कांगो में इबोला का कहर
अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 4,381 मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 2,011 लोगों की मौत हो गई है। करीब 704 मरीज अभी अस्पतालों में आइसोलेशन में हैं।
सिर्फ 3 हफ्तों में इबोला से दोगुनी हुई मौतें
इस बार इबोला का संक्रमण बेहद तेजी से फैल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, मौतों का आंकड़ा 1,000 तक पहुंचने में करीब 9 हफ्ते लगे थे, लेकिन इसके बाद अगले 1,000 मौतें सिर्फ करीब 3 हफ्तों में हो गईं। इसी वजह से इसे अब तक के सबसे तेजी से बढ़ने वाले इबोला प्रकोपों में से एक बताया जा रहा है।
Bundibugyo स्ट्रेन ने बढ़ाई चिंता
इस प्रकोप की वजह Bundibugyo वायरस है, जो इबोला वायरस की एक प्रजाति है। WHO के मुताबिक, इस वायरस के लिए फिलहाल कोई लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि, संभावित वैक्सीन और उपचार को लेकर काम चल रहा है।
स्वास्थ्य अधिकारी संक्रमण को रोकने के लिए मरीजों को आइसोलेट करने, संपर्क में आए लोगों की पहचान करने, निगरानी बढ़ाने और बेहतर इलाज जैसी कोशिशें कर रहे हैं। WHO ने भी DRC और पड़ोसी देशों में निगरानी और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया है।
मई में इबोला की हुई थी आधिकारिक घोषणा
कांगो में इस इबोला प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई को की गई थी. हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, वायरस का संक्रमण इससे काफी पहले ही शुरू हो चुका था.
WHO ने बताया कि कांगो में यह प्रकोप सही में फरवरी में शुरू हुआ था और कई महीनों बाद इसकी पहचान हो सकी.
कांगो और युगांडा में इबोला के प्रकोप की पुष्टि
वहीं, WHO के अनुसार कांगो और युगांडा में इबोला के प्रकोप की पुष्टि मई में हुई थी. संक्रमण को रोकने के लिए स्वास्थ्य एजेंसियां निगरानी बढ़ाने, संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों की पहचान करने, मरीजों को इलाज और आइसोलेशन की सुविधा देने के साथ जरूरी मेडिकल सामान की उपलब्धता पर काम कर रही हैं.
इबोला के किस कारण बनी बड़ी चिंता
इबोला के इस प्रकोप को लेकर सबसे बड़ी चिंताओं में से एक यह है कि वायरस आधिकारिक तौर पर सामने आने से पहले कितने समय तक फैलता रहा.
WHO के मुताबिक, फरवरी में संक्रमण शुरू होने और मई में इसकी आधिकारिक घोषणा के बीच का अंतर काफी जरूरी है.
शुरुआती पहचान बेहद जरूरी
किसी भी इबोला संक्रमण को रोकने में शुरुआती पहचान बेहद जरूरी होती है. इससे संक्रमित मरीजों को समय पर अलग किया जा सकता है, उनके संपर्क में आए लोगों का पता लगाया जा सकता है और वायरस के आगे फैलने की संभावना को कम किया जा सकता है.
कांगो में 17वीं बार फैला इबोला
यह कांगो में इबोला का 17वां प्रकोप है. इबोला वायरस की पहली पहचान 1976 में इबोला नदी के पास हुई थी. मौजूदा प्रकोप को कांगो का अब तक का सबसे बड़ा इबोला आउटब्रेक बताया जा रहा है.
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