जन्माष्टमी के छह दिन बाद लड्डू गोपाल की छठी मनाई जाती है। इस साल कान्हाजी की छठी 9 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। भक्त अपने घर में लड्डू गोपाल की सेवा छोटे बच्चे की तरह करते हैं। इसलिए उनकी छठी भी पूरे विधि-विधान के साथ मनाई जाती है।
मान्यता है कि जिस तरह बच्चे के जन्म के छह दिन बाद छठी का आयोजन किया जाता है, उसी तरह बाल गोपाल की भी छठी मनाई जाती है। इस दिन उन्हें पंचामृत से स्नान कराने के बाद नए कपड़े पहनाकर उनका श्रृंगार किया जाता है।
छठी पर लड्डू गोपाल को क्या भोग लगाएं?
लड्डू गोपाल की छठी पर कई तरह के पकवान और मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। इनमें कढ़ी-चावल का विशेष महत्व बताया जाता है।
इसके अलावा बाल गोपाल को माखन-मिश्री, मखाने की खीर, मिठाई और धनिया की पंजीरी भी भोग में चढ़ाई जा सकती है। शाम के समय बिना लहसुन-प्याज की कढ़ी और चावल बनाकर भोग लगाने की परंपरा बताई गई है।
ऐसे करें लड्डू गोपाल का स्नान
छठी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
इसके बाद लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान कराएं। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और जल शामिल किया जाता है। इसके बाद शंख में गंगाजल लेकर भी बाल गोपाल को स्नान कराया जा सकता है।
पीले कपड़े पहनाकर करें श्रृंगार
स्नान के बाद लड्डू गोपाल को नए पीले वस्त्र पहनाएं। इसके बाद उनका श्रृंगार करें और काजल लगाएं। श्रृंगार पूरा होने के बाद उन्हें उनके आसन पर विराजमान करें।
सुबह के समय माखन-मिश्री और मिठाई का भोग लगाया जा सकता है।
छठी पर करें कान्हाजी का नामकरण
अगर जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को घर लाया गया है, तो छठी के दिन उनका नामकरण भी किया जा सकता है।
आप श्रीकृष्ण से जुड़े नाम जैसे कृष्ण, माधव या देवकीनंदन में से कोई नाम चुन सकते हैं। इसके बाद बाल गोपाल को उसी नाम से पुकारें।
धूप-दीप और आरती के बाद झुलाएं झूला
लड्डू गोपाल को फूल, धूप और दीप अर्पित करके पूजा करें। इसके बाद श्रीकृष्ण के भजन गाएं और आरती करें। आरती के बाद बाल गोपाल को झूला भी झुलाया जा सकता है।
मान्यता के अनुसार, छठी के दिन घर की चाबी लड्डू गोपाल के चरणों में रखकर उनकी पूजा करने और श्रीकृष्ण की कथा पढ़ने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इनका पालन श्रद्धा के अनुसार किया जाता है।



