गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को है, गणेश स्थापना गणेश उत्सव के पहले दिन की जाती है, उसकी तरह अनंत चतुर्दशी पर बप्पा की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है. गणेश विसर्जन स्थापना के डेढ़ दिन, तीसरे दिन, पांचवें दिन, सातवें दिन और अनंत चतुदर्शी पर किया जाता है. पंचांग के अनुसार यहां जानें विसर्जन के शुभ मुहूर्त.
अनंत चतुर्दशी गणेश विसर्जन मुहूर्त 2026
- प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 06:11 से 10:42
- अपराह्न मुहूर्त (चर) – 16:44 से 18:14
- अपराह्न मुहूर्त (शुभ) – 12:13 से 13:43
- रात्रि मुहूर्त (लाभ) – 21:14 से 22:43
- रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – 00:13 से 04:42, सितम्बर 26
डेढ़ दिन गणेश विसर्जन – 15 सितंबर 2026
- प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 12:16 से 13:49
- अपराह्न मुहूर्त (शुभ) – 15:21 से 16:54
- सायाह्न मुहूर्त (लाभ) – 19:54 से 21:21
- रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – 22:49 से 03:11, सितम्बर 16
तीसरे दिन गणेश विसर्जन – 16 सितंबर 2026
- प्रातः मुहूर्त (शुभ) – 10:43 से 12:16
- अपराह्न मुहूर्त (चर, लाभ) – 15:20 से 18:25
- सायाह्न मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – 19:53 से 00:16, सितम्बर 17
- उषाकाल मुहूर्त (लाभ) – 03:11 से 04:39, सितम्बर 17
- प्रातः मुहूर्त (लाभ, अमृत) – 06:06 से 09:11
पांचवें दिन गणेश विर्सजन – 18 सितंबर 2026
- प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 06:07 से 10:43
- अपराह्न मुहूर्त (चर) – 16:51 से 18:23
- अपराह्न मुहूर्त (शुभ) – 12:15 से 13:47
- रात्रि मुहूर्त (लाभ) – 21:19 से 22:47
- रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – 00:15 से 04:40, सितम्बर 19
सातवें दिन गणेश विर्सजन – 20 सितंबर 2026
- प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 07:40 से 12:14
- अपराह्न मुहूर्त (शुभ) – 13:46 से 15:17
- सायाह्न मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – 18:20 से 22:46
- रात्रि मुहूर्त (लाभ) – 01:43 से 03:12, सितम्बर 21
- उषाकाल मुहूर्त (शुभ) – 04:40 से 06:09, सितम्बर 21
गणेश विसर्जन की विधि
- सबसे पहले गणेश जी को स्नान या शुद्ध जल से पूजा करके मोदक, फल और अन्य सात्त्विक नैवेद्य अर्पित करें.
- आरती करें और परिवार के सभी सदस्य भगवान से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करें.
- इसके बाद प्रतिमा को सम्मानपूर्वक उठाकर विसर्जन स्थल तक ले जाएं.
- विसर्जन स्थल पर दोबारा आरती करके गणपति को प्रणाम करें और श्रद्धापूर्वक प्रतिमा का विसर्जन करें.
- परंपरा में गणेश जी के साथ नैवेद्य आदि अर्पित करने का भी उल्लेख मिलता है.
विसर्जन के समय इन बातों का रखें ध्यान
- गणेश जी की प्रतिमा को फेंकें नहीं, बल्कि सम्मानपूर्वक जल में विसर्जित करें.
- विसर्जन से पहले उत्तरपूजा और आरती जरूर करें.
- पूजा में चढ़ें फूल और अन्या निर्माल्य (चढ़ी पूजा सामग्री) को इधर-उधर न फेंकें.
- विसर्जन के लिए जलस्रोत या व्यवस्था का ही उपयोग करें.
विसर्जन से पहले करें उत्तरपूजा
विसर्जन से पहले भगवान गणेश की उत्तरपूजा करनी चाहिए. इसमें भगवान को गंध, अक्षत, पुष्प, दूर्वा, हल्दी, कुमकुम, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है. इसके बाद आरती और प्रार्थना करके भगवान को सम्मानपूर्वक विदाई दी जाती है. उत्तरपूजा के बाद गणेश प्रतिमा को स्थान से थोड़ा खिसकाने की भी परंपरा मिलती है.
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