नई दिल्ली। में AI लोकप्रिय पंजाबी गायक सोनू ठुकराल का नया गाना ‘जुगनी’ इन दिनों सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। गाने को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है और यह लगातार ट्रेंड कर रहा है। लेकिन इसी बीच इस गाने को लेकर एक ऐसा विवाद सामने आया है, जिसने कलाकार और उनकी टीम की चिंता बढ़ा दी है।
मामले के अनुसार, कुछ लोगों ने गाने के एक छोटे से दृश्य को आधार बनाकर उसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से एडिट और मॉर्फ किया तथा सोशल मीडिया पर भ्रामक तरीके से वायरल करना शुरू कर दिया। आरोप है कि इस छेड़छाड़ का उद्देश्य गाने और कलाकार की छवि को नुकसान पहुंचाना था।
तकनीकी त्रुटि बनी विवाद की वजह
जानकारी के अनुसार, ‘जुगनी’ की शूटिंग के दौरान एक दृश्य में कैमरे का एंगल तकनीकी कारणों से सही नहीं रहा। रिलीज के बाद यह छोटा सा हिस्सा कुछ लोगों की नजर में आया और सोशल मीडिया पर उसे अलग करके वायरल किया जाने लगा।
इसके बाद कुछ शरारती तत्वों ने AI तकनीक का इस्तेमाल कर उस हिस्से को मॉर्फ किया और उसे मूल वीडियो की तरह पेश करते हुए भ्रामक दावे करने शुरू कर दिए। सोशल मीडिया पर तेजी से फैली इस सामग्री ने विवाद को और बढ़ा दिया।
अभिनेत्री और गायक पर लगाए गए आरोप
सोशल मीडिया पर वायरल किए गए एडिटेड वीडियो के आधार पर कुछ यूजर्स ने गायक सोनू ठुकराल और गाने में नजर आने वाली अभिनेत्री जैकलिन फर्नांडीज पर अनुचित सामग्री प्रस्तुत करने के आरोप लगाने शुरू कर दिए।
हालांकि, गायक का कहना है कि वायरल हो रहे कई वीडियो मूल गाने का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि AI और एडिटिंग के जरिए तैयार किए गए हैं। उनका आरोप है कि यह पूरी तरह से उनकी छवि खराब करने की कोशिश है।
15 मिलियन व्यूज के बाद हटाया गया गाना
विवाद बढ़ने के बाद सोनू ठुकराल ने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल से ‘जुगनी’ का मूल संस्करण हटा दिया। उस समय तक गाना लगभग 1.5 करोड़ (15 मिलियन) व्यूज हासिल कर चुका था।
इसके बाद वीडियो की समीक्षा की गई और विवादित कैमरा एंगल वाले हिस्से को हटाकर गाने का नया संस्करण दोबारा रिलीज किया गया। नए वर्जन को भी दर्शकों का अच्छा समर्थन मिल रहा है।
AI से एडिट वीडियो अब भी हो रहे वायरल
गाने का नया संस्करण जारी होने के बावजूद सोशल मीडिया पर कुछ लोग पुराने और AI से एडिट किए गए वीडियो शेयर कर रहे हैं। गायक का कहना है कि इन वीडियो के जरिए लोगों को गुमराह किया जा रहा है और जानबूझकर विवाद पैदा किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि AI तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ इस तरह की डिजिटल छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे किसी भी व्यक्ति या संस्था की प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।
साइबर क्राइम सेल में दर्ज कराई शिकायत
मामले को गंभीरता से लेते हुए गायक सोनू ठुकराल ने साइबर क्राइम सेल में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ असामाजिक तत्व AI तकनीक का दुरुपयोग कर उनके गाने को गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
दर्शकों से की खास अपील
सोनू ठुकराल ने अपने प्रशंसकों और दर्शकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एडिटेड और भ्रामक वीडियो पर भरोसा न करें। उन्होंने कहा कि केवल उनके आधिकारिक यूट्यूब चैनल और सत्यापित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध वीडियो को ही सही माना जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि बिना पुष्टि के किसी भी वीडियो या पोस्ट को साझा करना गलतफहमी फैलाने का कारण बन सकता है।
डिजिटल युग में बढ़ती AI मॉर्फिंग की चुनौती
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने जहां कंटेंट निर्माण को आसान बनाया है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। किसी भी फोटो या वीडियो को AI की मदद से बदलकर उसे वास्तविक जैसा दिखाना अब पहले से कहीं आसान हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कलाकारों, सार्वजनिक हस्तियों और आम नागरिकों सभी को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है। वहीं सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को भी किसी भी वायरल कंटेंट की सत्यता जांचने के बाद ही उसे साझा करना चाहिए।
विवाद के बावजूद ट्रेंड कर रहा ‘जुगनी’
विवादों के बीच भी ‘जुगनी’ की लोकप्रियता बनी हुई है। गाने का नया संस्करण लगातार दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसकी चर्चा जारी है।
संगीत प्रेमियों का कहना है कि किसी भी रचनात्मक कार्य का मूल्यांकन उसके मूल स्वरूप के आधार पर होना चाहिए, न कि एडिट या मॉर्फ किए गए वीडियो के आधार पर।
निष्कर्ष
‘जुगनी’ गाने को लेकर सामने आया यह मामला डिजिटल दौर में AI तकनीक के दुरुपयोग की गंभीर चुनौती को उजागर करता है। गायक सोनू ठुकराल ने साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कर स्पष्ट किया है कि वे अपनी प्रतिष्ठा और मूल कंटेंट की सुरक्षा के लिए कानूनी रास्ता अपना रहे हैं। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर है। साथ ही, दर्शकों के लिए भी यह जरूरी है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों पर उपलब्ध सामग्री पर ही भरोसा करें और भ्रामक या मॉर्फ किए गए कंटेंट को बढ़ावा न दें।
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