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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के दौरान भारतीय नौसेना ने 18 मर्चेंट जहाजों को सुरक्षित तरीके से युद्ध प्रभावित क्षेत्र से बाहर निकाला। इन जहाजों में करीब 9,000 करोड़ रुपये का सामान लदा हुआ था।

INS महेन्द्रगिरी में लगाई जा सकती है ब्रह्मोस मिसाइल

उन्होंने भारतीय रक्षा तकनीक की भी तारीफ की। राजनाथ सिंह ने बताया कि INS महेन्द्रगिरी में ब्रह्मोस सरफेस-टू-सरफेस मिसाइल लगाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज और सबसे घातक क्रूज मिसाइलों में से एक मानी जाती है।

राजनाथ सिंह ने बताया कि इसमें मल्टीफंक्शन रडार के साथ-साथ (Long Range Surface-to-Air Missiles) लंबी दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल का भी कॉम्बिनेशन है, जो आकाश से आने वाले किसी भी खतरे को दूर से ही पहचानकर नष्ट करने में पूरी तरह सक्षम है. इसमें स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर है. एक टॉरपीडो लॉन्चर हैं. इसके अलावा इंटीग्रेटेड एंटी-सबमरीन डिफेंस सिस्टम है, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट भी है और क्लोज़-इन वेपन सिस्टम है. ये तमाम चीजें इसे महेन्द्रगिरी पर्वत के समान ही अभेद और मजबूत बनाती हैं.

18 मर्चेंट वेसल को सुरक्षित एस्कॉर्ट किया

रक्षा मंत्री के कार्यालय की तरफ से रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए पोस्ट में कहा गया कि हाल की घटनाओं ने भी एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि एक सक्षम और जिम्मेदार नौसेना किसी भी राष्ट्र के लिए कितनी आवश्यक होती है.

वेस्ट एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद इंडियन नेवी (Indian Navy) ने ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा के माध्यम से 9,000 करोड़ रूपए से अधिक मूल्य के आवश्यक कॉर्गो को लेकर चल रहे 18 मर्चेंट वेसल को सुरक्षित एस्कॉर्ट किया.

राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी नेवी केवल एक लड़ाकू फोर्स नहीं बल्कि भारत के इकोनॉमिक इंटरेस्ट की भी एक मजबूत संरक्षक बनकर उभरी है. हर शिप के साथ हमारा इको सिस्टम और मैच्योर होता जा रहा है और अधिक कुशल होता जा रहा है और अधिक विश्वसनीय होता जा रहा है. हर नया जहाज भारत के समुद्री भविष्य में किया गया लंबी अवधि का निवेश भी होता है. 

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