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Sat. Aug 30th, 2025

नीतीश – तेजस्वी : बिहार की राजनीति एक बार फिर करवट ले रही है। 2025 के विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में सियासी तापमान तेजी से चढ़ता जा रहा है। C-Voter के हालिया सर्वे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सर्वे के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लोकप्रियता अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है, जबकि उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की लोकप्रियता में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सक्रियता ने भी समीकरणों को और पेचीदा बना दिया है।

नीतीश कुमार फिर से बैकफुट से फ्रंटफुट पर?

लंबे समय से बिहार की राजनीति में “सुशासन बाबू” के नाम से पहचाने जाने वाले नीतीश कुमार एक बार फिर मजबूती से उभरते दिख रहे हैं। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि जनता का एक बड़ा वर्ग अब भी उन्हें स्थायित्व और अनुभव का प्रतीक मानता है। हाल के महीनों में उन्होंने कई ऐसी घोषणाएं और योजनाएं पेश की हैं, जो ग्रामीण और मध्यम वर्ग को सीधे प्रभावित करती हैं। इसका असर उनके जनाधार पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

विपक्षी दलों द्वारा भले ही नीतीश पर यू-टर्न लेने के आरोप लगते रहे हों, लेकिन उनकी प्रशासनिक पकड़ और सादा जीवन शैली अभी भी जनता को प्रभावित करती है। C-Voter के अनुसार नीतीश की स्वीकार्यता करीब 35% के आसपास है, जो किसी भी त्रिकोणीय मुकाबले में निर्णायक हो सकती है।

नीतीश की वजह से तेजस्वी यादव पर बढ़ा दबाव –

राजद नेता तेजस्वी यादव को 2020 के चुनावों में युवाओं और बेरोजगारों का बड़ा समर्थन मिला था, लेकिन 2025 से पहले यह जनसमर्थन कुछ खिसकता नजर आ रहा है। हाल ही में हुए घोटालों, आंतरिक गुटबाजी और बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार की निष्क्रियता ने उनकी छवि को प्रभावित किया है।

C-Voter के सर्वे में तेजस्वी की लोकप्रियता में लगभग 8% की गिरावट दर्ज की गई है। इसके पीछे कारण बताया जा रहा है कि युवाओं में अब पहले जैसी उम्मीद नहीं दिख रही है। साथ ही, उनकी पार्टी राजद में लगातार चल रही अंदरूनी खींचतान ने जनता में असमंजस की स्थिति बना दी है।

प्रशांत किशोर की एंट्री – खेल बिगाड़ेंगे या बनाएंगे?

राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर एक बार फिर बिहार की राजनीति में सक्रिय हो गए हैं। अपनी पार्टी ‘जन सुराज’ के जरिए वह गांव-गांव तक पहुंच बना रहे हैं। उनके लंबे जनसंपर्क अभियान और स्पष्ट दृष्टिकोण ने खासकर शिक्षित वर्ग और युवाओं को प्रभावित किया है। हालांकि उनकी पार्टी का वोट प्रतिशत अभी सीमित बताया जा रहा है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि PK का असर अन्य दलों के वोट बैंक पर निश्चित तौर पर पड़ेगा।

प्रशांत किशोर की छवि एक “पॉलिटिकल इंजीनियर” की बन चुकी है। वह अब खुद चुनावी मैदान में उतर रहे हैं, इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह सिर्फ समीकरण बिगाड़ेंगे या कोई बड़ा उलटफेर करेंगे।

गठबंधन और समीकरण – क्या फिर बदलेगा खेल?

बिहार की राजनीति में गठबंधन अहम भूमिका निभाते हैं। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि 2025 में NDA और INDIA गठबंधन की स्थिति कैसी रहेगी। नीतीश कुमार के भविष्य को लेकर कयासों का दौर जारी है। वहीं भाजपा भी अपने रणनीतिक पत्ते धीरे-धीरे खोल रही है।

राजद को इस बार न केवल जनता के सामने खुद को साबित करना है बल्कि गठबंधन के भीतर भी एकजुटता बनाए रखनी है। कांग्रेस की निष्क्रियता और वामपंथी दलों की सीमित पकड़ ने तेजस्वी के लिए रास्ता और कठिन कर दिया है।

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