नई दिल्ली: दिल्ली के शाहदरा थाना क्षेत्र में पार्किंग विवाद को लेकर शुरू हुआ मामला अब पुलिस और वकीलों के बीच विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है। 23 अक्टूबर से शुरू हुए इस पूरे घटनाक्रम में थाने के अंदर मारपीट, पुलिस अधिकारियों को धमकी देने, SHO के साथ कथित बदसलूकी और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में अब वरिष्ठ अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के फैसले का भी विरोध किया जा रहा है।
23 अक्टूबर: पार्किंग विवाद से शुरू हुआ मामला
मिली जानकारी के अनुसार, 23 अक्टूबर को शाहदरा थाना क्षेत्र में पार्किंग को लेकर दो पक्षों के बीच कहासुनी हो गई। एक पक्ष में एक पुरुष और दो महिलाएं थीं, जबकि दूसरे पक्ष की ओर से करीब 20 वकील मौके पर इकट्ठा हो गए।
आरोप है कि विवाद के बाद थाने के अंदर वकीलों ने एक व्यक्ति के साथ मारपीट की। इस दौरान व्यक्ति ने अपने बचाव में स्टील की प्लेट से वार किया, जो एक वकील के सिर पर लग गई।
24 अक्टूबर: SHO को दी गई कथित धमकी
बताया जा रहा है कि अगले दिन कुछ वकील दोबारा थाने पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने SHO से सवाल किया कि संबंधित व्यक्ति को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। इस दौरान SHO को कथित तौर पर धमकी भी दी गई और कहा गया कि उन्हें पीटा जाएगा।
25 अक्टूबर: हेड कांस्टेबल को कोर्ट में रोका
घटनाक्रम के अनुसार, 25 अक्टूबर को कुछ वकीलों ने शाहदरा थाने के एक हेड कांस्टेबल को कोर्ट परिसर में रोक लिया। उन्होंने SHO को बुलाने की मांग की। काफी देर तक बातचीत और अनुरोध के बाद हेड कांस्टेबल को वहां से जाने दिया गया।
26 अक्टूबर: SHO के कमरे में पहुंचकर कथित तौर पर की गई बदसलूकी
इस मामले में सबसे गंभीर घटनाक्रम 26 अक्टूबर को सामने आया। आरोप है कि करीब 20 से 25 वकील एक साथ शाहदरा थाने पहुंचे और SHO के कमरे में चले गए। उस समय कमरे में ACP और SHO पहले से मौजूद थे।
आरोपों के मुताबिक, कमरे में पहुंचते ही कुछ वकीलों ने SHO के साथ बहस शुरू कर दी और उन्हें कुर्सी से उठने पर मजबूर किया। इसके बाद ACP के साथ भी काफी देर तक बहस, कथित गाली-गलौज और धमकी देने का मामला सामने आया।
यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों ने SHO का हाथ पकड़कर उन्हें कमरे से बाहर खींचने की कोशिश की। इसके बाद कथित तौर पर धमकी देते हुए सभी वहां से चले गए।
FIR के बाद पुलिस का घेराव, अधिकारियों के ट्रांसफर पर नाराजगी
घटनाक्रम के अनुसार, इस मामले में ACP की ओर से FIR दर्ज कराई गई। इसके बाद वकीलों ने पुलिस का घेराव किया। वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की ओर से SHO और ACP के खिलाफ की गई ट्रांसफर और पोस्टिंग की कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई जा रही है।
इस कार्रवाई को विरोध कर रहे लोगों ने दोनों अधिकारियों के साथ अन्याय बताते हुए इसे दंडात्मक कार्रवाई करार दिया है।
अधिकारियों के समर्थन में उठेगी आवाज
अब इस पूरे मामले में SHO और ACP के समर्थन में आवाज उठाने की तैयारी है। विरोध करने वालों का कहना है कि यदि पुलिस अधिकारियों के साथ थाने के अंदर इस तरह का व्यवहार होता है, तो इससे पुलिस प्रशासन के सम्मान और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
उनकी मांग है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की समीक्षा की जाए।
नोट: यह खबर उपलब्ध कराई गई घटनाक्रम की जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। इसमें लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि NAV24news नही्ं करता है।



