मेलानोमा त्वचा कैंसर का एक गंभीर प्रकार है। इसके इलाज को लेकर मॉडर्ना और मर्क की एक खास mRNA आधारित थेरेपी चर्चा में है। इसका नाम इंटिसमेरन ऑटोजीन (Intismeran Autogene), जिसे V940 या mRNA-4157 भी कहा जाता है। यह एक सामान्य वैक्सीन की तरह नहीं है, बल्कि हर मरीज के ट्यूमर के हिसाब से तैयार की जाने वाली व्यक्तिगत थेरेपी है।
हर मरीज के ट्यूमर के हिसाब से बनेगी थेरेपी
इस थेरेपी की सबसे खास बात इसका पर्सनलाइज्ड तरीका है। मरीज के ट्यूमर का सैंपल लेकर उसमें मौजूद खास जेनेटिक बदलावों की पहचान की जाती है। इसके बाद ऐसे नियोएंटीजन चुने जाते हैं, जिन्हें मरीज का इम्यून सिस्टम कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
इसके आधार पर mRNA थेरेपी तैयार की जाती है। इसका उद्देश्य शरीर के इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं की खास पहचान समझने और उन्हें निशाना बनाने में मदद करना है।
ट्रायल में दिखे अच्छे नतीजे
इस थेरेपी को मर्क की इम्यूनोथेरेपी दवा Keytruda (pembrolizumab) के साथ हाई-रिस्क स्टेज III और IV मेलानोमा के मरीजों में जांचा गया है, जिनका ट्यूमर सर्जरी से निकाला जा चुका था।
करीब 5 साल के फॉलो-अप डेटा में V940 और Keytruda के कॉम्बिनेशन ने अकेले Keytruda की तुलना में कैंसर दोबारा लौटने या मरीज की मौत के जोखिम को 49% कम किया। वहीं, शरीर के दूसरे हिस्सों में कैंसर फैलने या मौत के जोखिम में 59% कमी देखी गई।
अभी आम मरीजों के लिए उपलब्ध नहीं
हालांकि इन नतीजों से उम्मीद बढ़ी है, लेकिन V940 को अभी सामान्य इलाज के तौर पर मंजूरी नहीं मिली है। यह अभी इन्वेस्टिगेशनल यानी जांच के चरण में चल रही थेरेपी है और इसके अलग-अलग क्लिनिकल ट्रायल जारी हैं।
हाल ही में बड़े फेज-3 ट्रायल में भी सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं, लेकिन नियामकीय मंजूरी और व्यापक इस्तेमाल से पहले पूरी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
कैंसर के इलाज में क्यों खास है यह तरीका?
आमतौर पर एक ही दवा कई मरीजों को दी जाती है, लेकिन इस थेरेपी में मरीज के अपने ट्यूमर की जानकारी का इस्तेमाल किया जाता है। यानी हर मरीज के कैंसर में मौजूद खास बदलावों के आधार पर इलाज तैयार करने की कोशिश की जाती है।
इसी वजह से पर्सनलाइज्ड mRNA थेरेपी को कैंसर के इलाज में एक नई दिशा के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इसे अभी मेलानोमा की पक्की वैक्सीन कहना जल्दबाजी होगी। आगे के ट्रायल और नियामकीय फैसले ही बताएंगे कि यह इलाज कितने मरीजों के लिए कितना प्रभावी और सुरक्षित साबित होता है।
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