घी खाने को लेकर लोगों के मन में अक्सर यह डर रहता है कि इससे दिल की सेहत खराब हो सकती है। कई लोग घी को ऐसे देखते हैं, जैसे यह कोई ऐसी चीज हो, जिसे खाने के बाद पछताना पड़े। लेकिन क्या घी को लेकर सालों से चली आ रही यह सोच पूरी तरह सही है?
एक न्यूट्रिशनिस्ट और हेल्थ कोच के मुताबिक, कई बार लोगों का डर ऐसी जानकारी पर आधारित होता है, जिसे उन्होंने सालों पहले पढ़ा था और उसके बाद कभी दोबारा जांच नहीं की।
घी को दिल के लिए नुकसानदायक?
घी में सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा होती है। साल 1950 के दशक में वैज्ञानिक एंसेल कीज के शोध के बाद सैचुरेटेड फैट को दिल की बीमारी के खतरे से जोड़कर देखा जाने लगा। इसके बाद दुनियाभर में डाइट को लेकर कई ऐसी गाइडलाइंस बनीं, जिनमें सैचुरेटेड फैट कम करने की सलाह दी गई।
घी भी सैचुरेटेड फैट वाली चीजों में शामिल है। इसलिए इसे भी लंबे समय तक दिल के लिए नुकसानदायक माना जाता रहा। हालांकि, सैचुरेटेड फैट और दिल की बीमारी के बीच संबंध को लेकर वैज्ञानिक बहस पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
नई स्टडी में क्या सामने आया?
हाल ही में Progress in Nutrition में प्रकाशित एक मेटा-एनालिसिस में 10 अध्ययनों के आंकड़ों और करीब 20,000 लोगों को शामिल किया गया। इसमें घी खाने वाले लोगों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज यानी दिल की बीमारी के खतरे में हल्की बढ़ोतरी देखी गई। हालांकि, इस अध्ययन में घी खाने वालों के औसत कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड लेवल में कोई खास बदलाव नहीं पाया गया।
इसका मतलब क्या है?
इसका मतलब यह नहीं है कि घी पूरी तरह सुरक्षित है या इसे जितना चाहें उतना खाया जा सकता है। वहीं, केवल सैचुरेटेड फैट होने के आधार पर घी को पूरी तरह नुकसानदायक मान लेना भी सही नहीं होगा।
घी का असर इस बात पर भी निर्भर कर सकता है कि कोई व्यक्ति कितना घी खा रहा है और उसकी पूरी डाइट कैसी है। अगर कोई व्यक्ति संतुलित डाइट के साथ सीमित मात्रा में घी खाता है, तो उसकी स्थिति उस व्यक्ति से अलग हो सकती है, जिसकी पूरी डाइट में पहले से ही सैचुरेटेड फैट और कैलोरी ज्यादा है।
पूरी डाइट को ध्यान में रखना ज्यादा जरूरी है
इसलिए घी को लेकर सबसे जरूरी बात है मात्रा और पूरी डाइट का संतुलन। सिर्फ किसी एक खाद्य पदार्थ को अच्छा या बुरा मानने के बजाय अपनी पूरी डाइट और लाइफस्टाइल को ध्यान में रखना ज्यादा जरूरी है।
घी खाने वाले ग्रामीण में हार्ट डिजीज का खतरा नहीं
सैचुरेटेड फैट की सीधी थ्योरी को भारत की ग्रामीण आबादी भी एक चुनौती देती है। जिंदगीभर घी का काफी सेवन करने वाले ग्रामीण क्षेत्रों वाली जनता में हार्ट डिजीज का उतना खतरा नहीं देखा गया। इस बारे में एपिडेमियोलॉजिकल लिट्रेचर रिव्यू करने वाले रिसर्चर्स कई बार संकेत दे चुके हैं।
हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि घी की कोई भी मात्रा खाना सेफ है, लेकिन यह बताता है कि हर तरह के सैचुरेटेड फैट से हार्ट डिजीज में बढ़ोतरी मानने वाला पुराना मॉडल साफ और सही तस्वीर पेश नहीं करता है।
कार्डियोलॉजी चुपचाप लिख रही है नई कहानी
केवल घी ही नहीं, बल्कि सैचुरेटेड फैट पर भी कार्डियोलॉजी साइंस चुपचाप अपनी स्थिति बदल रही है। 2025 में टॉक्यो के अंदर St. Luke’s International Hospital के पेश हुए एक पेपर में बताया गया कि हर सैचुरेटेड फैट को एक जैसा, यूनिफॉर्म सब्सटांस नहीं मानना चाहिए।
इस साल रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल के एक अलग मेटा-एनालाइज ने 13,000 प्रतिभागियों पर अध्ययन करके जाना कि सैचुरेटेड फैट को कम करके कार्डियोवैस्कुलर और सभी कारण से होने वाली मृत्यु की दर पर असली गाइडलाइन के मुकाबले बहुत कम प्रभाव पड़ता है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अधिकतर पुरानी सलाह और निर्देश ऑब्जर्वेशनल सर्वे पर आधारित हैं, जहां पर लोगों को अपनी डाइट को याद करके बताने को कहा जाता था, ना कि ऐसे ट्रायल पर आधारित हैं जहां कारण और प्रभाव को सीधा जाना जाए।
ध्यान दें घी की खासियत पर
घी की कंपोजिशन भी यहां पर एक और लेयर जोड़ देती है, जिसे अधिकतर बार नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसमें ब्यूटिरिक एसिड नाम का शॉर्ट चेन फैटी एसिड एंटी-इंफ्लामेटरी प्रोपर्टीज के साथ होता है।
इसके अलावा कंजुगेटेड लिनोलिक एसिड और विटामिन ए, डी, ई और के की अच्छी मात्रा होती है। हालांकि, इनमें से कोई भी चीज घी के सैचुरेटेड फैट को कमतर नहीं कर देती और ना ही घी को ऐसी चीज बना देती है, जिसे सीमित मात्रा से ज्यादा खाया जा सके। लेकिन यह जरूर देखा जाना चाहिए कि घी केवल सैचुरेटेड फैट से कहीं ज्यादा है।
कितना घी करें इस्तेमाल?
आपको हर दिन घी की सीमित मात्रा का सेवन करना चाहिए। डाइट के किसी हिस्से या कुकिंग में एक चम्मच घी के साथ सब्जियां, फलियां और साबुत अनाज खाने से बरसों पुराने बताए खतरे से बचा जा सकता है।
अगर इसी घी को आप ज्यादा मात्रा में और रिफाइंड कार्ब्स के साथ खाएंगे तो स्थिति और हालात बदल सकते हैं। असली फर्क केवल घी नहीं, बल्कि इसकी मात्रा और डाइट की दूसरी चीजों से पैदा होता है।
दूसरे खाद्य पदार्थों पर जरूर ध्यान दें
अभी सैचुरेटेड फैट पर शोध और साइंस विकसित हो रही हैं, इसलिए कोई भी फाइनल रिजल्ट नहीं दे सकता है। अगर कोई किसी एक पक्ष पर जोर दे रहा है तो वह केवल अभी तक पता जानकारी को ही बता रहा है।
हालांकि, अभी की जानकारी बरसों पुरानी चेतावनी से ज्यादा संतुलित और प्रामाणिक है। घी का सेवन करें, लेकिन इसकी मात्रा और साथ में ली जा रहे दूसरे खाद्य पदार्थों पर जरूर ध्यान दें।
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