आलू खरीदते समय ज्यादातर लोग उसका आकार और रंग देखकर ही उसे खरीद लेते हैं. लेकिन कई बार बाहर से अच्छा दिखने वाला आलू अंदर से खराब हो सकता है. अगर आलू बहुत नरम हो, उसकी त्वचा सिकुड़ी हुई हो, उस पर काले धब्बे हों या उसमें से खराब गंध आ रही हो, तो ऐसे आलू को खरीदने से बचना चाहिए. कुछ आसान संकेतों को देखकर आप खरीदते समय ही अच्छे और खराब आलू की पहचान कर सकते हैं.
कितने दिनों तक सही रहता है आलू?
अगर पूरे और कच्चे आलू को ठंडी, अंधेरी और सूखी जगह पर रखा जाए, तो वे करीब 2 से 3 महीने तक सही रह सकते हैं. वहीं सामान्य कमरे के तापमान पर रखे आलू लगभग 1 से 2 सप्ताह तक ही अच्छे रह सकते हैं. इसलिए आलू खरीदने के साथ-साथ उन्हें सही तरीके से रखना भी जरूरी है.
खरीदते समय आलू को छूकर देखें
अच्छा आलू हाथ में लेने पर सख्त महसूस होता है. अगर आलू बहुत नरम है या दबाने पर आसानी से पिचक रहा है, तो यह खराब होने का संकेत हो सकता है.
आलू की त्वचा भी ज्यादा सिकुड़ी हुई नहीं होनी चाहिए. अगर उस पर झुर्रियां, काले धब्बे, चोट के निशान और नरमी एक साथ दिखाई दे रही है, तो ऐसे आलू को खरीदने से बचना बेहतर है.
अंदर से काला आलू मिले तो सावधान
कई बार आलू बाहर से सामान्य दिखाई देता है, लेकिन काटने पर अंदर काला या गहरा भूरा हिस्सा नजर आता है. अगर इसके साथ आलू नरम है, बदबू आ रही है या सड़ने के दूसरे संकेत भी हैं, तो उसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
इसलिए खरीदते समय ऐसे आलू चुनें जिन पर चोट या गहरे धब्बे न हों.
फफूंद लगी हो तो न खरीदें आलू
अगर आलू पर साफ तौर पर फफूंद दिखाई दे रही है, तो उसे खरीदने या इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. केवल फफूंद वाला हिस्सा काटकर बाकी आलू इस्तेमाल करना भी सही नहीं माना जाता.
आलू से तेज या खराब गंध आना भी उसके खराब होने का संकेत हो सकता है. सामान्य कच्चे आलू में मिट्टी जैसी हल्की गंध हो सकती है, लेकिन तेज बदबू आने पर उसे इस्तेमाल न करें.
हरे आलू से रहें सावधान
अगर आलू की त्वचा पर ज्यादा हरा रंग दिखाई दे रहा है, तो ऐसे आलू को खरीदने से बचना बेहतर है. रोशनी के संपर्क में आने पर आलू हरा हो सकता है और उसमें सोलनिन जैसे ग्लाइकोएल्कलॉइड यौगिकों का स्तर बढ़ सकता है. ज्यादा मात्रा में इनका सेवन नुकसान पहुंचा सकता है.
इसलिए आलू को घर में भी ऐसी जगह रखें जहां सीधी रोशनी न पड़ती हो.
अंकुर निकले आलू को लेकर बरतें सावधानी
आलू में छोटे-छोटे अंकुर निकलना इस बात का संकेत हो सकता है कि वह लंबे समय से रखा हुआ है. अंकुर निकलने के साथ आलू में ग्लाइकोएल्कलॉइड की मात्रा बढ़ सकती है.
अगर आलू में बड़े अंकुर निकल आए हैं, खासकर जब वह सिकुड़ा या नरम भी हो गया हो, तो उसे इस्तेमाल करने के बजाय फेंक देना बेहतर है.
लाल हो या रसेट, संकेतों पर दें ध्यान
आलू लाल हो या रसेट, खराब होने के संकेत काफी हद तक एक जैसे होते हैं. बहुत ज्यादा नरमी, सिकुड़ी त्वचा, गहरे धब्बे, फफूंद, खराब गंध, ज्यादा हरा रंग या बड़े अंकुर दिखाई दें तो ऐसे आलू से बचना चाहिए.
सिर्फ आलू का रंग और आकार देखकर उसकी गुणवत्ता तय नहीं की जा सकती. उसे हाथ से दबाकर उसकी मजबूती और त्वचा पर मौजूद बदलावों को देखना भी जरूरी है.
आलू को लंबे समय तक कैसे रखें?
आलू को लंबे समय तक ताजा रखने के लिए उन्हें ठंडी, अंधेरी और सूखी जगह पर रखें. ऐसी अलमारी या कैबिनेट बेहतर है जहां सीधी धूप न आती हो.
आलू को ज्यादा गर्मी, नमी और रोशनी से बचाकर रखने पर उनके जल्दी खराब होने और अंकुर निकलने की संभावना कम हो सकती है. कच्चे आलू को फ्रीजर में रखना भी सही नहीं है, क्योंकि इससे उनकी बनावट और रंग में बदलाव आ सकता है.
इसलिए अगली बार आलू खरीदते समय सिर्फ उसका आकार और रंग न देखें. उसकी मजबूती, त्वचा, धब्बे, गंध और अंकुर जैसी चीजों पर भी ध्यान दें.
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