Delhi Air Pollution: दिवाली का त्योहार नजदीक है। इस मौके पर लोग दीये जलाने के साथ आतिशबाजी भी करते हैं। लेकिन दिवाली की रात दिल्ली-NCR और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण काफी बढ़ सकता है। पटाखों से निकलने वाला धुआं हवा में जहरीले कणों की मात्रा बढ़ा देता है। वहीं, ठंड और धीमी हवा के कारण ये प्रदूषक आसानी से बाहर नहीं निकल पाते।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, दिवाली की रात और उसके अगले दिन दिल्ली की हवा में PM 2.5 का स्तर तेजी से बढ़ जाता है। PM 2.5 बेहद छोटे प्रदूषण कण होते हैं, जो सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं और सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
2021 से 2025 तक दिवाली पर कितना रहा प्रदूषण?
पिछले पांच सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिवाली के दौरान दिल्ली में प्रदूषण की समस्या काफी गंभीर रही है। इन आंकड़ों में दिवाली के दिन का औसत AQI और रात में PM 2.5 का अधिकतम स्तर शामिल है।
- 2025: दिल्ली में दिवाली के दिन औसत AQI 345 दर्ज किया गया। वहीं, रात में PM 2.5 का स्तर 675 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया। रात 11 बजे से सुबह 1 बजे के बीच प्रदूषण सबसे ज्यादा रहा।
- 2024: दिवाली पर औसत AQI 330 रहा और रात में PM 2.5 का स्तर 609 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया।
- 2023: इन पांच सालों में इस साल औसत AQI सबसे कम 218 दर्ज किया गया। हालांकि, रात में PM 2.5 का स्तर 570 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया।
- 2022: इस साल औसत AQI 312 रहा, जबकि रात में PM 2.5 का स्तर बढ़कर 728 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गया।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि दिवाली पर हर साल प्रदूषण का स्तर अलग-अलग रहता है। हालांकि, रात के समय पटाखों के धुएं से हवा की गुणवत्ता काफी खराब हो सकती है।
दिवाली की रात ही क्यों बढ़ जाता है प्रदूषण?
दिवाली की रात प्रदूषण बढ़ने की सबसे बड़ी वजह पटाखों से निकलने वाला धुआं है। आतिशबाजी के दौरान हवा में PM 2.5 और दूसरे हानिकारक कण मिल जाते हैं। कई बार इनका स्तर सामान्य सीमा से कई गुना ज्यादा हो जाता है।
अक्टूबर और नवंबर में मौसम भी प्रदूषण बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाता है। इस दौरान तापमान कम होने लगता है और हवा की रफ्तार धीमी हो जाती है। ऐसे में पटाखों से निकलने वाला धुआं हवा में ही जमा रहता है और आसानी से फैल नहीं पाता। इसके कारण दिल्ली-NCR में स्मॉग यानी धुंध की मोटी परत बन सकती है।
जहरीली हवा से सेहत को कितना खतरा?
प्रदूषण बढ़ने से लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को इसका सबसे ज्यादा खतरा रहता है।
PM 2.5 के छोटे कण सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंच सकते हैं। इसलिए प्रदूषण का स्तर ज्यादा होने पर बाहर निकलने से बचना और जरूरी सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
क्या कहते हैं पिछले पांच साल के आंकड़े?
पिछले पांच सालों के आंकड़े बताते हैं कि दिवाली की रात पटाखों और मौसम की वजह से प्रदूषण अचानक बढ़ सकता है। साल 2023 में औसत AQI सबसे कम रहा, जबकि 2025 में यह सबसे ज्यादा दर्ज किया गया। वहीं, 2022 में रात के समय PM 2.5 का स्तर सबसे अधिक 728 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंचा था।
कुल मिलाकर दिवाली पर आतिशबाजी और मौसम की खराब परिस्थितियां मिलकर दिल्ली-NCR की हवा को जहरीला बना सकती हैं। ऐसे में त्योहार मनाते समय पर्यावरण और अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है।



