झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को PMLA से जुड़े जमीन मामले में सोमवार को रांची की विशेष अदालत से राहत नहीं मिली। अदालत ने उनकी उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने मामले में आगे की जांच जारी रहने का हवाला देते हुए चार्ज फ्रेम करने की प्रक्रिया टालने की मांग की थी।
हेमंत सोरेन ने क्यों मांगा था समय?
हेमंत सोरेन की ओर से दलील दी गई कि मामले में ED की आगे की जांच अभी जारी है। ED ने जरूरत पड़ने पर बाद में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल करने की बात भी कही है। इसलिए बचाव पक्ष का कहना था कि जांच पूरी होने से पहले आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़नी चाहिए।
ED ने अर्जी का किया विरोध
ED ने सोरेन की मांग का विरोध किया। एजेंसी ने इसे मामले की कार्यवाही में देरी करने की कोशिश बताया। ED ने कहा कि इस मामले में सोरेन की डिस्चार्ज अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी है। इसके बाद झारखंड हाईकोर्ट ने भी 18 सितंबर को आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने की उनकी मांग को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने क्या कहा?
विशेष PMLA अदालत ने कहा कि किसी मामले में आगे की जांच जारी रहने का मतलब यह नहीं है कि पहले से दाखिल अभियोजन शिकायत पर कार्रवाई रोक दी जाए।
अदालत के अनुसार, PMLA की धारा 44 के तहत आगे की जांच की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर पूरक शिकायत भी दाखिल की जा सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि मूल शिकायत के आधार पर चल रही कानूनी प्रक्रिया अपने आप रुक जाएगी।
सर्वर डाउन होने से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नहीं हो सकी
सोमवार को हेमंत सोरेन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश होना था। लेकिन Jio सर्वर में तकनीकी समस्या के कारण उनकी वर्चुअल पेशी नहीं हो सकी। इसके बाद अदालत ने चार्ज फ्रेम करने से जुड़ी सुनवाई के लिए 24 सितंबर 2026 को दोपहर 3:30 बजे का समय तय किया।
मामले में 8.86 एकड़ जमीन का विवाद
यह मामला रांची के बड़गाईं इलाके की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले का है। ECIR Case No. 06/2023 में हेमंत सोरेन आरोपी हैं और मामले में PMLA के तहत कार्यवाही चल रही है।
दस्तावेजों को लेकर भी उठाया गया मुद्दा
सुनवाई के दौरान सोरेन के वकील ने आरोप लगाया कि ED ने कुछ ऐसे दस्तावेजों की सूची उपलब्ध नहीं कराई है, जिन पर वह भरोसा नहीं कर रही है। ED ने इसका विरोध करते हुए कहा कि अदालत के निर्देश का पालन किया जा चुका है और जरूरत पड़ने पर सूची फिर से उपलब्ध कराई जा सकती है।
अब 24 सितंबर को अदालत में चार्ज फ्रेम करने की प्रक्रिया को लेकर सुनवाई होगी।
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