अबूजा: आमतौर पर इस्तेमाल के बाद प्लास्टिक की बोतलें कूड़ेदान में चली जाती हैं। लेकिन नाइजीरिया के कडुना शहर के इंजीनियर याहया अहमद ने इन्हीं बेकार बोतलों से घर बनाने का तरीका विकसित किया है।
अहमद ने करीब 10 साल तक इस तकनीक पर काम किया। उनके बनाए पहले मॉडल घर में करीब 14,800 प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद यह प्रयोग धीरे-धीरे एक बड़े निर्माण अभियान में बदल गया और उनकी टीम ने अब तक करीब 15 घर बनाए हैं।
जर्मनी से सीखी बोतलों से घर बनाने की तकनीक
याहया अहमद ने यह तकनीक जर्मनी के एक व्यक्ति से सीखी थी, जिसने इस तरह के निर्माण का तरीका विकसित किया था। इसके बाद उन्होंने इस तकनीक को नाइजीरिया में इस्तेमाल करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों के साथ काम शुरू किया।
उनकी टीम ने नालियों, खेतों और दूसरी जगहों से प्लास्टिक की बोतलें इकट्ठा करनी शुरू कीं। इस काम में बेरोजगार युवाओं को भी जोड़ा गया, जिससे उन्हें अस्थायी रोजगार का मौका मिला।
पहला मॉडल घर करीब 2012-13 में बनाया गया था। उस समय बड़ी संख्या में प्लास्टिक की बोतलें आसानी से इकट्ठी हो जाती थीं।
ऐसे बनाई जाती है बोतलों से दीवार
इस तकनीक में सबसे पहले प्लास्टिक की खाली बोतलों में रेत भरी जाती है। अहमद के मुताबिक, बोतलों में हाथ से रेत भरना इस पूरी प्रक्रिया का सबसे ज्यादा समय लेने वाला काम है।
इसके बाद रेत से भरी बोतलों को दीवारों में एक-दूसरे के साथ लगाया जाता है। उन्हें जोड़ने के लिए लेटराइट और तेज रेत के मिश्रण का इस्तेमाल किया जाता है।
जहां जरूरत होती है, वहां पारंपरिक निर्माण सामग्री भी इस्तेमाल की जाती है। नींव के लिए मिट्टी की स्थिति के अनुसार सीमेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है। दीवारों पर बाद में प्लास्टर किया जाता है और घर तैयार होने के बाद दरवाजे, खिड़कियां और दूसरी जरूरी फिटिंग लगाई जाती हैं।
अब तक बनाए 15 घर
अहमद की संस्था ने नाइजीरिया के अलग-अलग शहरों में करीब 15 घर बनाए हैं। इनमें कडुना, कानो और पोर्ट हारकोर्ट जैसे शहर शामिल हैं।
इबादान में उनकी टीम ने तीन बेडरूम का एक घर बनाया है, जिसका इस्तेमाल अब ऑफिस और रहने की जगह के तौर पर किया जा रहा है। वहीं, अबुजा में पांच बेडरूम वाला डुप्लेक्स भी बनाया गया है।
कम लागत और प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल
अहमद के मुताबिक, इस तकनीक का एक बड़ा फायदा यह है कि निर्माण में लागत कम हो सकती है। इसके अलावा प्लास्टिक कचरे को दोबारा इस्तेमाल करने का रास्ता भी मिलता है।
उनका यह प्रयोग अब नाइजीरिया के अलग-अलग हिस्सों में ट्रेनिंग और निर्माण परियोजनाओं तक पहुंच चुका है। इससे प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने के साथ-साथ वैकल्पिक निर्माण तकनीक को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।



