ट्रैवल इंश्योरेंस को न करें नजरअंदाज
बारिश के मौसम में पहाड़, झरने और हरियाली देखने का अपना अलग मजा है। लेकिन मानसून में सफर के दौरान कई तरह की परेशानियां भी हो सकती हैं। फ्लाइट लेट या कैंसिल होना, भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन और अचानक मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थिति आपकी पूरी ट्रिप का प्लान बिगाड़ सकती है।
ऐसे में सफर पर जाने से पहले ट्रैवल इंश्योरेंस लेना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। यह अचानक होने वाले खर्च और नुकसान से आर्थिक सुरक्षा देने में मदद करता है।

फ्लाइट लेट या कैंसिल होने पर मिल सकती है मदद
मानसून में खराब मौसम के कारण फ्लाइट में देरी या उसे कैंसिल किए जाने की स्थिति बन सकती है। कुछ ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी में फ्लाइट डिले और ट्रिप कैंसिलेशन का कवरेज मिलता है।
अगर पॉलिसी में कवर की गई वजह से ट्रिप कैंसिल होती है, तो होटल और यात्रा की बुकिंग पर हुए कुछ खर्च की भरपाई मिल सकती है। हालांकि, हर स्थिति में मुआवजा नहीं मिलता। इसलिए पॉलिसी खरीदने से पहले उसके नियम और शर्तें जरूर पढ़ें।
मेडिकल इमरजेंसी में भी काम आता है इंश्योरेंस
मानसून में घूमने के दौरान अचानक बीमार पड़ने या दुर्घटना होने पर अस्पताल का खर्च काफी बढ़ सकता है। ट्रैवल इंश्योरेंस की कुछ पॉलिसियों में मेडिकल इमरजेंसी, अस्पताल में भर्ती और इमरजेंसी इवैक्युएशन जैसी सुविधाएं मिलती हैं।
पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में यात्रा करने वालों के लिए यह कवरेज खास तौर पर उपयोगी हो सकता है।
सामान खोने या देरी से मिलने पर भी कवरेज
बारिश के मौसम में यात्रा के दौरान सामान खोने, चोरी होने या देरी से मिलने की परेशानी भी हो सकती है। कई ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसियों में इसके लिए भी कवरेज दिया जाता है।
हालांकि, कवरेज की सीमा और शर्तें अलग-अलग पॉलिसी में अलग हो सकती हैं। इसलिए टिकट बुक करने के साथ-साथ इंश्योरेंस लेते समय यह जरूर देखें कि फ्लाइट डिले, ट्रिप कैंसिलेशन, मेडिकल खर्च और बैगेज में से क्या-क्या कवर किया जा रहा है।
ध्यान रखें: ट्रैवल इंश्योरेंस लेने से पहले पॉलिसी के exclusions यानी किन परिस्थितियों में क्लेम नहीं मिलेगा, इसे ध्यान से पढ़ना सबसे जरूरी है।
पहले यह जरूर जांचें
पॉलिसी खरीदते वक्त प्रीमियम के साथ यह जरूर देखें कि उसमें मेडिकल इमरजेंसी, ट्रिप कैंसिलेशन और सामान खोने जैसे जरूरी कवरेज शामिल हैं या नहीं. साथ ही ऐसी कंपनी चुनें जिसका क्लेम सेटलमेंट रिकॉर्ड अच्छा हो, ताकि जरूरत पड़ने पर क्लेम मिलने में दिक्कत न आए.
