेत्र में समर्थन देना भारत के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
विशेषज्ञों की मानें तो अगर पाकिस्तान तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया, तो उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नया आत्मविश्वास मिलेगा — जो उसकी विदेश नीति को भारत के खिलाफ आक्रामक बना सकता है।
पाकिस्तान को ऑयल डील से क्या फायदा?
पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है। IMF की शर्तों, विदेशी कर्ज और महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। अमेरिका से हुई यह ऑयल डील पाकिस्तान के लिए दो मोर्चों पर सहायक हो सकती है:
- तेल आत्मनिर्भरता की दिशा में पहला कदम: अगर खुदाई सफल होती है तो पाकिस्तान घरेलू जरूरतों को खुद ही पूरा कर सकेगा।
- रोजगार और निवेश में बढ़ोतरी: अमेरिकी निवेश से देश में नई नौकरियों और विदेशी मुद्रा की संभावना बढ़ेगी।
चीन की भी निगाहें इस ऑयल डील पर
गौरतलब है कि पाकिस्तान पहले से ही चीन के साथ CPEC (China-Pakistan Economic Corridor) प्रोजेक्ट में जुड़ा हुआ है। अब अमेरिका की इस एंट्री से पाकिस्तान को दोनों महाशक्तियों से आर्थिक सहयोग मिलेगा। हालांकि इससे उसकी विदेश नीति असंतुलन में भी पड़ सकती है — क्योंकि अमेरिका और चीन के बीच तनातनी जगजाहिर है।
भारत की प्रतिक्रिया क्या हो सकती है?
सरकार की ओर से अभी तक इस डील पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत को इस डील को गंभीरता से लेना चाहिए।
भारत को अपने पारंपरिक तेल स्रोतों पर निर्भरता कम कर वैकल्पिक स्रोतों और नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर देना होगा। साथ ही पाकिस्तान की ऊर्जा संभावनाओं पर भी नजर रखनी होगी — क्योंकि कल का कमजोर पड़ोसी, भविष्य में ताकतवर बनकर सामने आ सकता है।
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