हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। जब त्रयोदशी तिथि गुरुवार के दिन पड़ती है, तो इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव और देवगुरु बृहस्पति की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इस बार गुरु प्रदोष व्रत 24 सितंबर 2026, गुरुवार को रखा जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। मान्यता है कि पूजा के बाद कुछ विशेष कार्य करने से व्रत का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
पूजा के बाद करें ये 3 काम
1. भगवान शिव को सात्विक भोग लगाएं और प्रसाद बांटें
शिव पूजा पूरी होने के बाद भगवान शिव को सात्विक भोग अर्पित करने की परंपरा है। इसमें ताजे फल, मखाना, पंचामृत, सफेद मिठाई या घर में शुद्ध तरीके से तैयार किया गया कोई सात्विक मिष्ठान शामिल किया जा सकता है।
भोग लगाने के बाद प्रसाद को परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों में श्रद्धापूर्वक बांटें। धार्मिक मान्यताओं में प्रसाद वितरण को पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।
2. जरूरतमंदों को करें दान
गुरुवार को गुरु ग्रह से जुड़ा दिन माना जाता है। इसलिए गुरु प्रदोष के अवसर पर जरूरतमंद लोगों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार भोजन, वस्त्र या अन्न का दान करने की परंपरा है।
मान्यता के अनुसार, इस दिन पीली वस्तुओं, जैसे चने की दाल, हल्दी, बेसन से बनी मिठाई या केले का दान भी शुभ माना जाता है। हालांकि दान हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार और बिना किसी दिखावे के करना चाहिए।
3. 108 बार करें ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप
पूजा समाप्त होने के तुरंत बाद उठने के बजाय कुछ समय शांत बैठकर भगवान शिव का ध्यान करना भी शुभ माना जाता है। भक्त रुद्राक्ष की माला से या मन ही मन 108 बार ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप कर सकते हैं।
इसके बाद भगवान शिव से परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे मन को शांति मिलती है और व्यक्ति पूजा के बाद कुछ समय आध्यात्मिक एकाग्रता में रह पाता है।
गुरु प्रदोष के दिन इन बातों का रखें ध्यान
प्रदोष व्रत के दौरान धार्मिक मान्यताओं में संयम और सकारात्मक आचरण पर जोर दिया जाता है। इस दिन पूजा के बाद किसी से अपशब्द बोलने या अनावश्यक विवाद करने से बचने की सलाह दी जाती है।
इसके अलावा ईर्ष्या, क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहने तथा घर के बुजुर्गों का सम्मान करने की परंपरा है। उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना भी शुभ माना जाता है।
Disclaimer
यह खबर धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय जानकारी पर आधारित है। NAV24news इन मान्यताओं की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी धार्मिक उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।



