शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की अध्यक्षता अब पाकिस्तान के पास पहुंच गई है। मंगलवार को बिश्केक में पाकिस्तान को अगले अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अध्यक्षता संभालने की घोषणा करते हुए कहा कि पाकिस्तान अपनी अध्यक्षता को “विजन को कार्यरूप देना : कनेक्टिविटी, नवाचार और साझा समृद्धि” की थीम के साथ आगे बढ़ाएगा।
पाकिस्तान की अध्यक्षता के दौरान अगले एक साल में SCO के तहत करीब 30 बैठकें आयोजित होने की संभावना है। इनमें अधिकारियों, मंत्रियों और राष्ट्राध्यक्षों की बैठकें शामिल होंगी। इन बैठकों का आयोजन पाकिस्तान में किया जाएगा।
लेकिन पाकिस्तान को SCO की अध्यक्षता मिलने के साथ ही सबसे ज्यादा चर्चा भारत को लेकर हो रही है। सवाल यह है कि क्या भारत के अधिकारी SCO की बैठकों में हिस्सा लेने पाकिस्तान जाएंगे? और उससे भी बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2027 में होने वाले SCO शिखर सम्मेलन के लिए पाकिस्तान का दौरा करेंगे?
क्या 2027 में पाकिस्तान जाएंगे पीएम मोदी?
इस सवाल का अंतिम जवाब अभी सामने नहीं आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाकिस्तान यात्रा को लेकर फिलहाल किसी आधिकारिक फैसले की घोषणा नहीं हुई है। हालांकि भारत और पाकिस्तान के मौजूदा रिश्तों को देखते हुए यह यात्रा आसान नहीं मानी जा रही।
भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले कई वर्षों से संबंध बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। खासकर सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का रुख बेहद स्पष्ट और सख्त रहा है। ऐसे में पाकिस्तान में होने वाले किसी बड़े बहुपक्षीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत भागीदारी को लेकर अभी से कयास लगाए जा रहे हैं।
हालांकि SCO भारत के लिए एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच है। इसलिए यह भी संभव है कि भारत संगठन के स्तर पर अपनी भागीदारी जारी रखे, भले ही प्रधानमंत्री की यात्रा को लेकर फैसला बाद में लिया जाए।
2024 में एस जयशंकर गए थे पाकिस्तान
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बावजूद SCO के मंच पर दोनों देशों की भागीदारी पूरी तरह बंद नहीं हुई है।
वर्ष 2024 में पाकिस्तान में SCO के विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित हुई थी। इसमें हिस्सा लेने के लिए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर पाकिस्तान पहुंचे थे।
यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि लंबे समय बाद भारत सरकार के किसी वरिष्ठ मंत्री का पाकिस्तान दौरा हुआ था। हालांकि इस दौरे को भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों में किसी बड़े बदलाव के तौर पर नहीं देखा गया था। भारत ने स्पष्ट किया था कि यह यात्रा SCO की बैठक में भाग लेने के लिए थी।
2023 में भारत था का अध्यक्ष
इससे पहले वर्ष 2023 में SCO की अध्यक्षता भारत के पास थी। उस समय भी भारत और पाकिस्तान के संबंध सामान्य नहीं थे।
SCO के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी भारत आए थे। बैठक गोवा में हुई थी।

इसके बाद SCO शिखर सम्मेलन का आयोजन वर्चुअल माध्यम से किया गया था। इसमें पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने भी हिस्सा लिया था।
इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच तनाव के बावजूद SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भारत और पाकिस्तान की भागीदारी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
2015 से SCO में पीएम मोदी की भागीदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2015 से SCO की गतिविधियों में लगातार हिस्सा लेते रहे हैं। हालांकि अलग-अलग वर्षों में सम्मेलन का प्रारूप बदलता रहा है।
वर्ष 2020, 2021 और 2023 में शिखर सम्मेलन वर्चुअल माध्यम से आयोजित हुआ था। वहीं 2024 के अस्ताना शिखर सम्मेलन में भी प्रधानमंत्री मोदी व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुए थे।
वर्ष 2025 में तियानजिन में हुए SCO शिखर सम्मेलन और वर्ष 2022 में समरकंद शिखर सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों ने एक ही मंच साझा किया था। हालांकि दोनों नेताओं के बीच किसी औपचारिक या अनौपचारिक बातचीत की खबर सामने नहीं आई थी।
जब मोदी और नवाज शरीफ की हुई थी मुलाकात
भारत-पाकिस्तान संबंधों के इतिहास में SCO का एक दिलचस्प अध्याय वर्ष 2015 से जुड़ा है।
2015 में रूस के ऊफा में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच अलग से बातचीत भी हुई थी।
इसके बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर पर भी संपर्क की कोशिशें हुई थीं।
इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर 2015 को अचानक पाकिस्तान का दौरा भी किया था। यह दौरा उस समय काफी चर्चा में रहा था।
लेकिन इसके बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में फिर तनाव बढ़ गया।
पठानकोट हमले के बाद बदला भारत का रुख
2016 में पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला हुआ। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ आतंकवाद के मुद्दे पर अपना रुख और सख्त कर लिया।
इसी दौरान सार्क यानी दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन का शिखर सम्मेलन भी चर्चा में था। लेकिन आतंकवादी घटनाओं और भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारत ने सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया। बाद में अन्य देशों ने भी इससे दूरी बनाई और सार्क की गतिविधियां लगभग ठहर गईं।
भारत लगातार यह कहता रहा है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।
पाकिस्तान की SCO अध्यक्षता क्यों है महत्वपूर्ण?
पाकिस्तान के लिए SCO की अध्यक्षता कूटनीतिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अगले एक साल के दौरान पाकिस्तान में SCO की करीब 30 बैठकें आयोजित होंगी। इनमें विभिन्न स्तरों के अधिकारी, मंत्री और राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा ले सकते हैं।
ऐसे में पाकिस्तान को भारत, चीन, रूस और मध्य एशियाई देशों के साथ एक ही बहुपक्षीय मंच पर सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।
पाकिस्तान सरकार इस आयोजन को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी कर सकती है। इससे वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी कूटनीतिक सक्रियता और प्रभाव को दिखाने की कोशिश करेगी।
अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ भी बढ़ा पाकिस्तान का संपर्क
पाकिस्तान हाल के समय में अमेरिका के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश करता दिखाई दिया है। इसके अलावा तुर्किये और सऊदी अरब के साथ भी उसके रणनीतिक संबंधों में सक्रियता बढ़ी है।
ऐसे में SCO की अध्यक्षता पाकिस्तान के लिए अपनी कूटनीतिक स्थिति मजबूत करने का एक और अवसर हो सकती है।
हालांकि भारत के लिए सबसे बड़ा मुद्दा पाकिस्तान की विदेश नीति से ज्यादा आतंकवाद और सीमा पार गतिविधियां हैं। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच किसी बड़े राजनीतिक संवाद की संभावना फिलहाल सीमित दिखाई देती है।
भारत के सामने क्या विकल्प हैं?
2027 में पाकिस्तान में SCO शिखर सम्मेलन होने पर भारत के सामने कई विकल्प हो सकते हैं।
पहला विकल्प यह है कि भारत प्रधानमंत्री स्तर पर सम्मेलन में भाग ले। दूसरा विकल्प यह हो सकता है कि भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री या किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी द्वारा किया जाए। तीसरा विकल्प यह भी हो सकता है कि परिस्थितियों के अनुसार भारत वर्चुअल माध्यम से हिस्सा ले।
अंतिम फैसला सम्मेलन की तारीख नजदीक आने पर ही स्पष्ट होगा।
SCO भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संगठन है। इसमें चीन, रूस और मध्य एशिया के कई देश शामिल हैं। इसलिए भारत के लिए इस मंच से पूरी तरह दूरी बनाना भी आसान फैसला नहीं होगा।
2027 में क्या होगा? मोदी जाएंगे या नहीं?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2027 में SCO शिखर सम्मेलन के लिए पाकिस्तान जाएंगे?
इसका जवाब अभी तय नहीं है। भारत सरकार की ओर से ऐसी यात्रा को लेकर कोई अंतिम घोषणा सामने नहीं आई है।
मौजूदा भारत-पाकिस्तान संबंधों को देखते हुए प्रधानमंत्री की पाकिस्तान यात्रा को लेकर अटकलें जरूर तेज हैं। लेकिन SCO की बहुपक्षीय प्रकृति को देखते हुए भारत संगठन की बैठकों में अपनी भागीदारी जारी रख सकता है।
यानी आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि भारत पाकिस्तान की SCO अध्यक्षता के दौरान होने वाली बैठकों में किस स्तर पर भाग लेता है और 2027 के शिखर सम्मेलन को लेकर क्या रणनीति अपनाता है।
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